00:00हाए मैं मल ही जाओं जो तुझ को ना बाओं बातों में तेरी मैं है राते प्ये काम हो तो पे लम्हा लम्हा है ना मुझे राहे तुझ को ही काम मैं तुझ को पूटानू
00:30सेयार तुझ को बतला नहीं है मौसम जरा सा रूप का हुआ है
00:46सेयार तुझ को बतला नहीं है मौसम जरा सा रूप का हुआ है
01:00हाई मैं मरनी जाओ जो सुझ को ना पाओ
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