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Israel: इजराइल को आर्थिक-कूटनीतिक दबाव में लाया जा सकता है, लेकिन सैन्य टकराव (Israel IDF) विनाशकारी होगा। वास्तविकता में, मुस्लिम देशों की एकता अभी आंशिक है, लेकिन हाल की घटनाएं (कतर हमला) इसे मजबूत कर रही हैं। अगर पूर्ण रूप से लागू हो, तो मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक संतुलन बदल सकता है।

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00:00इसराइल के खिलाफ इन दिनों मुस्लिम देशों में गुस्ता दिखा जा रहा है और ये मुस्लिम देश एक की बाद एक एक जुट होकर के इसराइल के खिलाफ खड़े हो रहे हैं।
00:08इसराइल के प्रती मुस्लिम देशों का संतोष लगातार बढ़ा रहा है और खास कर गाजा, लिबनान और अब कतर में इसराइली हमले के वाद इस्तिति और खराब हो गई है।
00:17इसराइल को आर्थिक कूटनीतिक दवाव में लाया जा सके, इसके लिए अब बकाइदा एक बड़ी रणीनी की बनी है, क्योंकि मुस्लिम देश चाहकर भी सैन टकराव से उसका खात्मा नहीं कर सकते और उसको दवा नहीं सकते।
00:47आजनीतिक भूभाग में एक बड़ा संतुलन लाया जा सकता है। और इसी के लिए अब मुस्लिम देश एक हो रहे हैं।
01:17पूरी दुनिया में कई देश ऐसे हैं जहां पर अच्छा खासा दबाव मुसल्मानों का है। इसके अलाव सत्ताओन कंट्रीज तो इसलामी की हैं। लेकिन इसके बावजूद भी तमाम बैटकों और तमाम घटनाओं के बावजूद ये सभी देश एक टेबल पर नहीं आ
01:47किया है। कतर उसमें से एक बड़ा पहलू है। ऐसे में अब मुसलिम देश एक जुटा और एक जुट होने की कवायत तो कर रहे हैं। लेकिन खास बात यह है कि क्या अब इसको लेकर कोई ऐसा मुकाम हसिल कर पाएंगी ये देश ताकि इसराइल जैसे तमाम बड़े देश
02:17कोचिस के लिए कर रहे हैं। अगर मुसल्मानों की दुनिया के तमाम देशों की जनसंख्या को एक साथ जोड़ा जाये तो करीब 1.8 अरब होती है या फिर उससे ज़्यादा लेकिन इन देशों की संयुक्त GDP के मामले में अगर बात करें तो सिर्फ 8 ट्रिलियन डॉलर से ज
02:47करें। हथियारों के तोर पर अगर दोनों देश या फिर मुसलिम देश और इसराइल भिड़ते हैं तो दुनिया के लिए ठीक नहीं होगा। लेकिन सबसे ठीक होगा कि इसराइल को किसी तरह कूटनितिक इस्तर पर दबाया जाए। अगर कूटनितिक इस्तर की बात करें �
03:17ये लीग बनाई जा रही है। हला कि अब बात ये है कि अगर ये हथियारों के दम पर लड़ना चाहेंगे तो हथियारों के लिए किस के पास जाएंगे। क्योंकि रूस अमेरिका और चीन का ही हथियारों के बाजार में दबदबा है। रूस और अमेरिका ये दोनों सबसे
03:47को हथियार खरीदने के लिए जाना पड़ सकता है
03:50हाला कि कुछ मुस्लिम देश ऐसे भी है
03:51जिनके इसराइल के साथ ठीक ठाक दोस्ती है
03:54लेकिन क्या वो इसराइल की वेधिता पर
03:58सवाल उठाएंगी ये अपने आप में
04:00बड़ा सवाल है
04:00हाला कि ये मुस्लिम देश बायकॉट के जरिये
04:03दबाव बना सकते हैं
04:04मुस्लिम देश इसराइल के साथ व्यापार बंद कर सकते हैं
04:071973 के अरब तेल प्रति बंद ने
04:10पूरी दुनिया की अर्थ व्यूस्ता को खिला दिया था
04:12तेल कीमते चार गुना बढ़ गई थी
04:30व्यूस्ता जो की अभी इस वक्त अच्छे खासे मुकाम पर है
