00:00रेखा के उस संघर्ष की दास्ता, जिनका साक्षी रहा उनका मंदिर जैसा बंगला, मुंबई में एक शादी समारों के दौरान बॉलिवुड अभिनेतरी रेखा, दोस्तों चैनल पर न्यू हो तो विडियो को लाइक और वीके रोमांटिक लव स्टोरी चैनल को सब्सक्रा�
00:30मांग में भरा सिंदूर तो गौसिप में रहता है, लेकिन बचपन में मिले गहरे घावों और फिल्म इंडिस्ट्री में लंबे संघर्ष की बात नहीं होती, फिल्मों से दूर होने के बावजूद वो रेखा हाल ही में जब आईफा अवार्ड में परफॉर्म करती हैं, त
01:00भी नहीं देती, उनके बंगले की दीवारों के पार पैपराजी के तेज कैमरे तक नहीं पहुँचते, चकाचौन से दूर रहने वाली, एकांत प्रिय और एक हद तक रहस्मई रेखा, वो रेखा जिन्हें आज उनकी भव्यसाडियों और डीवा इमेज लिये ज्यादा ज
01:30परफॉर्म करती हैं, तो उनकी चर्चा किसी नई अभिनेतरी से भी ज्यादा होती है, वो सदा बहार वेखा आज सत्तर बरस की हो गई है, दो हजार चौदा की फिल्म सुपरनानी के बाद से रेखा किसी भी फिल्म में मुक्य भूमिका में नहीं दिखी है, वो आम तोर पर
02:00पर आज के सुपरस्टार शाहरुक खान और, सल्मान खान के घरों से से कुछ दूरी पर है रेखा का घर, जिसके अतीत में रेखा और उनकी मा पुश्पावली के संगर्श की दास्तां भी छिपी है, हर इनसान की कहानी मा से ही शुरू होती है, वो मा जो साया बनकर आपके स
02:30मैंने फिल्म निर्देशक मुझफर अली से पूछा कि उन्होंने उम्राव जान की भूमिका के लिए रेखा को ही क्यों चुना, जबकि उस समय स्थापित और अभिने में बहतर मानी जाने वाली स्मिता पाटिल का विकल्प उनके पास था, उन्होंने फॉरण जवाब दिय
03:00तूटकर बिखरने के बाद वापस संभलने का यही एहसास मुझे रेखा की आंखों में नजर आया, मुझफर अली ने जिस एहसास का जिक्र किया वो शायद रेखा के अतीत, उनकी मा से जुड़ा है, जिसमें दुख और दुश्वारियां जहेलने की कहानी और उन पर जीत
03:30फिल्म की हीरोईन थी एक नई अभिनेतरी पुषपावली, अपनी नौकरी छोड़ कर आए एक खूबसूरत नौजवान रामास्वामी गनेशन को भी इस फिल्म में एक छोटा सा रोल मिल गया, इसी फिल्म के सेट पर दोनों की नजदीकियां बड़ी, आने वाले वक्त मे
04:00रिष्टा किसी से छुपा नहीं था, पुषपावली चाहती थी कि जेमिनी उनसे शादी करके घर बसा ले, लेकिन उन्होंने कभी भी भी इस रिष्टे को नाम या सामाजिक मान्यता नहीं दी,
04:1010 अक्तूबर 1954 में पुषपावली और जेमिनी की पहली बेटी का जन्म हुआ, उसका नाम रखा गया भानुरेखा गनेशन, भानुरेखा का जन्म ही अफवाहों से घिरा हुआ था, इन अफवाहों और निजी जिन्दगी से जुड़ी चर्चाओं ने ताउम्र उसका पीछ
04:40इमा का एहसास दिलाता था, भानुरेखा के बाद जेमिनी और पुषपावली की दो बेटियां और हुई, लेकिन भानुरेखा छोटी उम्र से ही जान गई थी कि उसके पिता एक दूसरे घर में रहते हैं, जहां उनका एक और परिवार है, वो परिवार जिसे वो बेहत प्
05:10पुषपावली ने पिता की कमी को पूरा करने की हर मुम्किन कोशिश की, मगर ये आसान नहीं था, पुषपावली की उम्र बढ़ रही थी और फिल्मों में रोल कम होने लगे थे, अपने परिवार के लिए वो लगातार शूटिंग पर जाती रही, अपने बचपन को या�
