00:00श्री आज सनात्र धर्म पर चार ओर से आक्रमन हो रहे हैं अब सभी हिंदूओं को बिल्कुल पारस्परिक वेद छोड़कर इकठा होने क्या आउसक्ता है
00:20हमने साथे पांत पर सव वर्ष की जड़ाई जीती स्री राम मंदिर हमें मिल गया अब स्रीकर्ण जन भूमी और काश्री विश्णाद भी हमें मिलेगा पर हमें सब को इकठा होना होगा
00:38कि रही बात प्रेमानद्द की मैंने प्रेमानद्द के लिए कोई भी अभद टिपड़ी नहीं किया है कि वे मुझे मेरी दिश्ट में वालगपत हैं पुत्रवत हैं मेरी अवर्ष्था भी बड़ी है
00:53एक आचारी होने करना तो मैं सब को कहता हूं कि समस्कृत का ध्यन करना चाहिए आज जो सामानी लोग चोला पहन करके वक्त अब दे रहे हैं जिनको एक अक्षरात आजाता नहीं मैंने तो अपने अपने उत्तरा धिकारी रामतिंदास को भी कहा है कि बड़ी संस्कृत पढ
01:23आज भी मैं स्वें पढ़ता हूं अठार अठार घंटे पढ़ता हूं और पढ़ता रूंगा यावद जीव मधीते विप्रहा इसमें प्रेमानन्द के लिए कोई मैंने इसी तिपड़ी नहीं किये हैं हाँ चमतकार को मैं नमस्कार नहीं करता ये सत्य हैं इतो मैंने अपन
01:53समस्कृत और समस्कृति भारति समस्कृत को जानने के लिए समस्कृत का पढ़ना नितान तावस्यक है मैं किसी के लिए कुछ भी नहीं कह रहा हूं सभी संत मेरे लिए इस नहीं भाजन है और से वाजन रहेंगे विधर्मी शक्तियां स्रातन धर्म को निर्मल बनाने के लि
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