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Imagine being stranded in the middle of the ocean... for 438 days.

This is the unbelievable true story of a Japanese fisherman who defied death and survived the impossible. He and two other crew members set out on a routine journey, but a massive storm changed everything. The boat was damaged and lost in the vast Pacific Ocean.

Within months, one man died. Another didn’t make it past the early weeks. But one man — driven by hope, hunger, and pure human will — refused to give up.

Surviving only on rainwater, raw fish, and sheer determination, he drifted for over a year, isolated and alone, facing sun, storms, sharks, and despair. When he was finally found, he was a living skeleton… but alive.

This story isn’t just about survival — it’s about the strength of the human spirit, the will to live, and a man who endured what no one ever should.

If you love real-life thrillers, survival stories, and unbelievable human endurance, this video is a must-watch.


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📌 Hashtags:
#438DaysAtSea #TrueStory #Survival #LostAtSea #RealLifeHero #HumanSpirit #MotivationalStory #OceanSurvival #NeverGiveUp
Transcript
00:00दोस्तों, आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे इनसान की, जिसने अकेले समंदर के बीचों बीच 438 दिन जिन्दा रहकर इतिहास रच दिया.
00:08जी हाँ दोस्तों, एक साल से भी ज्यादा, ऊपर खुला आसमान, और चारों तरफ, खामोश, खौफनाक समंदर, ना कोई किनारा, ना कोई मदद, बस एक तूटी-फूटी नाव, और हर और मंडरा थी, मौत की परचाई, सिर्फ एक दिन के लिए मचली पकड़ने निकला था
00:38चार महीने के अंदर एक ने दम तोड़ दिया, लेकिन दूसरा, उसने मौत को धका दिया, और जिन्दगी की दहलीज तक लोटाया, दोस्तों, इस व्यक्ती ने किस तरीके से इतना दिन तक खुद को जिन्दा रखा, जानकर आप लोगों के रोंगटे खड़े हो जाएंग
01:08मैकसिको के इसी कजबे में अपनी छोटी बेटी के साथ रहता था, वह और उसका साथ ही एजिक्यल कॉर्दोबा, 22 वर्ष, ये दोनों पेशेवर मच्छुआ रहे थे, जोश को मच्छी पकड़ने में सालों का अनुभव था, लेकिन एजिक्यल उतना माहिर नहीं था, वो ह
01:38जाएंगे, जहां बड़े आकार की मच्छलियां मिलती थी, जिन्हें अच्छे दामों में बेचा जा सकता था, उनका इरादा सिर्फ एक दिन के लिए जाने का था, लेकिन जैसे ही जोश यात्रा के लिए तैयार हुआ, एक अनुभवी मच्छुआरे ने उसे टोका, आज म
02:08एक छोटा रेडियो, कुछ बर्फ, मच्छियां रखने के लिए बॉक्स, और थोड़ा बहुत खाना, उनका लक्ष्य था, समुद्र के भीतर लगभग 120 किलोमीटर की दूरी तक जाना, दोनों को अंदाजा नहीं था, कि ये दूरी उन्हें 438 दिनों तक मौत और जिन्द�
02:38लहरें उची होने लगी, हवाएं तेज चलने लगी, फिर शुरू हुआ एक भयंकर तूफान, ऐसा तूफान जो लगातार दो दिन तक चला और उनकी किसमत बदल कर रख दी, नाव लहरों के थपेड़ों से उचलने लगी, इंजन बंद हो गया, और रेडियो भी खराब ह
03:08थेंक दी, ताकि नाव हलकी हो जाए और डूबने से बच सके, उनका इरादा था, तूफान के रुकते ही वापस लोट जाना, लेकिन खुदरत के सामने, इनसान कितना भी चालाक क्यो ना हो, बेबस ही होता है, इस तूफान के महस दो दिनों में, उनकी नाव लगभग 400 किल
