00:00बुम्मला कोलू मतलब गुडियों की सजावट लेकिन ये कोई आम गुडिया नहीं ये वो गुडिया है जिसे भगवान का रूप दिया गया है फिर उनकी पूजा की जा रही है ऐसे ही जैसा की अभी आप देख रही हैं
00:24गुडिया के रूप में भगवान शियो भगवान विष्णू भगवान राम और श्री कृष्ण अष्टा लक्ष्मी और मादुरु का ये द्रश्य है गुडिया पूजा का जिसे तलगू में बुमला कोलू कहते हैं
00:37जारकन के जमशेदपुर में ये महिलाएं मंत्रो चारण के साथ गुडिया पूजा कर रही हैं
00:44शर्धालों का कहना है कि ये पूरी दुनिया माता के लिए एक गुडिया के समान है
00:58हम सब उनके लिए गुडिया ही हैं इसलिए मा भी हमें गुडिया के रूप में दर्शन देती हैं
01:05मा को बहुत पसंद है, खुशी है, उनका बचपना याद आता है ये सब देखे और बहुत आसिरवाद देती हैं सबको
01:14तो गुडिया ही क्यों?
01:17गुडिया सही उनको, उनका बच्चा सब गुडिया ही है ना, दुनिया उसके लिए गुडिया ही है
01:24भगवान के लिए हम लोकों सब गुडिया है
01:27ओई रूप में वो देखती है सबको आसिर्वार देखती है
01:33आसिर्वार अच्छा से देखती है
01:36नौरातर में जहां देश भर में अलग-अलग रूप में दुर्गापूजा मनाया जाता है
01:42वही तेलगो समाज के लोग गुडिया पूजा करते हैं
01:46इस पूजा में गुडिया को भगवान का रूप दिया जाता है
01:50और उन्हें एक सीड़ी नुमा मंच पर कर्मकार सजाय जाता है
01:54आखिर में माता दुर्गाप विराजमान होती है
01:58प्राचिन काल से तलगो समाज के लोग इस परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं
02:28इनका मानना है कि माता दुर्गा उनकी हर मनुकामना पूरी करती है
02:33हमारे घर में ये बरसों से चला रहा है
02:37मेरी दादी मा लगाती थी
02:39दादी मा लगाती थी ये और वैसे ही ट्रेडिशन चला रहा है
02:44So when I want to marry, that's why I want to marry them and I have seen that they will be full on that.
02:53So when I want to marry them, I will not marry them because I want to marry them,
03:00I will not marry them.
03:05जारकन के जमशेतपुर में रहने वाले तेलगु समाच के लोग हर साल धूमधाम से गुडिया पूजा मनाते हैं, जिसमें तेलगु समाच के लोगों के साथ ही अन्य लोग भी शामिल होते हैं.
03:17ये पूजा माता दुर्गा के प्रती इनकी आस्था का प्रतीक तो है ही, साथ ही अपनी प्राचीन संस्कृती को संजोई रखने का एक प्रयास भी है.
03:47उसके पहले से ये सब रेडी करना, ये सब सजाना, मा की पूजा के लिए ये एक अलग फिलिंग होती है. और ये हमारे समाच में बहुत ही महत्वचीन होती है. मेरी नानी मा करते आई है, मेरी मा करते आ रही है उस चीज़ को और आगजा के मैं भी कोशिश करूँगी कि मैं
04:17कि वो भले ही परदेश में हैं, लेकिन वो अपनी माटी, अपनी संस्कृती को भूली नहीं है.
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