*रक्षाबंधन का वास्तविक अर्थ*
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*माया ही है भक्षक गोविंद राधे।*
*गुरु ही है रक्षक वाते बता दे।।*
*यह जो राखी का मायने रक्षक का त्यौहार मनाया जाता है, दुश्मन से रक्षा करना। दुश्मन कोई नहीं होता। मां बाप बेटा यह रक्षक भी नहीं हो सकते। दुश्मन एक है माया और उससे रक्षा करने वाला भी एक है गुरु। भगवान भी नहीं क्योंकि भगवान तो सामने आएंगे नहीं। वो तो भगवत्प्राप्ति की जब अवस्था पहुंच जाएगी हमारी तब भगवान आएंगे। हमको तो गुरु से ही सब स्वार्थ है, थ्योरी की नॉलेज से लेकर भगवत्प्राप्ति तक। तो असली रक्षक गुरु है और असली भक्षक माया है। सबसे बड़ी दुश्मन माया। अगर माया हट जाए तो संत महात्मा इसी संसार में रहते हैं, उनका कोई दुश्मन नहीं। यानी वो अपना दुश्मन किसी को मानते ही नहीं। सदा आनंदमय रहते हैं। इसलिए भक्षक माया, रक्षक गुरु। यह असली राखी है।*
*- जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज* #mykrishnaconnection #janmashtami2025 #krishnaconnection #ConnectWithKrishna #premmandirmathuravrindavan #mykrishna #premmandir #jagadgurushrikripalujimaharaj #ilovekrishna #rakshabandhan #rakshabandhanspecial #radheradhe #rakshabandhangifts
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