03:38पानी भी, अब उन्हें जिन्दा रहने के लिए बारिश का पानी जमा करना पड़ रहा था, कभी हाथों से, कभी नाव के किसी कोने में, भूख मिटाने के लिए उन्हें समंदर में तैरते पक्षियों को पकड़ना पड़ा, कच्छूओं को, और कभी-कभी मचलियां भी,
04:08He skied for his soul,
04:09he was dead.
04:10He was dead.
04:11He was dead.
04:12But the four months later,
04:15his body was dead.
04:17His body was dead.
04:19He was telling us,
04:21he could not be dead.
04:22Josh had to try his sleep.
04:24But he was dead.
04:26His body was dead.
04:27He was dead.
04:28He was dead.
04:30He was dead.
04:32Josh had to be his body.
04:34Josh had to be alone.
04:36was supposed to be the 4 months connect with his to 7th
04:39now he was not
04:40he was totally alone
04:42Josh didn't realize that he was more than 9 months
04:45he was the rest of his
04:46here he was not running
04:47he was just a
04:51just a boy
04:51he had to live
04:53and he was just
04:55Josh went to be totally alone
04:56he had been a
04:58he was not to know how far he was
05:01and he was just a
05:03he was just a
05:04खामोश, नीला, अथाह समंदर.
05:07वो समंदर जो सिर्फ गहराई नहीं था,
05:10वो एक शिकारी था,
05:11जो उसकी हर सांस पर निगाह रखे बैठा था.
05:14ना कोई आवाज, ना कोई इनसानी चहरा,
05:17ना कोई उमीद, सिर्फ लहरें थी.
05:19ठंडी, बे रहम, और उसे निगल जाने को बेताब,
05:23वकक्त जैसे रुख गया था.
05:24हर दिन, हर पल जोश को ये एहसास कराता था,
05:28कि ये जंग सिर्फ भूख और प्यास की नहीं है.
05:30ये जंग थी, उसके अंदर छिपे इनसान के अस्तित्व की.
05:34समंदर उसका शरीर नहीं,
05:35उसकी आत्मा तक चूस लेना चाहता था.
05:38हर सुबह वो उठता तो लगता,
05:40आज शायद आखरी दिन है.
05:42और हर रात, वो आसमान को देखकर सोचता,
05:45क्या ये आखरी रात है मेरी?
05:46लेकिन जब हर उमीड तूट रही थी,
05:48तब एक चीज उसे हर दिन जिन्दा रखे थी,
05:51उसकी बेटी की हसी,
05:53उसकी आखें,
05:54उसकी मासूम आवाज,
05:55जब जोश की आत्मा ठकने लगती थी,
05:57तब वो यादें उसे थाम लेती थी,
05:59उसे कहती थी,
06:00तू हार नहीं सकता,
06:02तुझे जीना है,
06:03मेरे लिए,
06:04दिन की आग जैसी धूप में उसका बदन जलता था,
06:07और रात की हड्डियाओं जमा देने वाली हवा में,
06:10उसकी रगें जमने लगती थी,
06:12खाने के नाम पर कुछ नहीं,
06:13पीने के लिए सिर्फ बदबूदार पानी,
06:16और साथ में,
06:17एक खामोशी,
06:33जब जौश की आँखें सूरज की चमक में जल रही थी,
06:36तब उसे दूर क्षितिज पर एक विशाल काए जहाज दिखाई दिआ,
06:39उसका दिल धड़कने लगा,
06:41जैसे उसमें फिर से जान आ गई हो,
06:43उसने अपने कपड़े हवा में लहराये,
06:45नाव को हिलाया,
06:46चीखा,
06:47चिलाया,
06:48जैसे पूरा समंदर उसकी आवाज उसे गूंजने लगा हो,
06:51लेकिन हकीकत उतनी ही बेरहम थी,
06:53जितना ये समंदर,
06:54जहाज ने उसे देखा तक नहीं,
06:56उसकी छोटी सी नाव,
06:57उस नीले सागर के महा संगराम में,
06:59एक धब्बे से ज्यादा कुछ नहीं थी,
07:01कुछ ही मिनटों में वो जहाज ओजल हो गया,
