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  • 7 months ago
पहले भारत के गांव-गांव में चरखे की घरघराहट स्वदेशी भावना की धड़कन थी, जिसने आजादी की लड़ाई को नई ताकत दी.

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00:00ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ
00:29ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ
00:59लेकिन समय के साथ कपड़ों के लिए धागे बनाने का काम बड़ी-बड़ी मशिनों से होने लगा और इसके साथ ही चर्खा उप्योग से बाहर होता चला गया
01:11हालांकि कुछ जगों पर यही चर्खा चला कर महिलाएं अपनी रोजी रोटी भी कमा रही है
01:16आप क्या काम कर रहे हो भी अच्छा कितना किलो बना देते आप एक दिन में
01:28और कितनी मजदूरी मिलती आपको इसमें
01:33कितने बज़े तक आप इसको करते हैं अच्छा लगर आप कोई काम करके फोड़ा यह बताना चाहेंगे कि जो आप मशीन में तागा कटाई कर रहे हैं एक दिन में कितना कारी कर देते हैं
01:55कितनी आपकी इसमें मजदूरी बन जाती है एक समय जहां घर-गर में खादी बुनने के परमपराती वहीं आप यह केवल कुछ सीमित इकाईयों और हैं और हैंडिक्राफट इसमें
02:25सेंट्रों तक सीमित रह गई है खादी के कपड़ों के मांग में विभारी कमी आई है जिसका असर पारमपरिक बुनकरों की रोजी रोटी पर भी पड़ा है
02:33इसके बावजुत खादी में वक्त तक साथ नए डिजाइन और एक्सपिरिमेंट भी हो रहे हैं ताकि हैंडिक्राफट बुनकरों को बाजार उपलोड हो सके
02:45देरा उन्सेन अविन अग्रबूर्बूर्बूर्बूर्बूर्
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