#latestnews #latestupdate #odisha #odishanews #odishatv #otv #pratidinnews #kanaknews कभी नहीं थमता शिवलिंग का जलाभिषेक। Disclaimer: - Under section 107 of the copyright Act 1976, allowance is mad for FAIR USE for purpose such a as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship and research. Fair use is a use permitted by copyright statues that might otherwise be infringing. Non- Profit, educational or personal use tips the balance in favor of FAIR USE.
00:00बारानोसी यानि कासी जहां हर गली से कोई ना कोई मंत्र निकलता है
00:28यहां की सुबह आरती से और रात संकर की स्थूत्ती से होती है
00:34पर क्या आप जानते हैं कि इस नगरी में एक ऐसी करंपरा भी है
00:39जो ना दीन देखती है ना रात ना मोशम और ना ही काल
00:46कासी विश्वनात मंदिर में भगवान सीव के उस सीवलिंग पर 24 घंटे 7 दीन साल के 365 दीन जला भी सेक होता है
00:59यह परंपरा सिर्फ आस्था नहीं बलकि भारत की जीवित अध्यात्मिक चेतना का प्रतिक है
01:10कासी वह नगर जहां सीव स्वयंग वास करते हैं
01:18हिंदू मान्यताओं में कहा गया है कि कासी कोई सामान्य तिर्थ नहीं है
01:25बलकि स्वयंग भागवान सीव ने इसे अपनी प्रियो नगरी बताया है
01:32सकंध पूरां के अनुशार कांशयांतु मरणं मुक्ति ही यानि कासी में मुरुत्यू भी मुक्षय का द्वार है
01:46इस नगरी में स्थीत कासी विश्वनात मंदीर को बार बार तोड़ा गया लूटा गया लेकिन यहां की सिव सक्ति कभी नहीं तुटी
02:01इसी मंदीर में स्थापित सिवलिंपर चोबिस घंटे जल चड़ाने की परंपरा है
02:10यहां भक्त दीन रात दर्शन करते हैं और जल दूध पेल पत्र सहद यादी और पितल करते हैं
02:22हर वक्त कोई ना कोई भक्त मुहादेप के सामने हाथ जोड़े खड़ा रहता है
02:31रात के तीन बजे भी जला भिशेक जारी रहता है
02:37तो मंदीर दीन भर ही नहीं पूरी रात भी भक्तों के लिए खुना रहता है
02:45कई बार ऐसा देखा गया है कि रात के तीन बजे भी लोग लाइन में लगे होते हैं
02:56हाथ में गंगाजल लिये हर हर महादेव का जाब करते हुए इस परंपरा में कोई अबकास नहीं है
03:09ना कोई आरति टाइम की बंदिश और ना कोई विशेश दर्शन का अलग रूट
03:18आम सद्धालू भी यहाँ महादेव को जल चड़ा सकता है किसी भी समय इतिहास में कभी नहीं रुकी
03:31यह परंपरा इतिहास के करने गवा है कि जब कासी विश्वनात मंदिर को औरंद जेव ने तूडवाया
03:45तब भी शीवभक्तों में किसी न किसी रूप में गुत रूप से जला भी सेखत जानी रखा
03:55आया परंपरा आज भी उतनी ही जीवनत है जितनी उस समय थी
04:01ब्रिटिस काल में जब कासी के घांटों का पुर्ण और निर्मान हुआ तब भी इस मंदिर की मान्योता ख्यूल रही
04:13यहां के स्थानियों ब्रावन, संथ और आम नागरिकों ने इस परंपर को अपना धर्म मान कर निभाया, लगडाउन में भी सीव की सेवा नहीं रुकी,
04:292020 के कोविड लगडाउन में जब देश भर के मंदिर बंद कर गये गये थे, तब भी कासी विश्वनात मंदिर में प्रति दिन जला भी सेख पता रहा, भक्तों को अंदर आने की अनुमती नहीं थी,
04:47लेकिन मंदिर के पुजरियों ने डियूटी की तरह भगवान की सेवा करना जारी रखा, तब प्रसाशन ने भी हा स्विकर किया की कासी विश्वनात मंदिर में पुजा पाख और अभी सेख बिना रुके चलते रहे, भले ही दर्शन आम लोगों के लिए बंद थे,
05:13बयानिक भी मानते हैं इस जगह की उर्जा को, विज्ञान की दुनिया में भी कासी को लेकर कई रिसर्च हुए है, कुछ बयानिक मानते हैं कि यहां की भूमी के नीचे एक अरगुद उर्जा चक्र सक्रियों है, जो मांसिक और आत्मिक सांती देता है,
05:38सायद यही करण है कि यहां जला भी सेक केबल एक कर्मकान नहीं, बलकि अभ्यात्मिक अनुभब बन जाता है, कासी में सीब सोते नहीं, इसलिए अभी सेक थमका नहीं,
05:54कासी का यहां मंदीर सिर्फ एक इमारत नहीं, बलकि सोनातन परंपरा का केंद्र है, यहां महादेव के जला भी सेक की परंपरा यहां सिखाती है,
06:09कि भक्ति कोई समय नहीं देखती, जहां स्रधा हो, वहां सेवा भी निरंतर होती है, मान्यता है कि कासी में सीब का जागरत रूप बिराजमान है, क्यूंकि यहां सीबलिंग कभी सुखता नहीं, और भक्ति की गंगा कभी रुखती नहीं.
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