07:04और साथ ही ओजल हो गई जोश की वो आखिरी उम्मीद,
07:07जोश अब एक टूटा हुआ इनसान था,
07:10ऐसा इनसान जो सवाल करता था,
07:12क्या मैं अब कभी किसी को देख पाऊंगा,
07:14वो आसमान की ओर देखता,
07:16पर वहां सिर्फ खामोशी थी,
07:18सिर्फ लहरों की बेरहम हसी,
07:19और एक अकेली रूह की सिस्कियां,
07:21ग्यारह महीने बीच चुके थे,
07:23अब उसकी नाव लगभग आठ हजार किलोमीटर दूर,
07:26अग्यात महासागर में भटक रही थी,
07:28वो समंदर जिसे दुनिया के नक्षों में कोई नाम नहीं मिला,
07:31और जौश, जिसका अब चेहरा पहचानने लायक भी नहीं रहा,
07:35उसकी आखें धस गई थी,
07:37गाल सूख गए थे,
07:38होंट फटे हुए थे,
07:40और तवचा,
07:41ऐसी जैसे आग में तपी हो,
07:42लेकिन जौश अब इनसान नहीं था,
07:44वो अब एक आदत बन गया था,
07:46जिन्दा रहने की आदत,
07:48और फिर आया वो दिन,
07:4930 जनवरी 2014,
07:51वो दिन जब किस्मत ने दर्वाजा नहीं,
07:53एक दरार दी,
07:55लेकिन जौश ने उसी दरार में से जिन्दगी खोज निकाली,
07:58पानी में कुछ अजीब तैरता नजर आया,
08:00सूखे नारियल,
08:01और जौश ने एक जटके में समझ लिया,
08:04जमीन पास है,
08:05उसके जिस्म में जहां जान बाकी नहीं थी,
08:08वहाँ एक तूफान उठा,
08:09उसने नाव को पूरी ताकत से मोड़ा,
08:11और दूर देखा,
08:13वहाँ एक टापू था,
08:14एक धर्ती का टुकड़ा,
08:15जिसे देखने के लिए उसकी आँखें तरस गई थी,
08:18कुछ ही समय में वो मार्शल आइलेंड्स के पास पहुँच गया,
08:21जो नाव कल तक मौत का पिंजरा थी,
08:23आज वहीं उसे जिन्दगी की गोद में ले जा रही थी,
08:26जौश ने आखरी बार समंदर को देखा,
08:28और फिर खुद को पानी में फेंका,
08:30हर लहर को चीरता हुआ,
08:32कापता, तूटता, गिसटता हुआ,
08:35जब उसके पैर जमीन से टकराए,
08:37वो गिर पड़ा,
08:38नंगे पैर,
08:39सूखी आँखों से,
08:40कापते हुए,
08:41जैसे वो अपने ही पुनर जन्म का गवाह बन गया हो,
08:44स्थानी ये लोग दोड़े,
08:45और उनकी आँखों में डर था,
08:47और सवाल,
08:48ये कौन है,
08:49कहां से आया है,
08:51जौश को अस्पताल ले जाया गया,
08:53उसका वजन साथ किलो से घट कर,
08:55सिर्फ 38 किलो रह गया था,
08:57पूरे शरीर की मांसपेशियां गल चुकी थी,
08:59और तवचा के नीचे,
09:00सिर्फ हड्डियाओं बची थी,
09:02लेकिन ये सिर्फ उसका इलाज नहीं था,
09:05ये गवाही थी उस इंसान की,
09:07जिसने 438 दिन समंदर की आग और आंसूओं में तैर कर,
09:11एक ही बात साबित की,
09:12जब इनसान जीने की ठान ले,
09:13तो समंदर भी उसके आगे घुटने टेक देता है,
09:16अगर आप होते जौश की जगह,
09:18तो क्या आप भी 438 दिन तक उस नरक से लड़ पाते,
09:22क्या आप भी जिन्दा लोटने की हिम्मद जुटा पाते,
09:24जो भी हो, इतना तैय है,
09:26जब इनसान तूटने के बाद भी बिखरना नहीं चुनता,
09:29तो मौत भी रास्ता बदल लेती है,
09:31धन्यवाद दोस्तों,
09:32आपने इस वीडियो को अंत तक देखा,
09:34इसके लिए दिल से शुक्रिया,
09:36अगर आपको ये कहानी कुछ महसूस करवा गई हो,
09:38तो इस वीडियो को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर कीजिए,
09:41और चैनल को सबस्क्राइब करना मत भूलिए,
09:44क्योंकि हम फिर मिलेंगे,
09:45ऐसी ही एक सच्ची, संसनी खेज,
09:48और रूह तक हिला देने वाली कहानी में,
09:50तब तक के लिए,
09:51अलविदा और दिल से धन्यवाद
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