उत्तरी कोलकाता में, गौरीबेरिया सार्वजनिक दुर्गोत्सव और प्रदर्शनी मंडल अपने दुर्गा पूजा पंडाल के माध्यम से प्रेम और शांति का संदेश फैला रहा है. इसकी थीम 'मिट्टी और जीवन' है. यह पंडाल एक दर्शनीय स्थल बन गया है, क्योंकि इसकी पूरी संरचना खास तौर पर डिज़ाइन की गई ईंटों से बनी है. कारीगरों के मुताबिक पंडाल का निर्माण लगभग 60 हजार ईंटों के इस्तेमाल से किया गया है. इसमें मां दुर्गा की मूर्ति बनाने के लिए इस्तेमाल की गई ईंटें भी शामिल थीं. इस पंडाल को पूरा करने में तीन महीने लगे. अपनी अनूठी थीम के जरिए पंडाल का उद्देश्य 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक दुर्गा पूजा समारोह के दौरान आने वाले हजारों भक्तों को मंत्रमुग्ध करना है.
00:00उत्री कोलकाता में गौरी वेरिया सार्वजनिक दुर्गोत्सव और प्रदर्शनी मंदल अपने दुर्गा पूजा पंडाल के माध्यम से प्रेम और शान्ती का संदेश फैला रहा है इसकी तीन मिट्टी और जीवन है
00:13यह पंडाल एक दुर्शनी स्थल बन गया है क्योंकि इसकी पूरी संदचना खास तौर पर डिजाइन की गई इटो से बनी है
00:43कारिगरों के मताबिक पंडाल का निर्मान लगभख साथ हजार इंटों के इस्तेमाल से किया गया है
00:56इसमें माधुर्गा की मूर्ती बनाने के लिए इस्तेमाल की गई इटे भी शामिल थी इस पंडाल को पूरा करने में तीन महीने लगे
01:04पंडल का जो डिजाइन है मतलब चार इटा का डिजाइन है यह मैंने खुद हाथ से बनाया बना के डाई बना के हमने भटी में दे दिया
01:15इटा कभर्टी होता है उसमें दिया तो लोग ए तो बनाया तीन महिना से बनाया और यह जो दूर्गा मूर्ती है इसका अलग सा इट बनाया इसमें कोई डिजाइन नहीं है इसको सिर्फ गातनी करके फिर इसको खुदाई करके बनाया
01:31अपनी अनूठी थीम के जरिये पंडाल का उदेश है 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक दुर्गा पूजा समारों के दौरान आने वाले हजारों भक्तों को मंत्रमुख्द करना है
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