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  • 4 months ago
राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के द्वारा घोषित राष्ट्रीय गुरू बृज भूषण शर्मा ने ETV Bharat से खास की बातचीत.

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00:00आयर्वेदिक उप्चार और एलोपेदि उप्चार में सबसे बड़ा अंतर तो यह है कि हमारी जो ओश्दियां है वो प्रकृति के साब से तैयार की जाती है और वो कोई शरीर पर दुश्प्रभाव नहीं छोड़ती देखे आयर्वेद तो वैसे तो सभी में लेकिन मुख्
00:30लुकोरिया जिसे श्वेद प्रदर बोलते हैं उससे संबंदित और पी सी ओडी मासिक धर्म का उनका जस्तरब होना और छोटे-छोटी पॉलिप्स होना वेजाईना में यूट्रस में उसका जो है एक मात्र निदान जो है वो आयर्वेद पद्धिती में मॉडर्ण में एक
01:00को जाते रहते हैं उनमें चेंजी होते हैं हमारे हैं सब कुछ नहीं है आज भी जो उष्णियां है चाहे वुच्छंद्र प्रभावटी है गोक्षो रादी वटी है आरूग गेवर्दिनी है महा मंजीत आजी कुमारी आसब लो आसब है जो उस दिया पहले भी वहीं थी आ
01:30मैंसे सोएं गरिस्ट भोजन से बढ़ें जंक फूट फास्फूट समय व्यायाम जरूर करें पैदल चलना शुरू करें डाइबिटीज का सबसे बड़ा कारण जो है हमारी जीवन शैली है जो कि हर चौते और पांचवे जन यंग जनरेशन में होती जा रही है और शुगर क
02:00संदित प्रॉबलम है जैसे कि आज भी इसकिन डिसॉडर जिसे हम आम भाषा में रख्त दोश बोलते हैं उसका पर्मानेंट हिलाज जो है केवल और केवल वायर्वेद में और जिसमें कि उसके जराभी लेश मात्र भी दुश्परभाव नहीं मूत्र विगार ऐसे ही है पी
02:30नेत्र रोग की भी बहुत सारी ऐसी भीमारी हैं कि जैसे हमारे गुलाव जल डालते हैं गुलाव जल से आखों के हर तरह के जो एलर्जी है और इस टाइब की सामाने परिशानी है वह ठीक हो जाती है जबकि उनके यहां पर वह दवाईया रेगुलर डालनी पड़ती है और
03:00और जितना भी हमारे क्रॉनिव डिजीज हैं उसमें केवल और केवल ऐर्वेधी का मूलमंत्र अपने आप में बिमारी के उपर देखिए करता है जैसे लीवर से संबंदित फैटी लीवर से संबंदित अगर वह पहले ग्रेड में हैं दूसरी अवस्था में तो अगर पहली
03:30मूल से नास्ट करती है और जो मेडिसन हैं उनके कोई साइड इफेक्ट नहीं है और अहार विहार से हमारी जीवन शैली से हम बहुत कुछ अपने रोग पर नियंत्रण कर लेते हैं और इसको ठीक कर लेते हैं रोगी को जैसे कि अगर रोगी के हाइपर जिटियर रोगी को �
04:00करना चाहिए चुकि इन सबसे इस्टोन और बनते हैं और उसको नुकसान होता है अभी एक मेरे पास में जिसका की बिल्रोमिन और
04:11SGPT SGOT मैं जो साइंटिविक टेस्ट है मैं उनकी बात कर रहा हूं LFT की उसमें उसके वह बहुत ही चरम पर थे 1240 उसका SGPT था
04:241345 उसका SGOT था और बिल्रोमिन उसका 6.7 था बहुत ही सीरिस उसमें था आखों से साफ उसको पांडू रोग का वो दीख रहा था और पेशेंट बैठने में भी बहुत कटना ही महसूस कर रहा था हमने जब उसको सारी बाते की
04:39कॉंसलिंग की उसकी सारे चीज़े आर व्यार पर हमने फोकस किया क्या खाएंगे क्या नहीं काएंगे तीन माहा का हमने उसको बता लेकिन भगवान धर्वंत्री जी के क्रपा से जब वो तीसरे सप्ता में में रुपास आया मुझे भूप बहुत लग रही है अब तो मु�
05:09और 배े तैना हूं घेञए धिन में हमें सुभय के डाइं में हलका सुपाच्य नाश्टा करना चाहिए दूद का
05:17some other thoughts, but we need a little heavy
05:21but we need a little bit of the body of the body.
05:27We need to have some kind of body.
05:33We need to keep our hands.
05:39This is the first time we need to keep our hands.
05:43the first time we have to give up the first time we have to give up the first time we have to
05:51say that but every time we have to change our
05:59ुश्यू वर्ष इसको 23 सितंबर का दिन निश्चित कर दिया है कि वह जो है
06:07राष्टे दिवस के मनाया जाएगा और इस से आईरवेद का प्रशार-प्रशार होगा चुकि एक सब्ता के
06:14the world of the world and the world of the world of the world.
06:25The whole country where we are the people who are living in our lives,
06:34the food is used to eat the food from the store and the food you go to the food.
06:44I am shocked to see that the food is not the same as the food you don't want to eat the food.
06:54If you are more than happy with the food you can eat the food and the food.
07:02So, these are the things that we have to use to reduce the risk of the risk of the risk of the risk of the risk of the risk of the risk of the risk.
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