00:00बगदाद एक रहस्य में शहर था, जहांके बाजार महकते इत्र, रंग विरंगी पोशाकों और आलिशान महलों से सजे रहते थे।
00:11उस शहर का हर रास्ता किसी न किसी किस्से की निशानी रखता था।
00:16कहीं ससानिद शासकों की कहानिया सुनाई जाती थी, कहीं अब बासिद खलीफाओं की दंतक अथा है।
00:23इसी शहर में एक जवान नाजुक तबीयत का मालिक अली बिन बक्कार रहता था।
00:30अली सिर्फ पोश जिंदगी का मालिक न था, बल्कि अदब और शायरी का भी शौकी था।
00:37उसका चेहरा नूरानी, लहजा बेहत शास्ता और लिवास हमेशा कहीं मती रहता।
00:44लोग उसे देख कर ही अंदाजा लगा लेते कि किसी नामवर खांदान से तालुक रखता हो।
00:51शुरुवात के दिनों में अली जिंदगी को सिर्फ एक नर्म हवा के जोंके की तरह समझता था।
00:58आने दो, जाने दो, ना किसी पर दिल आया था, ना किसी के लिए नीन दोडी थी।
01:04लेकिन तकदीर के दस्तक की आवाज जब दिल तक पहुँचती है, तो फिर कोई रास्ता खुला नहीं रहता।
01:12एक दिन वो अपने चंद दोस्तों के साथदार उल शराफ के करीब बाजार से गुजर रहा था, जहां शहजादा हारून अल रशीद के महल से करीब एक रास्ता सता था।
01:26वहां अकसर कहसित, वजीर और मगन सोच उलचे हुए शारी मिजज के शहरी पाय जाते थे। उस दिन बाजार में शोर कम था, लेकिन रंग और खुश्बू अब भी धमकता हुआ मनजर पेश कर रहे थे।
01:42अली ने दूर से एक पालकी देखी जिसके गिर्द सिपाही थे। अंदाजा हुआ कि किसी रियास्ती खातून को ले जाया जा रहा था।
02:12नहर था जो खलीफा के एक करीबी दोस्त की बेटी और रियासत की मोहतरम औरत थी। उसके हुस्न की मशूरी महलों तक थी। लेकिन किसी ने उसे खुले आम कभी न देखा था।
02:25उसका चेहरा देखकर अली ने दिल में महसूस किया कि अब उसका आराम गया। पाल की गुजर गई। लेकिन उसकी महत्ती हवा और उस चेहरे का चांद एक पल के लिए नहीं। बलकि उम्र भर के लिए यादों में बस गया।
02:40अली अपने घर लोट आया लेकिन उसे महसूस हुआ कि वह पहले जैसा इंसान नहीं रहा। दोस्तों ने पूछा क्या बात है अली आज तुम्हारी आँखों में कुछ और ही कहानी लिखी है।
02:53मगर अली चुप रहा। रात के पिछले पहरों में उसने चांद को देखा और याद आया कि उसका चेहरा भी कुछ ऐसा ही रोशन था। दिल बेचैन होने लगा।
03:05अगले रोश अली ने अपने मोत बर दोस्त फर्तह बिन खाकान को सब कुछ बताया। फात एक होश्यार और जख्म भर शबीह दोस्त था। उसने अली की बात सुनकर कहा। चुप रहना बेकार है। अगर दिल लग चुका है तो इसे चुप कर दबाना जहर के समान है।
03:26मगर याद रख यह रियास्ती लोगों की दुनिया है। उन तक पहुचना असान नही है। अली ने आसुओं के साए में कहा कि वो कुछ भी करेगा लेकिन उस चेहरे के नूर को दोबारा देखना चाहता है। फतह ने दिमाग लगा कर एक तरीका सोचा। शम्स अल नहार।
03:56मेंमान सूफी मिसल के संगीतकार बुजर्ग और रियासती खानदानों के अफराद बुलाये जाते थे। फतह ने अपने रिष्टों और पहचान के जरिये अली को भी वहां बुलवाने का बंदोबस्त किया। महफिल के दिन महल ऐसे सजा था जैसे बाग, ए, इरम, धर्ती
04:26अली ने नीले रंग का खूसा पहना, चांदी का चोगा और हलकी इत्र लगा कर वहां कदम रखा। दिल की धड़कने तेज थी। मगर चहरा शान एक होशियार बटलर ने महमानों की रोशनी में उसे कीमती दरी पर ले जाया। फिर सहन के एक हिस्सा में जब महफिल जरा ख
