00:00नहीं रहे सत्यपाल मलिक
00:03आज दुनिया को कहा अलविदा
00:06राजनीती में कैसे हुई थी एंट्री
00:10जम्मो कश्मीर के पुर्व राजपाल सत्यपाल मलिक का निधन हो गया
00:14एक वक्त बीजेपी के कद्दावर नेताओं में शुमार पार्टी के उपाध्यक्ष रहे सत्यपाल मलिक अब हमारे वीच नहीं है
00:22वह चार राज़ों के राजपाल भी रहे लेकिन पिछले कुछ सालों में उनके विष्टे मोधी सरकार से लगातार बिगड़ते चले गए
00:44कई पार्टियों में उन्होंने अपना राज़नितिक ठोर तलाशा था उन्होंने बीजेपी में भारी ब्रश्टचार का दावा किया था
00:51पचास साल के लंबे सियासी करियर में उन्होंने कई पार्टियां बदली लेकिन हमेशा खुद को जाट समाज और किसान नेता के तौर पर ही बताते रहे
01:00वो खुद को लोहियावादी मानते थे और अपना राजनितिक गुरू चौधरी चरन सिंग को बताते थे
01:06बात अगर सत्यपाल मलिक के निजी जीवन की करें सत्यपाल मलिक का जन उत्तरपरदेश में बागपत के हिसाओदा गाओं में
01:1324 चुलाई 1946 को हुआ था और उन्होंनी महज 2 साल की उम्र में अपनी पिता को खो दिया था
01:20उनकी राजनीती में एंट्री भी 76 जीवन में ही हो गई थी
01:24उन्हीं सक्रिय राजनीती में लाने का श्रे चौधरी चरन सिंग को चाता है
01:281974 में चौधरी चरन सिंग की भारत एकरांती दल की टिकेट पर बागपत विधान सभा का चुनाब उन्होंने लड़ा था
01:36और महज 28 साल की उम्र में विधान सभा पहुँच गए थे
01:401980 में लोगदल के टिकेट पर वह राज्यसभा पहुँचे थे
01:43एमरजेंसी के दौरान कॉंग्रेस का पुरजोर विरोध किया था और जेल भी गए थे
01:48हलांके 1984 में उन्होंने पाला बदल लिया और कॉंग्रेस में शामिल हो गए
01:53कॉंग्रेस छोड सत्यपाल मलिक ने जन्मोर्चा पार्टी बनाई और साल 1988 में अपनी पार्टी का जन्ता दल में विले कर दिया
02:011989 में वह अलेगड से सांसत भी बने थे
02:05मुलायम सिंग यादव की राजनितिक उभार के दिनों में समाजवादी पार्टी में विश्वामिल हो गए
02:11और 1996 में सपा के टिकट से अलिगड से चुनाब लड़े लेकिन हार गए
02:162004 में बीजेपी में शामिल हुए लेकिन बागवत से चुनाब नहीं जीत पाए
02:21हलांकि पार्टी ने उन्हीं 2012 में राष्ट्रिय उपाध्यक्ष का पद जरूर दिया था
02:272017 में उन्हीं बिहार का राज़पाल बनाया गया
02:302018 में उन्हीं जम्मू कश्मीर का 2019 में गोवा और 2020 में में घाले का राज़पाल बनाया गया था
02:38सत्यपाल मलिक और बीजेपी के साथ रिष्टों में खटास किसान अंदोलन के बाद शुरू हुई
02:43मलिक 2022 में मेगाले के गवर्नर थे और इस दोरान उन्होंने कहा था कि दिल्ली की सीमाओं पर 700 किसान मर गए
02:51कुता भी मरता है तो दर्ध होता है लेकिन किसानों के लिए समवेदना की एक चिठी दिल्ली से नहीं आई
02:57उन्होंने पुलवामा हमले को लेकर भी आरोप लगाया था कि केंदर सरकार की अंदेखी की वज़ह से ये हमला हुआ
03:04इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा था कि बीजेपी ने पुलवामा का चुनाबों में फाइदा उठाया था
03:10तो कुछ ऐसा था जम्मो कश्मीर की पुर्व राजयपाल रहे सत्यपाल मलिक का राजनीतिक सफर
03:18इस वीडियो में फिलहाल इतना ही आप इस पूरी जानकारी पर क्या कहना चाहते हैं अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें
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