00:00बस्तर की अरावण का पुतला देहन नहीं किया जाता,
00:27। बलकि बस्तर की अरादेदेवी की शत्र को विशालकाय रत में रथारूड कर नगर में भ्रमन करवाया जाता है।
00:34। बस्तर दशरब पूरे 75 दिनों तक बस्तर में मनाया जाता है।
00:44। इन 75 दिनों में 14 से अधिक अनोखी और रूचक रस्में निभाई जाती है।
00:50इनी रस्मों में से एक सबसे आकरशित रस्म फूल रत परिक्रमा है, जो नबरात्री के तीसरे दिन से छटे दिन तक लगातार चलता है।
01:01फूल रत साल लकडी के बने सजाफ्टी रत होते हैं, जिनने जार उमरगाओं और बेड़ा उमरगाओं के स्थानिये कालिगर बढ़ी निपूनता से त्यार करते हैं।
01:12दो मंजिला रत निर्मान पूनता के बाद रत को रंग विरंग के फूलों से सजाया जाता है, और उस पर धनतेश्वरी देवी के शत्र को विराजमान किया जाता है।
01:23यात्रा के दोरान भक्त जन माडिय जनजाती के लोग रत को खीषते हुए नगर भर्मन कराते हैं।
01:42यह जो रत करवाई जाती है, तो चार चक्के का रत होता है, और जगदलपुर्शित माड़ादन तेश्वरी का जो मंदीर है, वहां से माता जी का छत्र निकाल करके जो यहां के प्रधान कुजारी है, वो उस छत्र को ले करके उस रत पर सवार होते हैं, और गोल बजार का �
02:12और इस रत को फूलों से सजाया जाता था, तो इस वज़े से इस रत का नाम फूल रत पड़ा, और यह परिक्रमा लगातार पांच दिनों तक चलती है, जगदलपुर शहर के आस्थास के लगबग दो दर्जन से भी अधिक डावों के जो ग्रामीन हैं, वो बड़ी शद्�
02:42बस्तर से ETV भारत के लिए सुनेल कश्यप के रिपोर्ट