04:34वो चर्मारास जा सकती है
04:35इसके लाव कजाकस्तान और अजरवेजान जैसे
04:39मुस्लिम देश पहले से इसराइल को
04:4160 फीसदी तेल सप्लाई करते हैं
04:43इसका बंद होना एक बड़ा जटका
04:45माना जा सकता है
04:46लेकिन क्या ये होगा
04:47ऐसा संभवध दिखता नहीं
04:49इसराइल को शांती वारता के लिए
04:51मजबूर तो किया जा सकता है
04:52लेकिन यूएस के वीटो पावर
04:55इसमें बड़ी बाथा बन सकता है
04:56इसके लाव अगर बात करें
04:58इसराइल को आर्थिक तोर पर कितना मार सकते हैं
05:01तो अगर इस पर नज़र डालें
05:02तो करीब 500 बिलियन की उसकी अपनी जीडिपी
05:06इसके लाव मुस्लिम देशों के व्यापार पर
05:08वो कते निर्भण ही करता है
05:10लेकिन अपरतक्ष रूप से
05:11ये बेवस्तर प्रभावित हो सकती है
05:13बोर्ट से अगर दबाव की बात करें
05:16तो करीब 100 बिलियन डॉलर का नुकसान उसे हो सकता है
05:20वेश्विक के स्तर पर तेल संकट से
05:22इसराइल के सहयोगी यानी
05:24यूएस और योरोप को दबाव में लिया जा सकता है
05:27लेकिन मुस्लिम देशों को भी नुकसान होने की पूरी उम्मीद
05:30साओधी और यूएई जैसे देश यूएस से
05:33आर्थिक सहायता और हतियार खरीदते
05:35एक जुटता पर अगर प्रतिबंध लगता है
05:38या फिर लंबे समय तक ये खिसता है
05:40तो मुस्लिम एकता को मजबूत करना संभोतो है
05:43लेकिन हतियारों के लिए उन्हें फिर से लौट करके
05:46अमेरिका के पास ही जाना पड़ेगा
05:48इसके अलाव मुस्लिम देशों के पास
05:49बहुत बड़ी फौच का भी कोई ऐसा इंतिजामात नहीं
05:53तमाम देशों के सुरक्षब है उस्ता
05:55अभी भी यूरोप के तमाम देश करते है
05:57इरान, पाकिस्तान और तुर्की की सेयुक्त सेना
06:01लाखों में है
06:02लेकिन इसराइल की आईडियाफ को चुनावती देने के लिए
06:05ये परयाप्त तो है
06:07लेकिन इनके पास आत्याधूनिक हत्यार नहीं
06:09हाल के अगर उदारन देखें तो साल 2024 और 25 में
06:13इरान के ड्रोन हमले और हिजबुल्ला हमास की कारवाईयों
06:16ने इसराइल को पीछे तो धकेला है
06:17लेकिन जोखिम ये भी है कि युएस की सहायता अगर उसको मिल जाती है
06:22तो इसराइल मजबूत हो जाता है
06:24और पूर्ण युद्ध से भीशन तबाही हो सकती है
06:27गाजा में अब तक करीब 43,000 मौते हो चुकी हैं
06:30पहले भी इससे जादा हो चुकी है
06:321948 से लेकर के सडसक्ट के बीच में
06:35अरब और इसराइल देशों के बीच में
06:37कभी भी मुस्लिम देशों के बीच में आपस में बनी नहीं
06:40और एकता की कमी ऐसी रही जिसके चलते हमेशा इसराइल हावी रह
06:44इसके अलाओ एक सकारात्मक पक्ष भी है
06:47अगर मुस्लिम देश एक साथ आते हैं तो यमन, इरान और हमास के मिसाइलों का संयुक्त बचाओ न करने की इसराइल की हवाई रक्षा यानि आयरें डोम कमजोर हो सकता है। अगर सम मिलकर के एक साथ हमला करेंगे तो ये गैर प्रभावी भी हो सकता है।
07:04मिलकर के प्रभाव बड़ा लेकिन जोखिम भरा भी होगा। इत्यास दिखाता है कि एक जोट्टा से इजराइल को जुखना पड़ा था और 1973 में तेल संकट के कारण वो मुश्किल में भी आया था। लेकिन यूही उसे जीत लेना आसान नहीं क्योंकि अमेरिका जैसा देश �
07:34हुआ हुआ है
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