00:00भाग्य का परिवर्तल बसिष्ट जैसे महापुरुष भरत जी से कह रहे चुनव भरत भावी प्रबल बिलखी कहव मुनिनाथ खान लाब जीवन मरण जस अपजस बिदिहात
00:14खुब सीता जी की पत्रिका जन्म पत्रिका मिलाई थी राम जी से सतानंद जी ने और इधर बसिष्ट जी ने कहीं योग नहीं था कि 14 वर्स का बनवास होगा लेकिन होना था जो होना इतने बड़े-बड़े महापुरुषों के बीच में जो होना है उसे होना ही है
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