00:28202 acres of land and 255 acres of land and 217 acres of land and 217 acres of land.
00:41विहार सरकार ने 1956 संतावन में विर्षा किर्सिव इस विद्यालाय के लिए अधिगरन के लिए कोशिस किया था, उस वक्त भी वहां के लोगों ने बिरोध किया और बिरोध के सवरूप यह हुआ कि उस समय जो ततकालिन विहार के मुख्मंत्री थे,
01:05वो उस जमीन पर गए आपसरों से राय विचार और देखे और इसके बाद उन्होंने कहा कि इस जमीन को आप एक्वाइर नहीं करना है और किसानों को कहा दिया कि आपका यह जमीन है आप सब लोग खेती बारी करिए और लगातार उन लोग खेती बारी करते रहा, माल गु�
01:35और दो हजार बारा में जारखन सरकार द्वारा भूमी अधिगरन करने के फिर प्रियास होई थी आई आई एम और टिर्पल आई टी के लिए उस समय भी वहां के लोगों ने विरोज किया तो सरकार फिर वापस आई काफी उस समय भी मुक्तमा बाजी हुआ है
01:56और इसके बाद ग्रामीनों ने सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहट विर्षा किर्सिव विश्विद्यालय से उन लोगों ने जानकारी प्राप्त करने की कोशिज की सरकार ने काब और कितनी जमीन का एक्वाइर किया है
02:15तो किर्सिव इस विश्विद्यालय ने उत्तर दिया उन लोगों को हमने कोई जमीन एक्वाइर नहीं किया है
02:25इसलिए हमारे पास उस जमीन का कोई दस्थावेज नहीं हम सरकार से यह मांग करते हैं
02:34राजिके मुखमंतरी से मान करते हैं कि वहीं आप विदान सभा में गोशना करिए लगड़ी के जो आदिवासी भाइबहनों की जो खत्यानी भोमियारी जमीन है
02:45वह वहां की रैयतों से वह छीने नहीं और 2012 के पहले जिस प्रकार से मल गुजारी रसीद उनकी काटती थी वैसा ही रसीद कटे
02:58और वहां लोग खेती बाड़ी कर सके यह दो मांगे है और दोनों ही मांगे आदिवास्यों से जुड़ा हुआ है
03:07और इसलिए आज जार्खन विधान सभा में इन दो मुद्दों की जबाब सरकार से हम लोग चाहेंगे
03:15और सरकार एक तो घोषना करें सिव्याई जाच की और दूजरा घोषना करें इस जमीन वहां के आदिवासी खत्यानी रहयतों को
03:25वापस उसमें से कोई दखल नहीं करें वहां लोग खेती कर सकें 2012 के पूर्व जिस पकार से वो लोग माल गुजारी रसीद काट रहे थे वो रसीद काटने के भी वो प्रविशन दे बहुत बहुत है
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