00:00दशरा से पहले रामलीला की धूंग देश भर में देखी जाती है।
00:30और अब तक 77 बर्शों का लंबा सफर तै कर चुकी है।
01:00यहां पर हमारे बज़र्ग लोग बढ़े लोग बाहर से मांग करके उस समय डांबर चलता था सड़के मंती ते उसके ड्रम खाली होते थे।
01:15उन ड्रमों को यहां लगा करके और लटडी के जो सिलियां आती हैं जिसको दाब भी बोलते हैं।
01:21आप भी बोलते हैं। उनको लगा लगा करके उसका मंच तयार किया जाता था।
01:26और छोटे-छोटे परदे लगा करके तो प्रभु रांग दिला यहां कंटीनियो हर साल की जाती थी।
01:56आधुनिक और सुसजित स्वरू प्ले चुका है।
02:26इस राम लीला की सबसे बड़ी विशेष्ता है पीडियों का जुड़ाव।
02:42तीसरी और चौथी पीडिय तक के लोग अब भी इसमें हिस्सा लेते हैं।
02:46चोहतरवर्ष के कलाकार भी रामान के पात्र निभाते हैं।
02:50और युबा का लाकार भी पूरी लगन से जुड़े रहते हैं।
02:53पेशेवर्ना होकर भी समाज और अस्थानिय लोग हर साल अपने मेहनत और आस्था से इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं।
03:02अलबर से एटीवी भारत के लिए प्यूश पाठक की रिपोव।
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