00:00बर्थ डेस पे केक काटने का चलन तो अब आम हो चुका है लेकिन क्या आप जानते हैं कि केक काटने का चलन हमारे सनातंधर्म में कभी भी नहीं था
00:12दरसल सनातंधर्म या प्राचीन भारतिय संसकारों से यह नहीं आता है
00:16ये प्रथा मूलतव पशिमी यानि की योरोपियन परंपरा से आई है लेकिन इसका हिंडो जन्मदिन में श्रामिल होना अब आम हो गया है
00:24सर्फ जन्मदिन ही नहीं बलकि किसी भी खुशी के मौके पर आजकर लोग केक काटना नहीं भूलते हैं
00:31लेकिन केक काटने के पीछे का कारण क्या है ये शायद हर कोई नहीं जानता आईए सवर्यों आपको बताते हैं
00:38दरसल जर्मनी में अठारवी सदी में किंडर फेस नामक बच्चों के जन्मदिन पर मिठाई और केक काटने की प्रथा शुरू हूँ थी
00:45केक को गोल आकार में बनाया जाता जिसे सूरज का प्रतीक मानते हैं
00:49देखे जब हम बर्थडे मनाते हैं तो हम एक साल अपने जीवन का कम्प्लीट करते हैं
00:55और नय साल की और आगे बढ़ते हैं, जो एक साल हम कंप्लीट करते हैं, वो फृत्वी एक साल सूर्य के चक्कर लगाती है, यानि कि एक साल कंप्लीट होने के लिए सूर्य एक पूरा गोल चकर सूर्य का लगाती है और इसी के प्रतीक के तौर पर केक गोल आकार का बनाया जा
01:25पूरी करने की इच्छा रखते और उसके बाद केक पर लगी मुम्बत्यों को बुझा देते धीरे धीरे ये सभिता आगे बढ़ती चली गए और देश विदेश हर जगा केक काटने को खुशी और जशन का प्रतीक बनाया गया ये दिन को खास और यादगार बनाने का एक तर
01:55परिवारों के साथ खुश्या बाटना इसका मुख्यों देश है उमीद करती हूँ कि आपको ये वीडियो पसंद आया होगा केक से जुड़ी ये हिस्ट्री आपको कैसी लगी हमें नीचे कॉमेंट सेक्षन पर लिख कर बताना ना भूलिएगा कल दन वीडियो को लाइक औ
02:25झाल झाल
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