00:00नमस्कार आप देखारें आज तक और आपके साथ मैं हूँ शैशी शर्मा
00:06बहुत स्वागत है आपका हमारी इस खास पेशकश में क्योंकि दीपावली का पावन पर्व हर साल कार्टिक मास की अमावस्यातित्थी को मनाए जाता है
00:18और इस साल अमावस्या तिथी का संयोग जो है वो है दो दिन का
00:23ऐसे में सवाल अब ये उठाया जा रहा है कि आखिर दिवाली मनाई कब जाएगी
00:2720 ओक्टूबर को या फिर 21 ओक्टूबर को
00:30इस पर विशेश चर्चा के लिए हमारे साथ हमारे खास मेमान जुड़ रहे हैं
00:34साथी साथ तमाम जो सवाल हमारे सब के मन में रहते हैं
00:37उन्हें भी हम जाने की कोशिश करेंगे इन तमाम विशेशग्यों से
00:40कर्मकान के विशिशग्य इस खास पेशकश में हमारे साथ हैं
00:44सबसे पहले हम वेलकम करना चाहेंगे
00:46प्रफेसर पवन सिनहा का इस लॉजर हैं हमारे साथ जोड़ गए हैं
00:50पंडित रमन्त रिवेदी हमारे साथ जोड़ गए हैं
00:52जो के चीफ प्रीस्ट है माहाकाल टेंपल के
00:54इसके साथी साथ स्वामी जितिंद्रा नंध हमारे साथ हैं
00:57जनरल सेकेटरी हैं अखिल भारतिय संत समिती के आप तीनों का बहुत स्वागत है
01:02इसी के साथ मेरे साथ स्टूडियो में चार और खास महमान हैं
01:07जो बताएंगे कि क्यों 20 या क्यों 21 तारीकों ने चुना है
01:11हमारे साथ हैं पंडित राजकुमार शास्त्री बहुत स्वागत है आपका
01:14मनीशा कौशिक है हमारे साथ बहुत स्वागत है आपका
01:17मनीशा जी आचारे राज मिश्र हैं बहुत स्वागत है आपका
01:20और साथ ही साथ जो हमारे चौथे महमान हैं वो हैं पंडित प्रकाश जोशी, बहुत स्वागत है आपका भी पंडित प्रकाश जी, शिरुवात मैं आप से कर लेती हूँ कि राजी सबसे पहले मैं आप से समझने के कोशिश करूँगी कि किस तारीख को आपके हिसाब से इस ब
01:50इंपोर्टन्ट यह है कि सास्तो रवाक्य में क्या कहता है जो इस प्रकार का कोई भरम होता है तो सास्त रवाक के ही प्रमाण माना जाता है और दीपावली पंच दिवसिये ते ऊहा रहा है, एक दिवस की नहीं है लेकिन फिर भी, अगर मैं दीपावली की अस्पस्ता को न
02:20या प्रतिपदा संब्रधे मतलब इस लोक का असपस रूप से ये कहा गया कि यदि अमावश्या एक दिन प्राप्त हो बाकाइदा प्रदोशकाल में और अगले दिन वो साड़े तीन महूर साड़े तीन प्रहर से अधिक हो जाए तो ऐसी परिस्तिती में अगले दिन उसको मन
02:50अगले दिन अगर मैं उठाकर के देखूं प्रतिपदा को तो आट बच करके सत्रा मिनट पर खत्म हो रही है इस द्रिश्टी से अगर हम प्रतिपदा को देखें तो बरदगाम नहीं मानी जाएगी अब बहुत सारे लोगों का एक कई सारा मत उत्पन हुआ कि शाप प्रति
