00:00हरे कृष्ण दोस्तो, मिशन भगवत गीता श्लोक दिवसेंतीस, अध्याएं एक, श्लोक छत्तीस, निहत्य धार्त राष्ट्रान्य का प्रितिय स्याज जनार्दन, पाप में वाश्रय दिस्मान हत्वैता नात्ताई न, भावार्थ, हे जनार्दन, धृत राष्ट्र के पु
00:30अपने हैं, इसलिए उनका वद भी हमारे लिए दुखद और पाप में ही होगा, इस श्लोक में अर्जुन स्पष्ट कर रहे हैं कि, युद्ध में अपने ही लोगों को मार कर कोई वास्तविक जीत संभव नहीं है, ये केवल दुख और पाप का कारण बनेगा, रोज सुनि
01:00अगर आपको ये ज्यान प्रेरक लगा हो, तो इसे अपने अपनों तक जरूर पहुँचाएं, जै श्री कृष्ण, जै धर्म की विजय,
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