00:00देश की आजादी का दिन 15 अगस्त स्रिपेक एतिहासिक तारीक नहीं बलकि गर्व, याद और जस्न का संगम है।
00:07सुभा होते ही तिरंगों से सजे महले, स्कूलों में गुंचता राष्टगान और गलियों में देशभक्ती के गीत या माहूल हर भारतिय का दिल को छुजाता है।
00:16लेकिन इस पुरे रंगीन और जोज से भरे द्रिस्व में एक मीठी परंपरा भी चुपचाप अपनी जगा बनाए हुए है।
00:22जलेवी
00:23गर्मा गर्म, कुरकुरी और चासनी में डुबी जलेवी ना सरिप स्वाद में कमाल है, बलकि जस्न का भी एहम हिस्सा है।
00:31पंदरा अगस्त की सुभा ज़ंडो तोलन के बाद जलेवी की खुस्बुमानों हर गली में फैल जाती है।
00:37चाहे छोटे शहर का चौक हो या किसी महानगर की कलोनी, हर जगा लोग इसे खाकर अजादी की मिठास महसूस करते हैं।
00:47तो तंतरा दिवस के दिन तो बहुत ज़्यादा ही चाह से लोग खाते हैं।
01:02जैसे हम लोग भी खा रहे हैं, हम लोग भी लेने आया हैं। ऐसे ही।
01:07सब लोग इसको खाते हैं, पूरी भारे देश में खाया जाता है इसको।
01:10जैलेवी अच्छा लगता है, हम लोग राष्टे मिठान हैं।
01:16और कस्मीर से लेकर कन्या कुमार तक मिलता है, और प्लस में हर एक जगा अलग सेप में मिलता है, आपको खाने में वेचा लगएगा मिठा रहता है।
01:25और ये सस्ता में अराम से मिल जा रहा है।
01:27इतिहासकार बताता है कि आजादी के दौर में जब किसी मोर्चे पर जीत मिलती थी, तो गाउं गाउं में मिठाई बाटी जाती थी।
01:44जलेवी अपनी आसान रेसेपी और लंबे समय तक ताजा रहने की बज़ से उस दौर की लोगप्रिय मिठाई बन गई। तब ही से ये खुशी के मौके का अभिन हिस्सा रही है।
01:56भारत के खुबसूर्ती इसकी बिविद्दा में है, जलेवी इसका शांदार उधारन है। कहीं यह केसरिया रंकी होती है, कहीं मोटी इमर्ती के रूप में, तो कहीं पतली और खास्ता।
02:07बले ही रूप बदल जाए, लेकिन इसकी मिठास और लोगों का प्यार एक जैसा रहता है। यहीं बज़ा है कि इसे अनुपचारिक तोर पर राष्ट्रिय मिठाई कह दिया जाता है।
02:37राष्ट्रिय मिठाई है और हमें राष्ट्रिय मिठाई को एक बार जरूर प्रेस्ट करना चाहिए।
03:07जलेवी का हर निवाला स्रिप्चीनी और आटे का स्वाद नहीं लाता, बलकि अजादी के उन पलों को भी याद दिलाता है।
03:35जब देश ने पहली बार खुली हावा में सांस ली थी। यही बजह है कि यह मिठाई हर साल इस दिन हमारे जश्न का सबसे मिठा हिस्सा बन कर लौट आती है।
03:47चंदन भटाचारिया, ETV भारत, राची।
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