03:20इस पस्ट रूप से पहले आपको ये भ्रम इसलिए हो रहा है क्योंकि हमें यह समझ में आना चाहिए बिभिन प्रकार के पंचांग है
03:28काशी का पंचांग अलग है विद्यापीठ पंचांग अलग है और चंडीगर से छपने वाले पंचांग अलग है
03:35और अलग अलग जगह का अलग अलग सूर्योदे है
03:39आपको पहले ये समझना पढ़ेगा कि पंचांग का संसकार कैसे होता है
03:43पंचांग तीन सिध्धान्तों पर तयार होता है
03:46एक केतकी गणित के आधार पर पंचांग का निर्माण होता है
03:50दूसरा द्रग गणित के आधार पर पंचांग का निर्माण होता है
03:54और तीसरा सूर शिद्धान्त को ले करके पंचांग का निर्माण किया जाता है
03:59इन तीन शिद्धान्तों के आधार पर हमारा जो भारत देश है
04:03यदि आप green बीच में जाते हैं तो green बीच से 82 अंस पूर्ब दिशा में भारत देश इस्थीत है
04:11अब यहाँ पर 82 में यदि आप 4 का गुणा कर देते हैं
04:15तो जब भारत में 5.30 बजेंगे सुबह के तो green बीच में रात्री के 12 बचते हैं
04:22और रात्री के 12 बजे से अंग्रेजी तारीक का परिवर्तन होता है
04:27अब यहाँ पर आप देखिए कि 20 तारीक को प्रदोष व्यापनी अमावश्या का आरंभ होता है
04:35जो की 3 बज करके 44 मिनट से सुरू होती है
04:38दीपावली पंच दिवसी परव है इसमें कोई संदेह नहीं
04:42और दीपावली का जो पंच दिवसी परव है वह एकादसी से सुरू होता है
04:48एकादसी, दौादसी, तरयोदसी, चतुरदसी और अमावश्या को जाकर के समाप्त हो जाता है
04:54यदि सायंकाल में प्रतिपदा तिथी आरम होती है तो पंच दिवसिय दीपावली पर्व अमावस्या को समात होता है
05:02प्रतिपदा में दीपावली का कोई महतुर रही नहीं जाता
05:06इसलिए आप किसी भी इस्तिती में सायंकाल रात्री कालीन में दीपावली का पूजान 21 तारी को सायंकाल 5 बज करके 55 मिनट के भाद में नहीं कर सकते
05:20यदि आप करेंगे तो उसमें दोस्त के भागी और बनेंगे
05:23क्योंकि दीपावली का 25 पर वही अमावस्यातक होता है
05:28सबसे पहले तो यहां पर जो विद्वान उपस्तित हैं उनको प्रणाम रिशित करता हूँ
05:49और सभी लोगों को जो आज तक के दर्शक हैं आपके माद्यम से उनको दीपावली के 5 दिवस के बधाई देता हूँ
05:58मैं जो कहने जा रहा हूँ उसमें मैं श्री राजकुमा शास्री जी के साथ जादा मताक्या रखता हूँ
06:05कि उनका जो इस मामने में कहना है वह मुझे जादा ठीक लगता है
06:10देखे जिन शेहरों में सूरियास्ट शाम को साड़े पांच बजे से पहले है वहां तो 21 को मनाई जा सकती है
06:18लेकिन जिन शेहरों में साड़े पांच बजे के बाद सूरियास्ट होगा वहां पर 20 को ही मनाई जाएगी
