00:00इस साल धंतेरस 18 ओक्टुबर दिन शनिवार को मनाय जा रहा है वही कई घरों में धंतेरस की शाम यम दीपक जलाने का विधान है तो वही कुछ घरों में ये दीपक नरक चतुरदशी के दिन जलाय जाता है
00:18आईए इस वडियो में हम आपको बता दे कि अगर आप धंतेरस या फर नरक चतुरदशी दोनों में से किसी भी एक दिन यम का दीपक जलाने जा रहे हैं तो दीपक जलाने की विधी क्या होगी साथ ही अगले दिन उस दीपक का क्या करना है
00:32सबसे पहले तो आपको बता दे कि मिट्टी का एक दिया लेना है ये एक चोव मुखी दिया होगा ऐसे में इस पर बाती ऐसे रखे कि चारों दिशाओं की तरफ बातीयों का मुँ हो सके इसमें आप तेल या सरसों का तेल डाल दे थोड़ा सा पानी भी मिला दे अब शाम को ग
01:02स्थान पर रखते आप चाहें तो एक कटोरी में अक्षत रखकर भी उस पर दिया सजा सकते हैं जान रहें दक्षण दिशा की और मुखर की ही दीपक रखना होगा क्योंकि दक्षण दिशा यम्राज की दिशा मानी गई है दीप जलाते समय इस मंत्र का जाप करें यम दीप
01:32हस्तेन कालेन भैदाईन दीपदानेन में यम दत्तोयम सुख मावह अर्थ हैं हे यम्राज इस दीपदान से मुझे भैसे मुक्ति दे और सुख प्रदान करें अब दीपक को बाहर ही छोड़ दे यम दीपक घर के अंदर नहीं लाते इसे रात भर जलने दे अगर बुझ जा
02:02रूप से एक दिन ही जलाने का विधान है अगर आपने धंतेरस पर इस दीपक को जलाया है और पांच दिनों तक नहीं जलाने वाले तो अगले दिन इसे किसी पेड के नीचे रखाएं या फिर मिट्टी में भी गार सकते हैं इसे यूँ ही कूडे में ना फेक हैं वहीं अ�
02:32खूब झालेड़ести की जल में वहीं password हैं चक्यां प्रश खोब हो शोच्वारे 아니고 बहीं टेंडते हैं अच्ठ़ हैं आजए कि टें गिना याभज की में प्रचे टूआ सूले होचिएो ने बlor खूआ कमा घं ये लिड़टें आपा सकते हैं आहिएां आप सक्षें आहीपा आ