00:00ुपराश्ट्रपती के पत से इस्तीफा दे दिया है
00:30अपने पत्र में जग्दी धंकर ने लिखा
00:32स्वास्ते की प्राथमिक्ता और चिकित सकीय सला का पालन करते वे
00:36मैं भारत के उपराश्ट्रपती बत से ततकाल प्रभाव से त्याकपत्र दे रहा हूं
00:41उपराश्ट्रपती को उनके सहयोग और सोहार्दपून संबंदों के लिए धन्यवाद दिया
00:47साथी प्रधानमंत्री और मंत्री परिशत को भी उनके सहयोग और मार्ध दर्शन के लिए आभार व्यक्त गिया
00:53अपने त्याकपत्र में उन्होंने लिखा मुझे संसत के सभी माननिय सदस्यों से जो इसने विश्वास और सम्मान मिला वो जीवन भर उनके हृदे में संचित रहेगा
01:04उपराश्ट्रपति के रूप में अपने कारेकाल को याद करते वे उन्होंने कहा कि इस महान लोकतंत्र में उपराश्ट्रपति के रूप में मिले अनुभव पद्रिश्टी कोणों के लिए मैं गहराई से आभारी हूँ
01:16भारत के आर्थिक विकास और अभूत्पूर्व परिवर्तनकारी दोर का साक्षी बनना मेरे लिए स्वभाग्य और संतोष का विशे रहा है।
01:25उन्होंने भारत के वैश्विक उदय और उज्वल भविश्य पर आटूट विश्वास जताते वे अपना त्याक पत्र समाप किया।
01:55निरंतर टकराव की स्थि में टिक नहीं सकता।
02:25इससे पहले वे एक अनुभवी वकील और राजस्थान से सांसत विधायक भी रह चुके हैं इसके अलावा वो केंडरी मंत्री भी रह चुके हैं।
02:33जग्दी धनकर से पहले दो और उपराश्थ्रपती हुए जो अपना कारेकाल पूरा नहीं कर सके।
02:39ग्रश्नकांत ने 21 अगस्त 19 सत्यान में को अपराश्थ्रपती पत की शपत ली थी, लेकिन 27 जुलाई 2002 को कारेकाल के दोरान ही उनका निधन हो गया, इसकारन वो अपना कारेकाल पूरा नहीं कर सके।
02:51इसके अलावा वरहागिरी बेंकट गिरी ने भी 1939 में उपराश्थ्रपती के रूप में अपने कारेकाल के दोरान तीफा दे दिया था ताकि राश्थ्रपती पत का चुनाव लड़ सके।
03:03ब्यूरो रिपोर्ट पत्रिका
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