06:28और चूंकि पंचांग अलग अलग शेहरों के इसाब से बनाए जाते हैं उज्जैन के इसाब से दक्षन के अलग पंचांग है
06:36तो यदी हम एक uniform category बनाना चाहें तो हम इसको रख सकते हैं
06:42साड़े पांच बजे का time उसमें है कि अगर सूरियास्त हो गया साड़े पांच बजे से पेहले
06:47तो 21 को साड़े पांच बजे के बाद सुरियास्त है तो 20 को और जो मेन जो तीन 45 के बात किसम है
06:55जो आचारे शासी जी ने भी दिया भी था तो उसके बाद पितर पूजन भी कर सकते हैं और प्रदोश काल बीस को ही हमें मिलेगा क्योंकि प्रदोश व्यापनी जब तक ना हो दिपावली तब तक उसका कोई लाब नहीं है उसके इतर तो दोशमूर हो जाएगी और वो हमको म
07:25जो मिलेगा जिसमें पूजा की जाती है मालक्षमी की साथ बचके आठ मिनट पर रात में नो बचके तीन मिनट तक तो मेरे विचार से ये तो बीस की ही दीपावली पूरे भारत को मनानी चाहिए
07:41हमारे साथ हमारे बाकी के महमान भी हैं पंडित रमन्त रुवेदी हैं बहुत जादा कंफ्यूजन है बहुत जादा भ्रहम की स्थिती है बीस या इकीस आप क्या कहेंगे दर्शकों को किस दिन दीपावली मनाई जानी चाहिए और क्यूं आपके हिसाब से
07:55सबसे पूर उतों भखवार महाकाल का सबको आशिरवाद दीपावली महापरव हमारे हिसाब से जो सेंटर आप दो वरड़ है महाकाल इश्वार बीस तारिक को ही मनाना उचिद है बीस तारिक को महालक्ष्मी की पूजा रात्रिकाल में होती है इकीस तारिक को वो योग नहीं
08:25ल्दंबग चार मैंसे लगेगी तो दूसरे दिन तर्क पाँच मैंस तखे इसलिए दूसरे दिन का कोई महत्पनी है जख़कि रात्री का महत्पन नहीं है
08:34महालक्ष्पी के पूजा, महालक्ष्पी के वर्चन और धीपावली के जित्ते भी तारी है, वो सब योग बीस तारीक को बन रहा है, सोंबार को बन रहा है, और इसलिए मैं मेरी योड़ से, मैं सभी विश्व में फेले हुए सरातर धर्मी को बताना चाता हूँ, जो आज तक
09:04महालक्ष्पी पूजा होती है, उसी दिन सब कुछ होता है, और उसी दिन होना चाहिए, यही मेरी कामना है, आप सबको हमारी वोड़ से बहुत बहुत शुक्ष्पामना है, भगवाल महाकाल का अशिरवाद.
09:15जै माकाल, बहुत धन्यवाद आपका, हमारसा स्वामी जितेंद्रानन भी हैं, सरस्वती जी, आप हमें पिताइए कि आपके हिसाब से कौन सी थी, महतुपूने कौन सी थी बहुत विशेश है, पूजा अरचना के लिए, दीपावली मनाने के लिए, मालक्ष्मी की पूजा
09:45को प्रमुकता दे करके, इस देश पर जो बिदेशी घुलामी के निसान ठोपने की कोशिस है, यही मूल विवाद के जड़ में है, इसलिए अपने लोकल पूरोहित पर भरोसा करिए, अपने लोकल जोतिसी पर भरोसा करिए, वहां पर सुर्यास्त का मान क्या मिल रहा है, प
10:15आपके हिसाब से कौन सी तारीक है?
