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Premanand Maharaj vs Rambhadracharya: जगदगुरु रामाभद्राचार्य की वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) को लेकर की गई टिप्पणी के बाद साधु-संतों में नई बहस छिड़ गई है. ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Swami Avimukteshwaranand) ने पूरे विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि वो दिनभर संस्कृत में ही भगवान के नाम का उच्चारण कर रहे हैं, अगर आपको दिखाई नहीं देता तो क्या सुनाई भी नहीं देता है.

#Rambhadracharya #Constitution #PremanandMaharaj #Aniruddhacharya #Kathavachak #Vrindavan #HinduControversy

~PR.89~ED.106~GR.122~HT.96~

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Transcript
00:00राम चरित मानस में लिखा है सब कर निंदा जे नर करहीं ते चमगादर होई अवतर हीं
00:06सबकी निंदा करने से चमगादर की योनी में जाना पड़ता है ये बात तुलसीदास जी महराज कह रहा है
00:12और उनही तुलसीय जी के राम पेट बना करके बैठे हुए
00:15रामगद्रचायर जी सब की निंदा कर रहा है
00:18ब्रेमा नन जी को गलत कह रहे है और ब्रेमा नन जी क्यों गलत है
00:21क्योंकि वो संस्कृत नहीं बोलते हैं
00:24तुलसी रास जी जिनकी पीट पर आप स्वयम बैठे हुए हो उन्होंने भी तो अवधी भाशा में राम चरीत मानस लिख दिये उनसे पूछा जाना चाहिए कि उनकी टिपनी का क्या मतलब है
00:35राम बद्राशारे जी
00:38सब की निंदा करते हैं
00:45राम चरीत मानस में तुलसी रास जी ने जिस तुलसी पीट पर वो बैठे हैं उसी तुलसी दाश जी महराज ने
00:57राम चरीत मानस में लिखा है
00:59सब कर निंदा जे नर करहीं
01:02ते चमगादड होई अवतर ही
01:04तो सब की निंदा करने से
01:08चमगादड की योनी में जाना पड़ता है
01:10ये बात तुलसी दाश जी महराज कह रहा है
01:12और उन्हीं तुलसी जी के नाम पे पीठ बना करके बैठे हुए
01:15पे राम पद्राचार जी सब की निंदा कर रहा है
01:17क्या उन्होंने ये चौपाई पढ़ी नहीं है
01:21या फिर उस चौपाई के कुछ और अर्थ उन्होंने समझ ली है
01:26ये तो उनसे चल्चा करने पर ही पता चलेगा
01:29गाम पद्राच़ जी ने कहा है कि उन्हें एक लाख छूप्लaled आते हैं
01:48एक लाख प्रिष्ट याद हैं कि प्रिष्ट याद है
01:53कि आहए न्हों कोई परिक्षा तो हुई नहीं है
01:55दावा उन्होंने जरूर किया है
01:57उन्होंने तीन दावे वैसे तो अनेक दावे किये हैं लेकिन तीन प्रमुक दावे हैं
02:04एक उनका दावा है कि मुझे डेड़ लाख पृष्ठ याद है कंठस्त है
02:08दूसरा उनका दावा है कि हमको 23 भाषाएं आती है
02:12और तीसरा उनका दावा है कि मैंने रामजन मभूमी में जो गवाही दी उसके कारण हैसला हो गया
02:19लेकिन इन तीनों दावों की पुष्टी अभी नहीं हुई है
02:23क्योंकि डेड़ लाख परिष्ट उनके कंठ में हैं
02:28कभी परिक्षा तो हुई ही नहीं है
02:30तो बिना परिक्षा के दावा दावा ही है
02:33इसलिए हम चाहेंगे कि डेड़ लाख परिष्ट कौन कौन से हैं
02:38उनको निकाल के एक जगर पे रखें
02:39और फिर लोगों को आमंतरित कर दें
02:42कि आईए जिसको किसी भी परिष्ट से पूछना हो
02:44हमसे पूछिए हमको सब कंटरस्थ है
02:46सो पचास परिष्टों से
02:50डेड़ लाख परिष्ट है तो कम से कम डेड़ सो परिष्ट
02:54एक बार पूछ लिए जाएं कोई भी परिष्ट
02:56और उसके बाद अगर वो सब सुना देते हैं
02:59तो सब लोग जये जयेकार करेंगे
03:00हम लोग भी जये-जयेकार करेंगे
03:01है ना ये विश्व के लिए बड़ा अचंबा होगा
03:05कि हमारा एक संथ
03:08डेड़ लाख परिष्ट कंटरस्थ करके बैठा है
03:10तो हम चाहेंगे
03:13कि अब ये मौका आ गया है
03:14कि वो डेड़ लाख परिष्ट काउन काउन से है
03:17चांट दें
03:18और उनको एक मेच पर सजा दिया जाए
03:21और फिर लोगों को बुला ले
03:23डेड़ सो परिष्ट के बल पुछे जाएंगे
