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बिहार में दिवाली पर सूप क्यों? रहस्य सुन चौंक जाएंगे! | Oneindia Hindi
दिवाली, खुशियों और रोशनी का त्योहार, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस उत्सव से जुड़ी एक ऐसी परंपरा है जो आपको हैरान कर देगी? बिहार में दिवाली के अगले दिन सुबह-सुबह, महिलाएं तेज़ आवाज़ में सूप बजाती हैं और कुछ कहती हैं। इसके पीछे एक गहरा पौराणिक रहस्य छिपा है, जो दरिद्रता और दुर्भाग्य की प्रतीक देवी अलक्ष्मी से जुड़ा है।
About the Story:
This video explores a unique post-Diwali tradition in Bihar, India, where women beat "soop" (winnowing baskets) early in the morning. It delves into the ancient belief of banishing Alakshmi, the goddess of poverty and misfortune, after invoking Lakshmi during Diwali. The practice is a symbolic ritual to cleanse homes of negative energy and ensure prosperity.

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Transcript
00:00बिहार में दिवाली के अगले दिन भोरे-भोरे मतलब ब्रभ मुहूर्त में लोग सूप डबडबाते हैं।
00:05आप जहाँ देखेंगे महिलाएं तेज तेज आवाज में सूप बजा रही होती हैं और कुछ कह भी रही होती हैं।
00:12सुनने में आपको अजीब लग रहा होगा लेकिन इसके पीछे बड़ी मज़िदार पौराणी कहानी है।
00:42लगाने की कुछ ऐसी परंपराओं की जो शायद आपको चौका देगी।
00:46देवी लक्ष्मी का आगमन हम सब चाहते हैं।
00:49लेकिन क्या आपको पता है कि लक्ष्मी के साथ उनकी बहन अलक्ष्मी भी आ जाती है।
00:53अलक्ष्मी, दरिदृता, दुरभाग्या और नकारथमक्ता की प्रतीक होती है।
00:59कहा जाता है कि जहां अलक्ष्मी का आवास होता है, वहां सम्रिदी नहीं ठिकती।
01:03दिवाली की रात जब हम लक्ष्मी का आवाहन करते हैं उसी समय हमें अलक्ष्मी को विदा करना होता है। ऐसा होता है कि वो लक्ष्मी के साथ आही जाती है। हम आगे आपको बताएंगे कि उन्हें कैसे विदा करना होता है। वहाँ कैसे इस परंपरा को निभाया जाता है।
01:33पहला चौक आने वाला तरीका सूप पीटना जी हां यह वही सूप है जिसकी बात हमने बिल्कुल शुरूआत में कि थी सूप आप सब को पता ही होगा जिससे अनाज साफ किया जाता है गाओं किसे जो लोग जुड़े हैं वो तो सूप को जरूर ही जानते होंगे तो दिवाल
02:03दूर जा लक्ष्मी घरा घर में जमा सारी गंदगी दरिद्रता और दुभागे को पीट पीट कर बाहर निकाला जाता है यह द्रिश्य जितना अजीब लग सकता है उतना ही शक्तिशाली माना जाता है और मज़ेदार तो है ही दूसरा हैरान कर देना वाला तरीका है दीपक
02:33लक्ष्मी को घर से विदा करने का तरीका है उसे जाड़ू से बाहर कर दीपक से रास्ता दिखा कर मतलब जाड़ू है जाड़ू है जाड़ू से हम दरिद्रता को बाहर कर रहे हैं और दीपक से रास्ता दिखा रहे हैं कि यह आपके बाहर जाने का रास्ता है इस उनिश्य
03:03पत्ति हैं वह हैं अंधेहरी कोट्री का रहस्या यह माला जाता है कि अलक्षमी को गंधिगी और अंधेरे में रहना पसंद है इसलिए दिवाली की रात एक कमरे को छोड़ कर बाकि सभी कमरों में रोशनी की जाती है वह एक कमरा जोसे जान-बुच कर गंदा और अंधेरा र�
03:33और तुरह डरावना भी हो सकता है। खर ये तरीके हमें बताते हैं कि कैसे हमारे पूर्वजों ने नकरात्मक उज्जा को दूर करने के लिए न सिर्फ आध्यात्मिक बलकि प्रतिकात्मक और मनोवैज्ञानिक उपाय भी खोजे थे। और लक्षमी की कहानी और उसे भगाने
04:03नहीं है बलकि अलक्षमी की विदाई का त्योहार भी है। उसकार।
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