05:40पर बिताती थी, जिस दिन वो घर पर होती थी, वो दिन हमारे लिए किसी ट्योहार की, तरह होता था, हम सब उनकी गोद में बैठना चाहते थे, उनकी शखसियत बड़ी प्रभावशाली थी, मैं उनसे नाराज भी होती थी कि वो हम पर इतनी हावी क्यों हैं, और इसलिए �
06:10परिवार का खर्च चलाने के लिए कर्ज लेने की नौबत आ गई, तनाव ने पुषपावली की सेहत भी खराब कर दी थी, कर्ज चड़ता जा रहा था, पूरा परिवार बरबादी की कगार पर आ गया था, फिल्म दुनिया का अंधेरा सच, साल 2003 में एक म्यूजिक अलबम
06:40ये एक इंटर्व्यू में रेखा ने कहा था, नवी क्लास में मेरी पढ़ाई छुडवा दी गई और 14 साल की उम्र में मुझसे काम करने को कहा गया, मुझे तब तक ये नहीं पता था कि मेरी माँ पर कितना कर्ज है, तो मुझे फिल्मों में काम करने की बात सही नहीं लगी
07:10तो आ गई थी, मगर दिल ही दिल में बेहत घबराई हुई थी, ये शहर न उनके अकेलेपन को समझता था, न उसकी जबान को, उन्हें रहरह कर अपनी माँ पर गुस्सा आता था जिन्होंने उनकी मर्जी के बिना उन्हें यहां धकेल दिया था, सिमी ग्रेवाल को 2004 में दि
07:40का फाइदा उठाने की कोशिश की, एक 13 साल की बच्ची के साथ ऐसा होना डरावना था, फिर एक दिन, भानुरेखा ने तै कर लिया कि वो उस समान को पाकर रहेंगी जो उनकी माँ को नहीं मिला, बंबई में इसकी शुरुआत हुई
07:53अपने नाम से सरनेम गणेशन को हटाने से, भानुरेखा गणेशन अब रेखा बन गई, रेखा का बंबई में पहला घर था जुहु में होटल अजंता का कमरान एक सो पंद्रह जहां वो पहली फिल्म की शूटिंग के दौरान अपनी मा के साथ रही, इसके बाद लंबे सम
08:23रेखा को शुरुआत में हिंदी तक ठीक से नहीं आती थी, उनके सामवले रंग रूप, ज्यादा वजन और, 33 इंच की कमर का पूरी इंडिस्ट्री में बुरी तरह मजाक उड़ाया गया, रेखा कई इंटर्व्यूज में उस दौर का जिक्र कर चुकी हैं, तीन अगस्त,
08:53करते और कहते कि मैं उनके सामने कुछ भी नहीं हूँ, पहली ही फिल्म अंजाना सफर में एक किसिंग सीन के लिए मजबूर होने के विवाद से लेकर फिल्मों से निकाले, जाने और कई नाकाम रिष्टों तक रेखा के जीवन में ड्रामाई घटनाओं की कोई कमी नहीं र
09:23फिर भी मैं हैरान था कि वो किसी वजह से हिंदी फिल्म इंडिस्ट्री में टिकी हुई थी, लेकिन मैं उनकी आंखों की चमक और कैमरे के सामने उनके जबरदस्त आत्मविश्वास को कभी नहीं भूल सकता, उस समय भी उनमें कुछ अलग बात थी, काम्याब फिल्मों का �
09:53जो इस बहत मुश्किल समय में परचानी की तरह उनके साथ रही, पिछले साल वोग मैगजीन को दिये इंटरव्यू में रेखा ने कहा, मा मेरी मिंटॉर थी, उन्हें देखकर मुझे लगता था कि जैसे वो देवी है, उन्होंने मुझे प्यार और सौमिता से जीवन जीना
10:23में उनके अभिने की तरफ सब का ध्यान गया, हिंदी ना जानने वाली, ज्यादा वजन के लिए भद्दा मजाग जहलने वाली रेखा ने सत्तर के दशक के अंध तक अपनी धारा प्रवा हिंदी उर्दू और बहतरीन फिटनेस के लिए जानी जाने लगी, अपने करियर मे
10:53असी तक आते आते घर, खून पसीना, मुकदर का सिकंदर और खूबसूरत जैसी कामयाब फिल्मों से वो टॉप अभिनेतरियों की जमात में आ गईी, फिर इजाजत, कल्यूग और उतसव जैसी समानांतर सिनेमा की फिल्मों में यादगार अभिने किया, असी के दशक के अ
11:23मुझसे कहा था, रेखा किरदार को लिबास की तरह पहन लेती हैं, सोचिए जिस अभिनेतरी को शुरुआत, मैं हिंदी उर्दू बोलना तक तक नहीं आती थी, उसने कुछ साल बाद खूबसूरत उर्दू बोलते हुए, उमराव जान के रोल के लिए राष्ट्रिय पुर