10:45देखिए इसमें दो स्कूल ऑफ थॉट आते हैं, जैसे राज जी बता रहे थे, एक स्कूल ऑफ थॉट क्या कहता है, कि आप उदेय तिथी को लेंगे, उदेय तिथी, अब सन्राइज जो है, जब सुर्यास्त हुआ है, वो तब अमावस्या है, इसलिए लोग उसे 21 को प्र
11:15आए हैं, वो अमावस्या की रात में कहा गए है, शिवरातरी हो, जन्माष्ट में हो, जहां रातरी का महतवात है, दिवाली का भी महतवर रात का है, और रातरी हमें 20 तारीक की रात को मिल रही है, उसके साथ साथ, जब हम बात पूजन की करते हैं, मालक्षमी की पूजन की,
11:45भगवान श्री राम जब 14 वर्ष के वनवास के बाद घर लोटे थे तो उनका स्वागत दीपों से किया गया था, इसलिए भी हम दिवाली मनाते हैं, और वो जो स्वागत हुआ था, जो दीप जलाए गए थे, तो वो रात का समय था, मालक्षमी का जो पूजन है, उसके लिए
12:15पांच मच के पैटालीस मिनट पर सूर्यास्तथ हो जाएगा और पांच पचपन के करीब जो है, वो अमगस्या तिति नहीं रुक रही, तो घडियां भी हमें उतनी नहीं मिल रही है, प्रदोश व्यापणी वो प्रदोश व्यापणी तिति जो है, वो हमें 20 तारीक पूज
12:45परने एक कहता है दिन दोए सत्वा आ सत्वे परा यानि कि अगर दो दिन आमावस्य होती है चाहे वो व्यापती हो या आव्यापती हो यानि कि परदोशकाल उसमें मिलता हो या ना मिलता हो अगले देनी ही दिपावली मनाना स्रेश्ट करें यह शास्त्र बोलता है और दूसर
13:15साथी साथ राजदानी परचाग, एकी सक्टुगर के लाथ सकता है, और पवंजी करेंगे, पवंजी ये तो और जादा भ्रहम की सती हो गई, मतलब हम चाहते तो यह थे कि लोगों को क्लियर हो जाए कि कौन सी तारीक को पूजा करें वो, लेकिन या तो जादा भ्रहम नज़
13:45कह रहे हम अम्म तिथी के हिसाब से उसकी दूसरी डेट अगर दे रहे हैं, तो हम उसे यह नहीं कह सकते कि हम अंग्रेजी तिथी से दे रहे हमारा पंचांग या हम लोग जो भी बात करते हैं, वो विशिद हिंदी तिथी के हिसाब से ही बात करते हैं, बारती तिथी के हिस
14:15लोग दूर कर लें जिसके बारे में आप जिक्र कर भी रहे थे कि आप इंग्लिश तिथी के हिसाब से नहीं अपने पुरोहिस से पूछे उसके हिसाब से अगर उस इसाब से गर देखा जाए जैसा कि बाकी के महमान भी कह रहे हैं कि पूजा के लिए 20 जो तारीख है वो जा�
14:45सुर्यास्त में बड़ा भारी अंतर है तो गोवा की दिपावली कम मनेगी यह तो गोवा का ही पूरोहिस बता पाएगा वहीं का जोट्सी बताएगा ठिक हम दिल्ली में बैट करके या कहीं पे यह तुटा ही नहीं कर पाएंगे ना कि पूरे देश की दिपावली कैसे मैं �
15:15लोकल पंचंग के विचार अवस्चे लिए जाने चाहिए मैं इस बात पर सहमत हूँ
15:21हमारे साथ हमारे बाकी के महमान में है पनित रमंत्र वेदी जी महाकाल का क्या आदेश है बताएगे जरा पूरे देश को आप क्या कहते है
15:29अचारर राजमिश्च राजी पांच लोग ये कह रहे हैं यहां पे जो हमारे खास मेमान है कि 20 तारीक को ही दिवाली मनाई जानी चाहिए और उसके पीछे उनके धेर सारे रीजिन्स आपको
15:55मैं आपको असपस्ट में दुबारा ये कह देता हूँ कि अगर पांच लोग इस बात को मान रहें कि दीपावल इस दुन मनाया जाना चाहिए
16:03जो मैं सास्त्रिक प्रमाड दे रहा हूँ ये कह दें कि इस सास्त्रिक प्रमाड को माना नहीं जा सकता है
16:09क्या कोई भी ब्यक्ति ये कह सकता है कि साड़े तीन प्रहर अगर मावस्या अगले दिन तक है तो क्या उस तिथी को रात्री में स्विकार नहीं किया जाएगा अगर ये महुर चिंता मड़ी गलत बता रहे तुम उसको स्विकार कर लेता हूँ कोई दिक्कत नहीं
16:22मैं तो एक बड़ी सिंपल सी बात यहां कह रहा था कि जहां जहां सूरियास्त साड़े पांच बज़े से पहले है ये हमारे धर्माचारे भी कह रहे थे श्री जितेननन जी श्री राजकुमाद जी भी कह रहे हैं और महाकाल से जो महादवान अधारे हैं वो भी यही बात कह र
16:52अख़बाद से देख ले या लोकल पुरोईट से हम जाकर बात कर ले जहां सूरियास साड़े पाँच बजे शाम से पहले हो गया है वहाई किसको मना ले जहां सूरियास शाम साड़े पाँच बजे के बाद है वहाँ तो बीस को ही मनेगी ऐसा ही मेरे रिचार्ट से निलने है
17:22इसी चीलिए इंडिया में, दुबई में, ट्रॉंटो, हम क्यानडा की बात करें, यूएस की बात करें, यूके की बात करें, यहाँ पर जो समय मिल रहा है दिवाली पूजन का वो 20 तारीक को ही मिलेगा, वही सिंगपोर हो, आस्ट्रेलिया हो, मलेशिया हो, थाइलेंड हो, न
17:52कि अगले दिन करना चाहिए, तो आप शास्तर की बात नहीं मानेंगे, तो किसकी बात भात मानेंगे?
