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  • 11 months ago
जगदलपुर के मां दंतेश्वीर मंदिर में विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा मनाया गया. बुधवार की रात को मावली परघाव की रस्म अदा की गई. इस रस्म को दो देवियो के मिलन के रूप  में जाना जाता है. जगदलपुर के दन्तेश्वरी मंदिर प्रांगण और कुटरूबाड़ा के पास पारंपरिक रीति-रिवाजों को निभाया गया. 600 साल से चली आ रही .बस्तर दशहरे की परंपराओं में बस्तर का राजपरिवार भी शामिल होता है. मां दंतेश्वीर को बस्तर दशहरे में शामिल होने के निमंत्रण, माता की डोली के स्वागत और फिरो डोली को लाना, सभी परंपराओं में राज परिवार के सदस्य शामिल होते हैं. बस्तर दशहरे को देखने के देश के कोने-कोने तक से लोग पहुंचते हैं और ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनते हैं.

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00:00ये तस्वीरें विश्वर प्रसिद्ध बस्तर दशेहरे की हैं
00:0736 गड़ के जगदलपूर में माध अंतेश्वरी मंदिर में बुद्वार की रात मावली परगाव की रस्म अदा की गई
00:13ये रस्म दो देवियों के मिलन के रूप में जानी जाती है
00:16इस दुरान आंगा देव जो आदिवासियों के इश्ट और आरादिय हैं सुरक्षा वेरिकेट्स को पार कर मंदिर तक पहुँचे
00:25ये परंपरा 600 साल से चली आ रही है जिसका गवा बस्तर राजपरिवार भी बनता आ रहा है
00:34मा दंतेश्वरी को बस्तर दशेरे का निमंतरन देने से लेकर माता की डूली का स्वागत और फिर डूली को मंदिर तक वापस ले जाने तक सभी कारिक्रमों में राजपरिवार के सदश्या शामिल होते हैं
00:45बस्तर दशेरे में शामिल होने के लिए जगदलपूर की सड़कों पर जन सलाब उमर पड़ा
01:06घर की छतों और बालकनी, मंदिर परिसर सब तरफ लोग ही लोग नजर आ रहे थे और ये सभी इस एतिहासिक पलका का भावने
01:16बीरो रिपोर्ट, ETV भारत
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