04:56और हिशा सचा गया। उसने महसूस किया कि वह फिर उस पालकी वाले लंहे में वापस आगया।
05:02शम्ज अल। नहर ने अली को भी एक निगाह से देखा।
05:07शायद उसने उसे पहचान लिया या कम से कम यह महसूस किया कि यह शक्स उन नकाब खादून को देखता रह गया था।
05:16महफिल में कव्वाली, दफ, प्रबाब के सुर घूमते रहे।
05:21अली को मौका मिला कि फर्तह के जरिये एक खुफिया मुलाकात का रास्ता निकाला जाए।
05:27रात के आखिरी हिस्से में जब चांद मध्यम हो रहा था और महमान हलके हलके खुल रहे थी।
05:34फत्ने एक पुर्प, असकार गलियारा ढूला, जहां से शम्स के हुजरे तक बात पहुच सकती थी।
05:41शम्स अल, नहर की औरतों में से एक हाजर पढ़ी, लिखी और गहरी सोच वाली थी, जिसे अली का मतलब समझ आ गया।
05:51उसने चुपके से शम्स को बताया कि एक जवान जिसे उसने पालकी के उन लम्हों में देखा था, यहां मौजूद है और उससे शिद्दत से बात करना चाहता है।
06:02शम्स ने पहले इनकार करने की सोची, क्योंकि उसकी इज़द और घराना इज़द से बंधा हुआ था, लेकिन दिल का किया, वह किसी बात का तजुर्बा नहीं देता।
06:14रात को जब महफिल खत्म होकर महमान चले गए, शम्स ने अपनी खादिमा से कहा कि वह फत को एक संकेत भेजे।
06:44खामोश महबबत का इज़़ार किया, वे दोनों सिर्फ चंद लम्हें बात कर पाए, मगर उन्हीं लम्हों ने उनके दिलों में इतना भर दिया कि जिन्दगी भर के लिए काफी समझो, उसके बाद मुलाखात के रास्ते मुश्किल हो गए, शम्स अल्प, नहर की छोटी ब
07:14अली के दोस्त उसके चेहरे पर रंग और नूर की कमी महसूस करने लगी, वो बहुत कम सोता, कम खाता था, अकसर रातों में छट पर बैठ कर तारे गिनने लगता, कोई उसे शाम की महिल में देखता, तो समझ लेता कि ये इश्क की आग में जल रहा है, ततने फिर हिम्मत की
07:44शमसल नहर के कून भी शामिल थे, उस मोगा पर फिर एक नहर मिली, शमसल नहर ने अली के चेहरे पर मुस्कुराहट देख कर दिल में सोचा कि काश इंदगी उन दोनों को एक दूसरे के ग्रीब कर दे, मगर उनके दर्मियान प्रियास्ती, आदाब और सिलसिले की उखलाद
08:14शमसल ने उसको बेचैन रखा, एक रात फरतह ने मश्वरा दिया, तुम अपनी कसिसा किसी बुजर्ग हकीम से बयान करो, जो तुम्हे कोई हिकमत बता, अली ने खार खाया, दिल के दर्द का इलाज तो बस दीदार है या जान की हुर्बानी, लेकिन तह की बात भी लद न
08:44नया तूफान खबर बन कर फैला, शमसल नहर का निकाह किसी करीबी उमर दारी से तै हो गया है, अली तक जब यह खबर पहुँची तो उसका दिल तूट कर राकसा हो गया, उसने महसूस किया कि जिस रोशनी ने उसे जीने का सबब दिया था, वह अब दूर किसी अंधेरी �
09:14मुकदर ने फैसला मुकमल नहीं किया, कुछ हो सकता है, लेकिन अली को यकीन हो चला था कि इंतजार की हद तूट चुकी है, शमसल नहार को जब पता चला कि अली ने यह खबर सुनी है, तो उसके दिल पे भी फूलों की जगह कांटे उगाए, उसने सोचा कि अगर वो अप
09:44नामु मकिन हो जाता है, उस रात उसने अपनी खादिमा हज़र के जरीये अली तक एक खत भेजा, खत के अलफाज साफ, लेकिन गहरे थे, अगर तकदीर ने हमारे रास्ते में बंद दर्वाजे रखे हैं, तो हम कम से कम रूख की जबान में बात कर सकते हैं, मैं तुम्हार
