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The Crimpson Clock-लाल घड़ी का रहस्य-A Deadly Mystery Unfolds...

कोलकाता की बारिश, रहस्य और मौत की घंटी…
“लाल घड़ी का रहस्य” एक रोमांचक थ्रिलर है, जहाँ न्यायमूर्ति अनिरुद्ध मुखर्जी की मौत और खून से सनी घड़ियाँ एक खतरनाक खेल की शुरुआत करती हैं। अर्जुन सेन और देवदत्त रॉय के नजरिए से देखें, कैसे यह रहस्य उजागर होता है और क्या अगला शिकार बच पाएगा?

Rain-soaked Kolkata, mystery, and the toll of death…
“The Crimson Clock” is an intense thriller where the murder of Justice Aniruddha Mukherjee and blood-stained clocks begin a deadly game. Watch from Arjun Sen and Devdatt Roy’s perspective as the mystery unfolds — and who will survive the next strike?

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लाल घड़ी का रहस्य
The Crimson Clock
Kolkata thriller
Serial killer story
Murder mystery
Indian suspense story
Blood-stained clock
Arjun Sen Devdatt Roy
Amal Das
Crime thriller India

Category

😹
Fun
Transcript
00:00कोलकाता की बारिश हमेशा रहस्यों से भरी लगती है
00:07कूंदे खिर्कियों पर पड़ती हैं जैसे कोई छिपा हुआ सच बाहर आने की कोशिश कर रहा हूँ
00:14उस रात हमारी छोटी सी किराय की कोठी के अंदर मैं और देबदत रोई चाई पी रहे थे
00:21जब दर्वाजे पर एक जोरदार दस्तक होई
00:24मैंने घड़ी देखी
00:26रात के बारा बचकर पांच मिनिट हुए थे
00:30इतनी रात को कौन आ सकता है मैंने बुदबुदाते हुए दर्वाजा कोई दर्वाजे पर एक भीगी हुई महिला खड़ी थी
00:39उसकी साड़ी बारिश से चिपक गए थी और आँखों में खौफ तैर रहा था
00:45ग्रिपया
00:46मेरी मदद कीजिए उसने कापती हुई आवाज में कहा
00:50मेरे पिता
00:52मर चुके हैं
00:55और मौत से पहले उन्हें एक खून से सनी घड़ी मिली थी
00:58देवदत ने अकबार नीचे रखा और अपनी पीखी नजरे उस महिला पर डिका दी
01:04उन्होंने कहा बिना पलक जपकाए
01:06महिला ने अपना नाम बताया क्लारा मुखर जी
01:10उसने कहा कि उसके पिता न्याय मूर्ती अनिरुध मुखर जी
01:15को तीन बचकर पंद्रह मिनिट पर अटकी हुई एक जेव घड़ी मिली
01:18घड़ी के डायल पर सूखे कून के निशान थे
01:22और एक घंटे बाद वे बिना किसी चोट या वीमारी के मृत पाए गए
01:27देवदत ने बिना हिले डूले पूछा क्या आपके पिता को कोई धंकी मिली थी
01:33लारा की आवाज लड़ खड़ा गई
01:35पिता जी ने विकरम बर्मन को पांसी की सजा सुनाई थी
01:39विकरम बर्मन
01:41कोलकाता का क्रिमसन किलर
01:43एक सीरियल मडरर जो हर शिकार के पास एक पून से सनी घड़ी छोड़ता था
01:49लेकिन उसे पांच साल पहले पांसी हो चुकी थी
01:52क्या वो सच में मरा था?
01:56तब ही खिड़की के बाहर एक परचाई दिखाई दी
02:00देवदत ने जच से खिड़की खोली लेकिन बाहर कोई नहीं था
02:04बस एक घड़ी की धीमी टिक-टिक आवाज अंधेरे में गूंज रही थी
02:09अगली सुबह मुकरजी हाउस
02:12हम सुबह मुकरजी हाउस पहुँचे
02:15घर के अंदर एक अजीव सी ठंड़क थी
02:18हर दीवार पर एक पुरानी घड़ी तंगी थी
02:21लेकिन सभी घड़िया रुकी हुई थी
02:24देवदत ने जच साहब की जेब घड़ी को गोर से देखा
02:28खून सूप चुका है उन्होंने कहा
02:31लेकिन असली रहस से इसके अंदर चिपा है
02:34उन्होंने धीरे से घड़ी खूली
02:37अंदर धुंदले अक्षरों में वीवी उकेरा गया था
02:41विक्रम बर्मन
02:43पर ये कैसे मुम्किन है मैंने कहा
02:46वो तो मर चुका है
02:48देवदत ने हलकी मुस्कान दी
02:51वो सकता है
02:53मौत ने उसे अभी तक छोड़ा ही नहो
02:56रात को ग्यारा बजे
02:58हमें दूसरी हत्या की खबर मिली
03:01क्लारा के भाई
03:03रोहन मुकर जी की लाश उनके कमरे में मिली
03:06उनके पास एक और खूनी घड़ी थी
03:09चार बचकर दस मिनित पर रुकी हुई
03:12देवदत ने घड़ी की सुईयां ध्यान से देखी
03:15उन्होंने एक सुईय से घड़ी की नोप को कुर्चा
03:19और एक माइक्रोनिडल बाहर निकली
03:21ये एक जहरीली सुईय है उन्होंने कहा
03:24जो घड़ी को छूते ही जहर छोड़ देती है
03:28मौत पांच मिनित के अंदर हो जाती है
03:31देवदत ने कहा
03:33अगला मर्डर पांच बजे होगा
03:35और अगला निशाना शाय
03:37क्लारा
03:39हमने पूरी हवेली की घेराबंदी कर दी
03:42बारिश तेज हो रही थी
03:45घड़ी की सुईयां धीरे धीरे पांच के करीब बढ़ रही थी
03:49चार बचकर पचपन मिनित
03:52चार बचकर अठावन मिनित
03:54चार बचकर उनसट मिनित
03:56तभी सीडियों पर एक परचाई दिखी
04:00देवदत ने चलांग लगा कर उस शक्स को पकड़ लिया
04:04वो अमल दास था
04:06जेल का वही गार्ड जिसने विक्रम बर्मन की पांसी देखी थी
04:10तुम हार गए देवदत ने कहा
04:13अमल हंसा
04:15तुम देव से पहुँचे
04:17वो अब मरेगी
04:19देवदत ने मुस्कुरा कर जेव से एक स्कूर ब्राइवर निकाला
04:23मैंने घड़ी की सुईया पहले ही निकाल दी थी
04:26अमल दास को गिरवतार कर लिया गया
04:30लारा बच गई
04:32लेकिन जब देवदत ने वो कून भरी घड़ी उठाई
04:35तो अचानक घड़ी की बंद सुई
04:38खुद बखुद एक सेकंड आगे बढ़ी
04:41देवदत ने हलकी आवाज में कहा
04:44हो सकता है
04:46कुछ रहस से कभी खत्म नहीं होते
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