00:00ौरत मंदिर में भगवान के सामने बैठकर रोई जा रही थी।
00:03तभी वहाँ एक मात्मा जी आये और उस औरत के पास जाकर उससे रोने का कारण पूछने लगे।
00:08औरत रोते हुए बोली बाबा मैं क्या करूँ मैं बहुत दुकी हूँ।
00:11मेरा पती रोज रात को शराप पी कर आता है और मुस्तरड़ाई जगड़ा करता है।
00:14कभी कभी तो वह मुझे मारता भी है।
00:16बाबा बोले बेटी यह सब हमारे पिछले जन्मों के करमों का ही भल हैं।
00:20जिसे हर हाथ में हमें भुगतना पड़ता है।
00:22महिला बोली बाबा मैंने ऐसे क्या बुरे करम की हैं कि मुझे रोज अपने पती की मार खानी पड़ती है।
00:52मार का हिसाब ले रहा है। जब तक उसकी मार का हिसाब पुरा नहीं होगा तब तक वैस दुनिया से नहीं जाएगा।
00:58यही सिस्टी का नियम है।
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