11:53उन्होंने अपने व्यक्तित्व और करियर में हुए का मेकोवर का श्रेय हमेशा अमिताब बच्चन को दिया, कभी इशारों में तो कभी घुमा फिरा कर उन्होंने यह जता दिया दिया कि, उनकी काया पलट की प्रेयरना वही हैं, वह हमेशा शर्माते, सकुचाते हुए अ
12:23पराबर बताई थी, आज भी रेखा के पूरे करियर से ज्यादा जिक्र अमिताब के साथ उनकी नजदीकियों का ही होता है, इस एक आयामी चर्चा के शोर में उनकी अपनी महनत और बेमिसाल काम्याबी कहीं पीछे छूट जाती है, खास तोर पर अपने परिवार के प्रती
12:53जिसका नाम उन्होंने अपनी मा के नाम पर पुषपावली रखा था, मुझे मंदर जाकर प्रार्थना करने की जरूरत नहीं महसूस होती, मेरा घर ही मंदर जैसा है, रेखा ने वोग मैगजीन को दिये इंटरव्यू में यही कहा है, रेखा की छोटी बहन धनलक्षमी के �
13:23शांदार लड़ी और जीती, अपने परिवार को एक मुकाम तक पहुचाने के लिए उन्होंने बड़े तूफान झेले, बेकार की अंगिनत फिल्मों में काम करने के लिए रेखा की काफी आलोच ना होती थी, लेकिन रेखा के जीजा बताते हैं कि रेखा ने सत्तर के दश
13:53काउं की फीस के बीच बहुत बड़ा फासला होता था, परिवार की जिम्मेदारियों को बखुबी निभाया, रेखा ने दिल्ली के बिजनिसमेन मुकेश अगरवाल से मुलाकात के एक महीने के भीतर ही शादी कर ली थी, मगर रिष्टा चला नहीं और दोनों अलग हो गए
14:23यह तामर मेरे साथ रहा, मेरे साथ रहने वालों को मिला, पर मुझे लगता है कि यह एक महीला की ही सोच हो सकती है, कुल लोग जिन्दगी के खांचों में फिट होते है, मैं घर की कमाउ सदस से थी, मुझे रातों रात बड़े होकर अपने परिवार, भाई बहनों की देख
14:53यह वादा कर लिया था, कि मैं अपने परिवार को इस से बचाउंगी, खुद से किया यह वादा रेखा ने बखुबी पूरा किया, अपनी बहनों की शादी करने के बाद 1990 में रेखा का खुद शादी करके घर बसाने का सपना भी पूरा हो गया था, उन, होने दिली के बि�
15:23पती ने आत्महत्या कर ली थी, मीडिया के लिए मुकेश की आत्महत्या की खबर सबसे बड़ी संसनी थी, मीडिया और फिल्म इंडिस्ट्री ने भी मुकेश अगरवाल की मौत के लिए रेखा को जिमेदार ठहराया, जगहजगा लोगों ने रेखा की फिल्मों के पोस्टरो
15:53मदरास में एक लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई। रेखा ने अपनी जिंदगी में बहुत से उतार चड़ाव देखे पर हर मोड पर उनकी माँ उनके साथ खड़ी रही। उनकी मौत तक रेखा को इस बात का एहसास था कि उनकी माँ मानो उनका सुरक्षा घेरा बनकर उनक
16:23अपनी मा के देहांत के बाद ही रेखा शायद पूरी तरह बदल गई। उन्होंने मीडिया से दूरी बना ली। उनके साक्षातकारों के स्वर और सुर दोनों बदल गए थे। अपने पहले के बेबाक और इमानदार जवाबों से ठीक उलट उन्होंने खुद को मानों समे
16:53की स्वपनसंदरी या डीवा की शख्सियत ओड रखी है। उनके साक्षातकार अब निराकार और दार्शनिक से बन गए हैं। लेकिन पुषपावल ली के साय में जीवन बिता रही रेखा बिना फिल्मों सक्रिय रहते हुए भी फिल्म इंडिस्ट्री की सबसिप। रभा�
17:23चैनल को सब्सक्राइब कर लें धन्यवाद।
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