00:00लोगों को अच्छा जीवन और लंबी उम्र का मंत्र भोजन आधा पेटकर दुगना पानी प्यू तिगनो श्रम चवगुन हसी वर्ष सवासो जी रचना देने वाले काका हात रसी का आज जन दिवस और अवसान दिवस है।
00:30दावजी के मेले में अखिल भारती अकवसम्मिलन में प्रथम बात हासरस का पाठ काका हातरसी ने किया था और जमाने में हासरस को मंचपन नहीं आने देते थे इसलिए सब कुछ नीका है और दिल्ली के लाल के लिए पर तो कवसम्मिलन ही वीरस का होता था और यह तैक किया ग
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01:59मिसल को मसल नहीं है ओर इटएट से रिष्वत किस्वड निकल नहीं है कह काका का विराए भी इशकार जी
02:06घर को आए तो तर्षा से भी जादा नोट दवा कर लाए तो यह विशंग है और हर समय हर युग में प्रासंगिक होता है और
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02:45और सब दुनिया देख रही है कि काका की रवचना को आई पाथ उन्हें करना पड़ता है तो काका प्रासंगिक
02:51तो है लेकिन आवश्यकता इस बात किया कि 30 साल हो गई 30 साल बाद एक फीड़ी बदल जाएगी generation gap
02:57करने की जरूरत है कि उनकी जो प्रतनिदी लचनाय है उनके प्यंग है उनकी जो अलग तरह की सेली है वो उन युवाओं में परोसी जाए और वो युवा फिर वो जान सके समझ सके और काका आगे भी प्रासंगित बने रहे इस वात की बाइद महति आवश्यक्ता जो जरूर �
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03:53जो सामाजिक कुरूतियों पर, राजिनीती पर, बिसमताओं पर, छोटी-छोटी समस्चाओं पर, ऐसे थीखे ब्यंग जो नस्तर का काम करते थे, उन्होंने रचे और आज भी वो पढ़े जा रहे हैं, दूसरे लोग उन्हें उधान के रूप में पेस करते हैं, तो काका प्
04:23समाज रहे हैं या क्या क्या काम होता हैं?
04:53काका फिक, प्षित्रकारी थे, यह रहे हैं, और वार्फ में, कृतार्पाद में फिर और खिर्में कोश्च अरेर बहुत सारी किताब इन्होंने लिखके, और संगीत के लिए हैं काका, यह संगीतम भी नक्राच पीशल та उरते, और उसके अलावा और चित्रकारी भी में करत
05:23E.T. Bharat Haad-Rash