00:00नमस्कार मैरिचा और स्वागत है आप सभी का हमारे खास कारेक्रब में
00:04आज हम बात करेंगे एक ऐसे पर्व की जो पती-पत्नी के अटूट प्रेम, श्रधा और अटूट विश्वास का प्रतीक है
00:12करवा चौत
00:13हर साल की तरह इस साल भी नव विवाहित या विवाहित सभी महिलाएं अपने सोभाग्य और पती की लंबी आयू की कामना के साथ करवा चौत का वरत रखेंगे
00:21इस वर्ष यह पावन पर्व 10 ओक्टूबर को पढ़ रहा है
00:25यह वरत केवल एक उपवास नहीं है बलकि एक गहरी आस्था और परंपरा का संगम है
00:31जोसे महिलाएं पूरे समर्पन और विश्वास के साथ निभाती है
00:35यह वरत महिलाओं के लिए अत्यंत महतोपूर्ण है
00:37वे अपने पती की लंबी आयू और सुख समर्धी के लिए पूरे दिन निर्जला उपवास रखती है
00:43यह उनके प्रेम और त्याग की परकाष्टा को दर्शाता है
00:47आईए एक नजर डालते हैं इस वरत के महतो और इसकी पूजन विधी पर
00:51सबसे पहले चंद्रोदय का समय इस वरत में बहुत महतोपून होता है
00:55शास्त्रों के अनुसार इस दिन चंद्रोदय रातरी को 7.58 मिनट पर होगा
01:00चंद्रमा के दर्शन और अर्ग के बिना यह वरत अधूरा माना जाता है
01:04महिलाय वे सबरिस से इस पल का इंतजार करती हैं जब वे चंद्रमा को अर्ग दे कर अपने वरत का पारण कर सके
01:10पूजा की तयारी महिलाय बड़े चाव से करती हैं वे अपनी पूजा की थाली को विशेश रूप से सजाती हैं
01:16जिसमें दीपक, सिंदूर, रोली, चावल, मिठाई और पानी से भरा कलश होता है
01:22चद्रमा की पूजा करने के बाद वे एक चलनी से पहले चंद्रमा को देखती हैं और फिर उसी चलनी से अपने पती का चहरा देखती हैं
01:30इसके बाद पती के हाथों से पानी पिकर या मिठाई खाकर अपना वरत खोलती हैं
01:34यद्रिश्य पती-पत्नी के रिष्टे की पवित्रता और गहराई को दर्शाता है
01:38लेकिन इस वरत के दौरान कुछ बातों का विशेश धियान रखना भी आवश्यक है
01:43सरातन परंपरा के अनुसार चांद देखने से पहले महिलाओं को कुछ चीजों से बचना होता है
01:48कहा जाता है कि इस दिर यदि कोई महिला अपनी सास, मा या किसी भी बुजुर्ग का अनादर करती है
01:53तो इससे चंद्रमा अप्रसन हो जाते हैं और अशुब फल दे सकते हैं
01:57ऐसे स्थिती में वरत का पूरा फल प्राप्त नहीं हो पाता है
02:00करवा चौत कवरत केवल पती की लंबी उम्र के लिए नहीं होती है
02:04बलकि बड़े बुजुर्गों के आशुरवाद का भी प्रतीक है
02:07उनका सम्मान और आशुरवाद इस वरत को पूर्णता प्रदान करता है
02:11इसलिए वरत रखने वाली सभी महिलाओं को अपने घर के बड़ों का सम्मान करना चाहिए
02:16और उनका अशुरवाद प्राप्त करना चाहिए
02:18ये वरत पती-पत्नी का रिष्टों को और भी मजबूत बनाता है
02:22उन्हें एक दूसरे के प्रती प्रेम और सम्मान की भावना को पुना जागरित करता है
02:26करवा चाहिए प्रेम और आस्था के पर्व को पूरी श्रधा विश्वास के साथ मनाते है
02:39और अपने रिष्टों में मिठास भरते है
02:41आप सभी को करवा चाहिए की हार्दिक्षब का मनाए
02:56झालोगोगोगोगोगोगोगोगोगे प्रेम है
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