00:00चांद की रोश्णी सजे हाथों में महंदी, सजी थालियों में दीपक और एक वरत करवाचौथ
00:08सर्फ एक फेस्टिबल नहीं बल्कि एक अटूट विश्वास की कहानी है जहां एक स्तरी अपने पती की लंबी उम्र के लिए उपवास रखती है
00:16लेकिन क्या आप जानते हैं इस वरत की शुरुवात कहां से हुई क्यों हर साल कार्थिक महिने के क्रिश्ण पक्च की चतुर्थी को ही इसे मनाया जाता है
00:24आए जानते हैं करवा चौथ का वो पौराने के तिहास जो आज भी आस्था का प्रतीक है लेकिन उसे पहले नमशकार मैं आसुतोष और आप बोल्ट स्काई देख रहे हैं
00:33पौरानेक मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ व्रत की कथा सती सावित्री और सत्यवान से जुड़ी है
00:39कहा जाता है कि जब यम्राज सत्यवान की आत्मा लेने आये तो सावित्री ने अडिक संकल्प और तपस्या से यम्राज को रोग दिया
00:47अब उसके अटूट प्रेम और व्रत के प्रभाव से यम्राज को सत्यवान को पुन जीवन देना पड़ा
00:54तब से ही स्तरियां अपने पती की दिरगायू और सुरक्षा के लिए इस दिन व्रत रखती है
00:59वहीं दूसरी कथा महाभारत काल से जुड़ी है
01:02जब द्रौपती ने अर्जुन की सुरक्षा के लिए करवा चौत का व्रत रखा था तब भगवान कृष्ण ने उन्हें ये व्रत करने का महत्व बताया था
01:10वहीं करवा का अर्थ है मिट्टी का पात्र और चौत यानि की चतुर्थी ती थी
01:15ये व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्च की चतुर्थी को रखा जाता है जब महिलाय सुर्योदे से
01:21चंद्रमा के दर्शन तक निर्जला उपवास रखती है और रात में चांद को अर्ग दे कर व्रत तोड़ती है
01:27तो दोस्तों यह फेस्टिबल सर्फ प्रेम का नहीं बलकि त्याग समर्पन और आस्था का प्रतीक है
01:33हर बार जब वो चांद आस्मान में चमकता है तो वो याद दिलाता है कि सच्चा प्रेम सर्फ महसूस नहीं होता उसे निभाया भी चाता है
01:42तो दोस्तों फिलाल इस वीडियो में इतना ही आपको यह जोइनकारी कैसी लगी हमें कमेंट में लिख कर ज़रूर बताएगा
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