03:25अगर डेड़ सो परिष्ट
03:27कंटरस्थ उनको हो गए उनमें से
03:29तो हम लोग मान लेंगे कि सब कंटरस्थ हैं
03:31वो कहते हैं कि 23 भाषा हमको आती है
03:34अभी तक उनका कोई भी वीडियो
03:36यूट्यूब पर खोजने से
03:38हिंदी के अलावा को दूसरी भाषा में मिलता नहीं है
03:40तो अगर 23 भाषा आती होती
03:42तो 23 भाषा में
03:44उनका कोई नगोई प्रवशन होता कहीं न कहीं
03:46तो 23 भाषा काउन काउन सी है
03:49उसकी सुची वो बता दे
03:50तो 23 उन भाषाओं के जो विद्वान है
03:54उनको हम लोग भेजेंगे
03:5540-40 मिनिट का एक संबाद
03:58उसी उसी भाषा के विद्वान के साथ
04:00उनका हो जाए
04:00जय जय कार काउन नहीं करेगा
04:02सब करेंगे
04:03और तीसरी बात यह है
04:06क्यों कहते है कि राम जनम भूमी में
04:08हमारे कारण फैसला आ गया
04:10हमी हैं
04:13तो
04:13वहां के वकीलों नो तो इसके विरुद्ध बताया है
04:16वहां के जज ने तो इसके विरुद्ध बताया है
04:20इसलिए इसमें भी शंका हो गई है
04:22इसलिए इस बारे में भी प्रमान उनको सामने रख देना चाहिए
04:26और ये कहना चाहिए कि जो वकील और जो जज कह रहे हैं वो गलत है
04:29लेकिन ये नहीं उन्होंने कहा है
04:32जो उनको गलत बता रहे हैं उनको उन्होंने गलत नहीं कहा है
04:36प्रेमानन जी को गलत कह रहा है
04:38और प्रेमानन जी क्यों गलत है
04:40क्योंकि वो संस्कृत नहीं बोलते हैं
04:42तुलसी दास जी
04:44जिनकी पीट पल आप स्वयम बैठे हुए हो
04:47उन्होंने भी तो
04:48अवधी भाषा में रामचरित मानस लिख दिये
04:51संस्कृत में क्यों नहीं लिखा हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए ह
05:21बढ़े से बढ़ा से बढ़ा सबकुष अवदी भाषा में हैं संस्कृत में नहीं है तो क्या तुलसी दासी विद्वान नहीं थे तो यह जो परिभाषा आप ले करके आए और अमने यह पूशा है
05:40क्या आप यह बताईए प्रेमान अंजी महराज दिन भर राधे राधे शाम शाम कह रहे हैं तो राधे राधे शाम शाम यह जो शब्द हैं यह संस्कृत भाषा के हैं की नहीं और संबोधन विभक्ती में हैं की नहीं
05:55और जब संबोधन विभक्ती से अपदमन प्रियुन जीत अपद नहीं बोलना चाहिए और वो उसको पद बना करके संबोधन विभक्ती में ढाल करके अगर दिन भर उचारण कर रहे हैं तो आप से ज़्यादा संस्कृत तो वो बोल रहे हैं आप कितनी देर संस्कृत बोलत
06:25पद है जो कि संस्कृत विभक्ती में जब भगवान का नाम बोला जाता है तो क्या वो संस्कृत नहीं होता है
06:43और अगर संस्कृत होता है तो वो तो संस्कृत ही बोल रहे हैं दिन भर संस्कृत बोल रहे हैं आप उनको क्यों कह रहे हैं कि यह जो बाते हैं इन सबसे पता चलता है कि या तो उनकी बात को ध्यान ही देना छोड़ दिया जाए बिलकुल अप्रमान मान लिया जाए और या
07:13देना चाहिए, हम कहना चाहेंगे
07:15वो पुरी के शंक्राशायर जी को
07:17कहते हैं कि वो संस्क्रित नहीं बोलते हैं
07:20संस्क्रित
07:21नहीं बोलते, कोई
07:23इच्छा से बोलता है
07:24भाषा जो है वो विवक्षा धीन होती है
07:28विवक्षा का
07:30मतलब होता है बोलने की इच्छा, हमको इच्छा होगी
07:33तो हम बोलेंगे, इच्छा नहीं होगे, नहीं बोलेंगे
07:35कोई हमको जबरदस्ती करेगा, कि तुम यही बोलो
07:39यह तो महाराशन्टर के ठाकरे बंदू हो गए
07:43कि बोलना ही पड़ेगा
07:46अरे भाषा जो है
07:48भाषा का नियम है वो विवक्षा धीन होती है
07:50जो बोलना चाहता है वो बोलता है
07:51जिसको नहीं इच्छा होती है नहीं बोलता है
07:53कौन शाव शब्द मैं बोलूँगा
07:55ये कोई हमको बताएगा
07:56हम खुद बोलते हैं
07:58जब हमको जिस शब्द की इच्छा होती है, उस शब्द का उच्छारान अपने मुख से हम करते हैं, भाशा हैं जो होती हैं वो विवक्षा धीन होती हैं, बोलने की इच्छा के अधीन होती हैं, तो ऐसी परिस्तिती में वो नहीं बोलते हैं उनकी इच्छा, लेकिन वो संस्क
08:28झाल झाल झाल
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