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00:15एक गाउं की लड़की और उसकी प्रेम कहानी
00:17कहानी का नाम
00:19रूपा और उसकी प्रेम कहानी
00:22धीम
00:23सचा प्यार संगर्ष, समाज, रिष्टों की इज़त
00:26भूमिका
00:29कहानी शुरू होती है उतर भारत के एक छोटे से गाउं से, नाम है सरसुपुर
00:34ये गाउं चारो और हर्याली से गिरा, खेत खलिहान, कच्चे रास्ते, पीपल के नीचे बैटने वाले बुजर्ग, हर किसी की अपनी अपनी कहानी
00:43इसी गाउं में रहती थी रूपा
00:47उम्र होगी कोई 22 साल, रंग रूप साधारन, मगर दिल बेहत खुबसूरत
00:52रूपा के घर में उसकी मा, पिता और छोटा भाई, पिता खेती करते, माघर सम्हालती
00:59रूपा पढ़ाई में होश्यार थी, मगर गाउं के हालात ऐसे कि लड़कियों का जाधा पढ़ना अच्छा नहीं माना जाता था
01:06लोगों की बाते
01:08पर रूपा सपने देखती थी, इज़त से जीने के
01:17प्रेम की शुरुवात
01:19गाउं में ही एक लड़का था, रगु
01:21पिता मजदूर, मा नहीं रही
01:23रगु बहुत सीधा साधा, महनती, मगर गरीब
01:27रूपा से उसकी पहचान तब हुई जब दोनों खेत के रास्ते में अकसर आमने सामने आते
01:33रूपा सर जुका के निकलती, रगु दूर से देखता रहता
01:37धीरे धीरे छोटे छोटे बहाने बनने लगे
01:41कभी कुए से पानी भरने में मदद, एंबिग्विटी
01:46भटग गई तो रगु ने पकड़ कर लाया, थौंग से लोटे-लोटे सांज हो गई तो साथ-साथ गाउं तक छोड़ना
01:51रूपा को रगु का इज़त से बात करना, उसकी आँखों का सचापन अच्छा लगनी लगा
01:58रगु को भी रूपा के बोलने का तरीका उसकी सादगी भाने लगी
02:02छुपा हुआ प्यार, रगु और रूपा की दोस्ती धीरे-धीरे गहराई में उतरती रही
02:07रूपा पहली बार किसी से खुल कर हस्ती थी, सपने बताती थी
02:12रगु सुनता और बस मुस्कुराता
02:15एक दिन पीपल के पेड़ के नीचे बैठ कर रूपा ने कहा
02:20तो बड़ा आदमी बनना चाहता है?
02:23रगु बोला
02:24हाँ, ताकि तेरे जैसा कोई लड़की मुझसे इज़त से शादी कर सके?
02:30रूपा धीरे से बोली
02:31तेरे जैसा लड़का, तो मैं चाहती हूँ
02:35रगु ने उसकी आँखों में देखा, बगर कुछ कहा नहीं
02:39उस दिन दोनों के बीच कुछ अन कहा बंधन जोड़ गया
02:43रिष्टे की दीवार
02:44रूपा के पिता को एक दिन गाउवालों से बातों बातों में पता चला
02:49कि रूपा और रगु का कुछ चल रहा है
02:51गाउं के बड़े बुजर्ग आग में घी डालने लगे
02:54गरीब लड़का, मजदूर का बेटा
02:57इस लड़की का रिष्टा तो बड़े घर में होना चाहिए
03:00पिता ने रूपा को डाटा, मा ने खूब रोया
03:04रूपा बोली
03:06मैं कोई पाप नहीं कर रही
03:08मैंने रगू से कभी कुछ कलत नहीं किया
03:11वो मेरी इज़द करता है
03:13पिता ने साफ कहा
03:16इस घर की बेटी, मजदूर के बेटे के संग नहीं जाएगी
03:20तेरा रिष्टा तै कर दिया है
03:23रगू की लड़ाई
03:25रगू ने जब सुना, तो उसने हार नहीं मानी
03:29उसने अपने बाबा के खेतों को लीच पर लेकर
03:33दिन रात महनत शुरू की
03:34बैल नहीं थे तो खुद हल कीचा
03:38बारिश में भी काम किया
03:40लोग हंस्ते थे
03:42रूपा के लिए पगला गया है
03:44मगर रगू ने साल भर में खेत से अच्छा पैसा कमा लिया
03:48अब वो मजदूर नहीं
03:51छोटा किसान था
03:52रूपा के पिता के पास गया और कहा
03:55अब मैं भी इज़त से कमाता हूँ
03:58बेटी को मांगने आया हूँ
04:01चोरी से नहीं
04:02पिता ने कहा
04:04पैसा हो गया मगर जात
04:06समाज
04:08रगू बोला
04:10माफ कीजिए
04:11लेकिन अगर आपकी बेटी मुझसे प्यार करती है
04:14तो उसके लिए मुझे भगवान भी कुबूल है
04:16रूपा की आवाज
04:17रूपा पहली बार गाउं के सामने बोली
04:21पिता जी
04:22माँ
04:24आप लोग कहते हो बेटी की इज़त सबसे बड़ी
04:27तो बताओ
04:28क्या वो लड़का जो मुझे बिना चुए
04:30बिना जूट बोले
04:31मेरे सपनों को सच मान कर दिन रात पसीना बहाता है
04:35उसकी इज़त कम है
04:37गाउं की ओरते सुनकर चुप हो गई
04:40पुरुष भी कुछ ना बोल सके
04:42इम्तिहान
04:44पिता ने एक आखरी शर्त रखी
04:47रखु
04:48इस पार के मेले में तेरा खेत
04:50सबसे अच्छा निकला तो बेटी
04:52तेरी
04:53वरना तू भूल जा
04:55रखु ने अपने खेत को ऐसे समारा
04:58जैसे कोई मंदिर सजाए
05:00साल के अंथ में पूरे गाउं का
05:03सबसे अच्छा खेत रखु का निकला
05:05अंथ
05:06प्यार की जीत
05:08गाउं के बुजुर्गों ने खुद कहा
05:11इज़त मेहनत से मिलती है, जाद से नहीं
05:15प्यार से घर बसते है, बिरादरी से नहीं
05:19रूपा के पिता ने हाथ चोड़ कर कहा
05:22बेटा, तुझे बेटी देने में अब गर्व है
05:26शादी सादगी से हुई
05:28ना दहेज, ना दिखावा
05:31बस गाउं के कुए के किनारे, पीपल के पेड के नीचे
05:36जहां पहली बार दोनों मुस्कुराए थे
05:38आखिरी द्रिश्य, शादी के बाद रूपा और रगू गाउं में ही रहे
05:43रूपा गाउं की लड़कियों को पढ़ाना शुरू किया
05:47रगू किसान ही रहा, मगर अब उसका नाम सम्मान से लिया जाता था
05:52लोग जब पूछते, तिरे प्यार का राज क्या है?
05:56तुरूपा कहती, इज़त, भरोसा और साथ यही असली प्रेम होता है
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