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महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव और राज ठाकरे के साथ आने का एक चैप्टर जुड़ गया। दरअसल शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे करीब 20 साल बाद एक ही मंच पर दिखाई दिए। दोनों ने मंच से दमदार भाषण दिए और एक दूसरे को गले भी लगाया। दोनों नेताओं ने हमेशा साथ रहने का वादा भी किया। लेकिन ठाकरे भाईयों के साथ आने पर राजनीति भी होने लगी है। दोनों भाईयों के साथ आने पर कांग्रेस और बीजेपी हमलावर है।

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00:00ुद्धव और राज ठाकरे का मिलन
00:13दरसल शिवसेना UBT प्रमुक उद्धव ठाकरे और मनसे के प्रमुक राज ठाकरे करीब 20 साल बाद एक ही मंच पर दिखाई दिये
00:21और दोनों ने मंच से दमदार भाशन भी दिये
00:25एक दूज़रे को गले भी लगाया और हमेशा साथ रहने का वादा भी किया
00:29लेकिन ठाकरे भाईयों के साथ आने पर राजनीती होने लगी है
00:34इसरेली को शिवसेना UBT के सांसत संजेर राउत ने एतिहासिक करार दिया
00:39वो 20 साल के बाद एक मंच एक मंच साधा कर रहे है
00:55थाकरे बंदूओं के साथ आने पर कॉंग्रेस की भी प्रतिक्रिया आई
01:12कॉंग्रेस के मुताबिक दोनों भाईयों का साथ आना तो ठीक है लेकिन हिंदी के खिलाफ आंदौलन दोनों का गलत है
01:19कि एक हो गए कोई इसी बात नहीं है लेकर लेकर हिंदी भाषी के खिलाफ को अगर अंदौलन चलाते है भाषा को लेकर तो यह दुखद है लेकि भारत के अंदर सर्व भाषा
01:39हर राज्य की अपनी एक भाषा होती है और सभी उसका सबान करते हैं कि इस तरह से सिर्फ इसलिए कि अगर उसको बराठी नहीं आती है उसको परतारीत करना यह महास्व नहीं
01:53वहीं इस कारेक्रम पर बीजेपी और एंडिये के साथ ही दल हमलावर हैं बीजेपी के मुताबिक ठाकरे बंदुओं को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीज को ठेंक्यू कहना चाहिए वहीं एंडिये के दूसरे नेताओं ने इसे स्वार्थ का मिलन बताया है
02:07देखिए मुझे ऐसा लगता है कि दोनों ठाकरे बंदु ने आज जो सवा उनने की है तो उसको उनने आवार सवा का नाम लेना चाहिए और इसमें उनने जो गलत जो मुख्यमंत्री रहते हैं उद्धोजी ने जो गलत निरने लिये थे हिंदी सप्टी का जो हिंदी त्रि�
02:37मुझे नहीं पता कि मन मुटाव मिटा है कि नहीं मिटा है कई बार तस्वीरे ऐसी सामने आती है जो राजनितिक लाप की दृष्टी से होती है ना कि विचारिक संबंदनों के जुडने से मैं ये मानता हूं सिर्फ दोनों राजनितिक लाप के लिए एक साथ आये हैं मुझ
03:07Thank you very much.
03:37जाहिर है के महराश्ट्र सरकार की थ्री लेंगुज पॉलिसी के तहट हिंदी पढ़ाने के फैसले ने उद्धव और राज ठाकरे को साथ लाने के लिए जमीन तयार कर दी। इस साल के अंत में महराश्ट्र में नगर निगम के चुनाव होने हैं और इन चुनावों में दोनो
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