10:14पिर हाजर के जरीये एक मुलाखात का इंतजाम हुआ, इस दफ़ा महल के बाहर एक पुरानी खंडहर मंजिल के करी, रात का अंधेरा उनके राज का हामी था, जब शमसल नहार वहां पहुँची, तो चांद की रोशनी ने उन दोनों को ऐसे घेरे लिया, जैसे कोई दूआ
10:44उन्हों में सुरागह चल जाते, उस पूरी मुलाहात के दौरान उन्होंने अपने दिल के अल्हा बयान किये, अली ने कहा कि उसने कभी किसी और के लिए ऐसी प्यास नहीं महसूस की, और शमस ने बताया कि उसकी इंदगी के वर्वे अब अली का चेहरा नश हो चुका है, �
11:14वक्त बारिश की बूंदों की तरह उनके दर्मियान गिरता रहा, कभी ठंडक लाकर, कभी तूफान बन की, जब नवाब के घरवालों ने शक किया तो शमस को सक्ती से महफिलों से रोका लिया, अली को भी एक दो दफा सरकारी लोगों ने रोका, सवाल किये लेकिन फतह ही �
11:44तो शायद दर्द कम हो, लेकिन फिर उसने याद किया कि दर्द को पीछे छोड़ना आसान नहीं होता, इशकर के पंची के पंख जब कट जाएं तो वो कहीं और उड़ना भूल जाता है, वकत ने उनके जज़बात को और गहरा कर दिया, शमस, अल, नहर अपने महल की रोश
12:14रहने की कोशिश करता, आखिर एक दिन शमस के घरवालों ने उसकी शादी के इंतिजाम का शोर मचाया, महंदी के दिन करीब आया, शमस, अल, नहार रात भर रोती रही, हजर ने चुपके से उससे कहा कि वह भाग चलती, लेकिन शमस ने कहा कि वह अपनी इज़त और परि�
12:44तय हो गया, तो उसने खुद को महसूस किया कि जिन्दगी उससे हर रोशन उजाला चीन रही, एक वकत ऐसा आया, कि एक मुश्तरिक दोस्त ने उन दोनों को मतलब के जोर से एक आखरी मुलाखात का मुखा दिया, शहर की नदी के करीब एक बाग में, शाम के वक्त, जब स�
13:14दोनोंने इतने अलफाज बदले जितने गिंती में न थे, उस मुलाखात ने उनके दिलों को हिला दिया, वे समझ गए कि उनकी कहानी अब किसी समझ या सामाजिक रिवायात के हिसाब से पूरी नहीं होगी, लेकिन मुहबबत खुद एक रिवायात होती है, और कभी-कभी स
13:44अमनी ने उसे कमजोर कर दिया, तबियत इतनी खराब की हकीम भी परेशान, फतह रोज रात उसे देखने आता, लेकिन अली की आँखों में एक ही तस्वीर रहती, शमस अल, नहर की, उसने सोचा कि अगर वो मर भी गया तो दिल में उसकी याद की शम्मा रोशन रहेगी, इ
14:14शादी के दिन, रात के करीब कुछ ऐसा हुआ के शहर में एक सियासी मसला उभराया, रियासती लोग इस मसले में इतने उलहे, कि शम्मस अल, नहर की शादी मौकर में, वकत ने उनको एक मौका दिया, थोड़ा ही सही मगर कीमती, फतह ने इस देर का फायदा उठाया, और श
14:44अली को मिलना मनजूर किया, गुफ़ा जैसी पुरानी हवेली के तरीके हिस्सों में, उन दोनों ने दोबारा एक दूसरे की तसली की, अली का हाल देखकर शम्मस ने आंसों से उसकी माथा चूमा, अली ने हलकी सी मसकराहट के साथ कहा, कि अब बिना तुम्हारे सांस लंब
15:14कुछ दिन यही हालत रही, कभी मुलाखात, कभी छुपाना, हर दिन किसी धड़कन के साथ तकदीर की राहों में फिर उलजन हो, जब तक शहर के सियासी हालात ठीक न हो गए, शादी का वक्त फिर से मुकरर न हो
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