00:00आपने कागच की नाओ बनाकर उसे पानी में खूप तैराया होगा
00:18लकडी की नाओ पर लोगों को नदी तालाब की सैर करते देखा होगा
00:23लेकिन क्या आपने पत्थर की नाओ को पानी में तैरते देखा है
00:28ये सुनकर आपको आश्चरे जरूर हो रहा होगा
00:32ये नाओ जो नीशी सताप्ती दी और ये हमारे संग्राले को आज साल पहले दान प्रोप दिली थे
00:42और इस नाओ की खाचिया थी है कि ये नाओ का जो बजन है धायक लोगा है
00:47परन तो ये नाओ अपने उपर 700 ग्राम का वजन लेकर पानी में तैर सकती है
00:54जी हां यहां पत्थर की बनी वो नाओ है जो सागर जिला पुरातत्त संग्राहाले में रखी है
01:01पत्थर की इस नाओ की खास्तियत यह है कि इसका वजन मात्र धाई किलो है
01:07ये अपने उपर 750 ग्राम वजन लेकर तैर सकती है
01:12नाओ अपनी खास कटिंग और डिजाइन के कारण तैरती है
01:16हाला कि भूगर्व शास्त्री पत्थर की नाओ के तैरने की अलग वैज्यानिक वज़े बताते हैं
01:42हमारे सागर में इस तरह की चीज भी देखने के लिए लिए अपनी में पानी में तैराया तो तैरी हमने यह अगमान लगाए कि कितना तक भी बजन जेर सकती है
02:04टफरीन अस्पताल में बने पुरातत तो संग्रहाले में कई प्राचीन और अचिहासिक मूर्तियां रखी है लेकिन लोगों के आकरशन का केंद पत्थर की नाओ ही है
02:24ये नाओ उन्नीसमी शताबदी की है जो 34 साल पहले ततकालीन कलेक्टर मनोच श्रीवास्तो को दान में मिली थी
02:34सागर से ETV भारत की रिपोर्ट
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