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  • 11 months ago
प्रदीप ने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ अलवर की पथरीली जमीन को हरा-भरा बनाया. पांच हजार पौधे, हर्बल नर्सरी और गोशाला बनाकर पेश की मिसाल.

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Transcript
00:00अलवर का धिरोरा गाउं अब परियावरन सनरक्षन की मिसाल बन चुका है
00:13मेरट की भैसा गाउ निवासी प्रदीप ने दिल्ली की इंजीनियरिंग नौकडी छोड़ इस पत्रीली जमीन को हरा भरा बनाने का बिड़ा उठाया
00:222010 में उन्होंने पंचवटी के पांच पौधे लगा कर अपनी यात्रा शुरू की और आज करीब पांच हजार से अधिक पौधे यहां लहला हा रहे हैं
00:33इन पेडों ने न सिर्फ इलाके को हरित बना दिया बलकि तापमान कम करने और जल्सतर बढ़ाने में भी अहम भूमी का निभाई
00:41राइस्तान पाई यह मीज थी कि राइस्तान सोगाया है और पेडों को देखा में भी सुना था अभी देखा नहीं तो उसी रहा में पहले मैं दिली में जोग करता था लेकिन पेडों का सोग दच्पन से ही था
00:59किसी में कहां कि तुम्हें पेडों का इतनों है तो किसी एंज़ोए आएसी उस से जुदो
01:10I had the job to do it.
01:13I thought I had to do it, and I had to go and turn my hand.
01:18It's a road to the road.
01:20It was a very long time to go there.
01:25I thought I would have been going there.
01:29I thought I was going to go there.
01:32Then I thought I was going to go there.
01:34.
01:36foreign
01:50foreign
02:04आवला, रीठा, तुलसी, अश्वगंधा और गिलोए जैसे पौधे यहां शोध और शिक्षा का केंद्र बने हुए हैं। यही नहीं, प्रदीप ने ग्रामेरों की मदद से श्रीहरी गोपाल गोशाला की भी स्थापना की। जहां 140 से अधिक गायों के साथ नील गाय, हिरन �
02:34प्रदीप की महनत से हरियाली और शोध का केंद्र बन चुका है। कॉलेजों के छात्र, किसान और शोध करता आकर यहां नई तकनिके सीखते हैं।
02:58प्रदीप का सपना है कि सरिस्का टाइगर रिजर्व की सभी बनस्पतियों को एक ही जगा इकठा किया जाए, तकि आने वाली पीडियां, जलवायों परिवर्तन और विलुप्त हो रही प्रजातियों को समझ और बचा सके।
03:10अलवर से ETV भारत के लिए प्यूश पाठक के रिपोर्ट
03:14झालवर
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