00:00राजधाले नाची का करमटोली चोक आज ना सरी भीरभार और वेस्तता के लिए जाना जाता है बलकि करमापर्व के मौके पर यह इलाका एक खास धार्मिक और शांस्क्रितिक पहचान भी रखता है
00:09लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं किस जगह का नाम आखिर करमटोली क्यों पड़ा
00:13स्थानिय बुजूर्ग बताते हैं कि आज से 4-5 दसक पहले इस चोक को के बल चोक कहा जाता था
00:18उस समय यहां का द्रिस से बिलकुल अलग हुआ करता था
00:21पुरे छेतर में घना जंगल फैला हुआ था और उस जंगल में सबसे अधिक संख्या करम पेडों के थी
00:26जब भी नजर आती वहां करम का ही पेड दिखाई देता
00:29इसी कारण धिरे-धिरे लोगों ने इस इलाके को करम पेडो वाला इलाका यानी करम पेडों कहना शुरू कर दिया
00:36करीब 40 से 45 साल पहले यह चेतर करम पेडों से इतना घना था कि
00:40यहां से एक गुजरना भी मुश्किल माना जाता था
00:43पेडों की छाव और हर्याली इस जगह की पहचान थी
00:46जंगल दिरे-दिरे काटता गया पेडों के संख्या घटी गई लेकिन इलाके का नाम करम तोली ही रह गया
00:51यही नाम आगे चल कर यहां के चौक को भी मिल गया
00:54अब पुरा सहर इसे करम तोली चौक के नाम से जानता है
00:57स्थानिय लोग बताते हैं इस इलाके में करमा पर्ब का आयोजन बहुत पुराना है
01:01बर्स 1968 से यहां वाकाइदा पुजा अर्चना शुरू ही थी
01:05तब से लेकर आज तक हर साल भव तरीके से करमा पुजा होती आ रही है
01:10करमा पुजा के रात यहां आसपास के महले और गाउं से लोग बड़ी संख्या में जुटते हैं
01:15ढोल नगाडव निर्त ग्यान के बीच करम देपता के पुजा कर प्रकृति और भाई बहन के रिस्तों की मजबूती का आवान किया जाता है
01:45झाल किया जाता है
02:15Oh
02:17I
02:19I
02:21I
02:23I
02:25I
02:27Oh yeah, I think the police in the name of it is a great area and this is a great area
02:31in the city of Karm to the police.
02:36Oh, and in the name of Karm to the police, the police, the police, the police, the police,
02:46didn't he?
02:47Oh, the police's name is because of that.
02:49This is a very large area of the police.
02:52from this place.
02:53This is the name of the Karmtoli.
02:56Yes, yes, yes.
02:58So, you are coming to Karmtoli, the Karmtoli.
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