00:00संतोष कैसे करे किसी भी चीज में?
00:04कौन से चीज में लाना है?
00:06हर चीज में
00:07इसमें क्या है कि हमें अज्ञानता है वहां तक एहंकार खड़ा उत्पन होता है
00:12एहंकार उत्पन हो गया एहंकार को हमेशा इंस्युक्रिटी फिलोती है
00:15और इंसेक्रिटी से वो कुछ ऐसी प्राप्ती करना चाहता है
00:19कि मुझे हमेश के लिए संतोष रहे, शांती रहे, सेफ साइड रहे
00:23और वो जो चीज प्राप्त करने जाता है, वो चीज टेंपररेरी होने से
00:27उसका असंतोष की बुक कभी मीटती ही नहीं
00:29असंतोष के दुख में से सची समझ के सुख में आ सकता है
00:36थोड़ा कंपेरिजन करके, समझ लो हमारे गर में टू बेडरूम प्लेट है
00:42तो हम दूसरे का तीन बेडरूम बाला देखेंगे तो हम दुखी हो जाते है
00:45इनको कितना अच्छा है, हमें कितनी तकलिफ है
00:47तो उसके लिए उसको वन बेडरूम बाला देखेंगे आना चाहिए
00:50नहीं, उनको तो बहुत तकलिफ है, उससे तो मुझे बहुत अच्छा है
00:52थोड़ा कंपेरिजन करके, पॉजिटिव बुद्धी से हम रहे
00:57तो असंतोष के दुख कम हो सकते है
00:59समदलो आपके पास ज्वैलरी है, सोने की, मगर डाइमंड की नहीं है
01:04तो आपको असंतोष लगेगा, इनके पास कितना डाइमंड का अच्छा है
01:07मुझे सोने का मिला अंको डाइमंड
01:09पर दूसरे का दे, उसको कुछ पहनने के लिए कुछ ज्वैलरी है नहीं, उसके पास
01:14मेरे पास तो बहुत अच्छा है, उतने सुखी हो सकता है के नहीं, आदमी
01:17हो सकता है
01:19पस नहीं से कमपेरिजन से सुखी होने का उपाई करो
01:2125% discount है, तो खुशी होती है कि दुखी होता है, अदमी?
01:27खुश होता है, लेकि
01:28अरे, खर्चा करने माले को दुख होता है, सबंड बोलेका 25% discount wife बोलेगी
01:33कितना सस्ता है, 25th का discount
01:35खर्चा हमारी से सर पे आ गया
01:38तो उसको दुख लगता है, उसको �スूख लगता है
01:43कि दुख है सब हमारी दृष्टी बदलो समझ बदलो तो हमें सान्ती मिलेगी अगर हम अपने से नीचे देखे तो लाइफ में आगे कैसे बढ़ेंगे आगे बढ़ना है मगर असन तो उसका दुख में नहीं रहना दोनों देखो जब एंकार बढ़ जाता है तो उपर वाले �
02:13कर दो जाता है
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