00:00जोलपूर के रहने वाले एक तिस वर्षिय सत्यंद्र कुमार यादों ने अपनी मोत के बाद भी इंसानियत की एक मिसाल कायव कर दी
00:23एक सड़क हाथ्चे में गंभी रूप से खायल होने के बाद सत्यंद्र के ब्रेंट ने काम करना बंद कर दिया था
00:30डॉक्टरों ने उसे प्रेंटेट घोसित कर दिया इस मुश्किल घड़ी में भी सत्यंद्र के परिवार ने एक बड़ा और सराहनिय फैसला लिया वो था अंगदान का
00:41सत्यंद्र एक केश एजञेंसी में काम करता और अपना साधारन जीवन जीता था
00:49लेकिन एक सड़क हाँचे में गंभी रूप से घायल होने के बाद सत्यंद्र का ब्रेंट टेड हो गया
00:55लेकिन इस मुश्किल घड़ी में सत्यंद्र के परिवार ने एक ऐसा फैसला लिया जिससे सत्यंद्र हमेशा के लिए अमर हो गया
01:03परिवार का यह फैसला असाधारण नहीं था
01:07परिजनों ने न सिर्फ एक जुट्ता दिखाई बलकि इसे अमित सत्यंद्र को दूसरों में जीवित देखने का माध्यम भी बताया
01:37मुझे पता चला तो मैं वहां से निकला और फिर आज मैं सोवे सोवे पहुंचा हूं बैट उनको सॉंबर कोई साम को एडमिट किया गया था वहीं पास में जहां पर एक्सिडेंट हुआ था उनको एडमिट करने के दौरान उन लोग ने जो डाक्टर था रिफर कहां करवा
02:07कि गौट की दौरा ही बचाए जा सकता था उनका जो ब्रेंट था पूरा डेड हो जोगा था 99 परसेंट और उनकी कल बुद्वार को लगबक 11 से 12 बजे उनकी मृत्तू हो गई सिर्थ और हम लोगों ने एक्ट्वल में हमारे पी-एम प्रदानमंती सरीमान मानी मौदी जी क
02:37जो है वह अभी भी जीवत वस्ता में हमें रहेगा उनकी यादे रहेंगी जिसके करारule हम लोगों ने मेरी मा पुष्ट पाया दा और मेरी पिता जी सिरी रौधी परशाद आदा और मेरे जो चोटा भाई सतिन्त कुमार यादो की धरम पतनी सिर्थ मिनाक्षी आदा दाओ
03:07एक दूसरे परसन की लाइफ बनेगी जिसे हमें इससे बड़ा और पुन्य क्या हो सकता है जीवन में ये क्या होगा अभी भी हमारा भाई जीवी तवस्तम हमें ये सुनने को आएगा कि यार किसी के सेकंड परसन की लाइफ अभी भी सेक्योर है लगवग कितनी उम्री थी उन
03:37इस महानकारे को अंजाम तक पहुँचाने के लिए प्रशासन और मेडिकल टीम ने तत बड़ता दिखाई
03:54गुरुवार को जवलपुर में दो बार ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए
03:58पहला ग्रीन कॉरिडोर डुमना एयरपोर्ट से विशेशग्य डॉक्टरों की टीमों को मेडिकल कॉलिज तक लाने के लिए
04:06तो वहीं दूसरा मेडिकल कॉलिज से अंगों को भोपाल और एहमदाबाद भेजने के लिए बनाया गया
04:13Medical College के दीन के अनुसार सत्यंद्र का लीवर भोपाल के सिधान्त सुपर स्पैसिलिटी हॉस्पिटल और दिल याने हाड का एहमदावाद के CIMS अस्पताल भेजा गया
04:30जबकि वहीं दोनों केट्निया इस्थानिय मरीजों को ट्रांस्प्लांट करने के लिए रखी गई
04:35यह घटना एक बार फिर हमें याद दिलाती है कि अंगदान सिर्फ एक निर्णे नहीं बलकि जीवनदान होता है
04:44सत्यंद्र यादव आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनकी वजह से चार जिंदियों में नई रोशनी फैल चुकी है
04:52सर आज महत्मूल क्रीन कॉल्टोर बनता है और किस तरीके से यह आज मेडियल कॉलेज हिस्ट्री का एक बहुत बड़ा महत्मूल दिन फिर से बना है
05:03इस साल में तीसरी बार हुआ है यह हमारे जो ब्रेंडेट हमारा पेशेंट है सत्य ज्यादव जी उनका रोट ट्राफिक एक्सिट हुआ रहा उनको और उनका अनफर्चुनेट्टी हमने ब्रेंडेट कोशिद किया और हमारे टीम पूरी डॉक्टर्स नर्सेस पेरामेडिक
05:33और इश्वर की मतलब ऐसा उनको लगा कि हमको चार जिंदगी और बचाना है तो फाइनली यह decision हो गया कि जो हार्ट जो है वो जाएगा आमदाबाद
05:43स्टेटाम मत्रिप्रदेश में कोई वेटिंग नहीं थी तो वो नोटर को अलर्ट किया है नोटर वालों ने पर हम्दाबाद को किया है और जो लिवर भूपाल का सिद्दान था सुपर इस्पेसलिटी हास्पिटल वह वहां जाएगा वो किडनी के हैं जो हमारे पास वेट
06:13अब जैसा भी होगा आपने चार जिन्दिक हों की बात की है तो तीन तो आपने बताया है चौंसी देखिए दो तो अपनी किड्नी है अगर देखिए अगर एक किड्नी में तो जो थोड़ा डाउट है वह जो सर्जन ने कहा है कि जब अपने उसे क्लिनिकली असेस करेंगे �
Comments