18:22पुरे विश्व में बीस तारी कोई जीपावली का पर्व मना जाएगा क्योंकि महालक्ष्मी की पूजा के अलावा और भी के पूजाएं होती है उस पर देखते हुए पांच पांच दिन का जो पर्व है वो बीस तारी को समापतो हो रहा है इसलिए 21 का कही से कही तक कोई ले
18:52कई पूजा नहीं हो सकती है 20 तारी को ही राट को पूजा होगी 20 तारी को ही सब कुछ होगा और 20 तारी को यह पूरे विश्व में चनातर नर्म की जो जड़ा मजबूत है
19:04अगर हम 126 देशों के पंचांग देखने लग जाएंगे तो यकीन करिए कि हम कोई भी त्याहार डंक से मना ही नहीं सकते हैं
19:24मनाई ही नहीं पाएंगे बिलकुल तो त्याहार का मूल भारत है भारत में जिस दिन त्याहार मनाय जाएगा जिस दिन यहां अदेशित होगा पंचांग अदिस उसी दिन पूरे विश्व के हिंदू उस त्याहार को मनाएंगे तब ही ठीक रहेगा
19:39राजकुमार जी चोटा सरी एक्षन कंक्लूजिन देखिए हर तिथी का एक तिथी मान होता है एक तिथी 19 घंटे से 28 घंटे तक होती है इस बार अमावश्य तिथी 25 घंटे के आ रही है उसमें आधे से अधिक 20 तारीक को तिथी मान आ रहा है सूर्योदय से पहले तक इसलि
20:09इसलिए मनाया मैं दो चीजे बता दूँ राजकुमार जी ने कहा कि एकदसी से प्रारम होता है नहीं 13 से प्रारम होता है और यम दुतिया तक चलता है पंच 2 सब्सक्राइब होता है पहले सुन लिजे दूसरा रात्री को उत्सो नहीं प्रारम हुआ था स्री राम चरित्मा
20:39क्या जा सकता है पहले तीन घड़ी के अंतरगत इसलिए 21 तारीक को ही दीपावली मनाना चाहिए मेरे दृष्टी से साथ समाथ
20:47जैसे पवन सिना जी ने कहा कि हम बात भेद जो है वो डेट्स का नहीं है अमावस्या की रात्री को लक्ष्मी पूजन होता है और वो बीस तारीक की रात्री हमें मिलती है तो इसलिए हमें तो खुश होना चाहिए कि हमें अगर तिट्टियों डेट्स के हिसाब से देख रहे ह
21:1721 तारीक की ही दिपावली स्रेश्ट है क्योंकि दोनों दिन पर दोश काल मिल रहा है और ऐसे में धरम सिंदू और निर्ने सिंदू ये बोलते है तो हमारे साथ मेहमानों में से दो मेहमान के रहे हैं कि 21 तारीक को पांच मेहमानों की तरफ से कहा गया है कि 20 तारीक शुब सम
21:47झाल
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