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  • 11 months ago
पिछले 20 वर्षों में उत्तर प्रदेश के 30 से अधिक क्रिकेटर भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेल चुके हैं. आइए उनके बारे में जानते हैं.

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00:00पिछले 20 साल में उत्तर प्रदीश अंतर रास्टिक क्रिकेट के फलक पर चमक रहा है।
00:07उत्तर प्रदीश के कम से कम 30 क्रिकेटर भारत की मुख्य टीम, महिला टीम या अंडर 19 टीम में जगा बना चुके हैं और विश्व विजेता होने तक का घौर अपराप्त कर चुके हैं।
00:37अलावा ग्याने इन पांडे जैसे क्रिकेटरोस के नाम से गुलजार रहा और अब रिंकू सिंग उसको और आगे ले जा रहे हैं।
01:07और बढ़ें और यहां पर कुछ और बहतर विवस्थाएं की जाएं तो और भी क्रिकेटरों को अंतरराश्टी फलक पर चमकने का मौका मिल सकता है।
01:17कि कहीं पर भी क्रिकेटर खेल रहा है, कोई भी खेलाडी खेल रहा है, तो कहीं ना कहीं प्रदेश का और सहर का जरूर कहीं ना कहीं स्योग होता है।
01:24लेकिन उत्तर परदेश में जितना टेलेंट है, उसके बारे में हमें आपको बता दे कि इससे ज्यादा लोगों को खेलना चाहिए, जितने लोग खेल रहे हैं।
01:33तीस की जिगे हमारे पास सौ से ज्यादा लोग होने चाहिए, क्योंकि अभी तो जो भी CCI ने चेंज किया है, रंजी ट्रॉफिक का फॉर्मेट उससे हमारे खेलाडी खेलने लगे है, पहले बहुत वहसा था कि साल में दो मैच खेले, तीन मैच खेले रंजी ट्रॉफिक है
02:03जो है, हमारे पास जो है, रंजी ट्रॉफिक का फॉर्मेट ऐसा नहीं था, रंजी ट्रॉफिक में पहले जोनलिस्तर पर मैच होते तो उसका नकाउट होता तो मैच खतम हो जाते थे, और हमारी टीम के बहुत त्यारिया नहीं रहती थी, बंबई है, दिल्ली है, इनके पास
02:33अभी बहुत सारी चीजे जो BCCI कर रहा है, उससे बहुत फैदा होरा खिलालियों को, अब खेल का यह है, कि कोई बंबई से खेल रहा है, या दिल्ली से खेल रहा है, या उत्तर पृदे से खेल रहा है, इसका कोई फर्क नहीं है जादा, अभी सब क्रिकेट एक ही तरह की हो
03:03अलाबाद के कईयों प्लेयर हैं, डाम नहीं भी यादा आपारे मेरे को, लेकिन कम से कम कुछ नहीं, तो जैसे हमारे युत्तर प्रदेश में बंबी साब थे, यूसुफ अली खान थे, जैसे असिस्टर जैदी था, और अबैत कमाल है, अबैत कमाल बहुत बढ़े आफास �
03:33सबसे बड़ी बात यह है कि आज से 20 साल पहले का क्रिक्ट और इधर पिछले 7-10 साल के क्रिक्ट में बहुत अंतर आया, हमारे जमाने में रंजी ट्रोफी एक मात्र साधन था, जिसमें जोन का ही टीमें खेलती थी, और एक टीम को तीन मैच मिलते थे, तो उत्तर प्रदेश
04:03में आ जाते थे, तो उनको मौका मिलता था, और उस समय इंडियन टीम के पास भी वन डे मैच इतना नहीं होता था, टेस्ट मैच होता था, तो खिलाडियों की लिमिटेट संख्याती जो की आगे आ सके, वर्तमान परिशेप में टी ट्वेंटी है, वन डे है, और इतना ज्य
04:33कुछ कुछ न कुछ होता रहता है, अभी हमारी वेस्ट इंडी से मैच खता हूँ, आप उस ठीले जा रहे हैं, तो लगातार क्रिकट है, तो में कारण यह है कि उत्तर प्रदेश में प्रदिवाओंगी कोई कमी नहीं, जैसा आपने स्वेम कहा कि इतने खिलाली आ रहे हैं,
05:03अरे समय में शशिकान खंडेकर, मतला एक्स्ट्रा क्लास उनमें था, उनको खेलना चाहिए था, उसके बाद रहेंदर सिंह हंस, एक ऐसा नाम था जिसने पुरे भारत वर्ष में धूम मचाई, नहीं खेल पाए, रिजवान शम्शाग, गाउमिस्टर क्रिकट में बहुत र
05:33सीनियर आर्पी सेंग, वो इंडिया के लिए दो मैच खेले, बाद में नहीं खेल पाए, उनको हमेशा यह मलाल रहा, कि आसीज विस्टन जैदी को इंडिया खेलना चाहिए था, और वो इंडिया नहीं खेल सके, नहीं खेल सके, निकिल अब परिदेश बदल गया,
06:03खेलानियों को बहुत मौके मिल रहे हैं, आपको परफोमेंस आपको निश्चित रूप से बारती टीम के देखा जाए, तो अगर देखा जाए तो उत्तर प्रदेश एक देश से भी बड़ा है, कई मतलब जो बाकी देश खेलते हैं, उनसे बड़ा है, तो यहां की तो यह �
06:33विजय वर्मा के साथ में रिशी मिच्टा, ETV भारत लखनो
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