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  • 7 months ago
बिहार सरकार हर साल 1.67 करोड़ खर्च करती हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ. जान जोखिम में डाल नाव का सफर मजबूरी.

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00:00रजधानी पटना से सटे दानापुर में गंगा नदी पर बने पीपापुल को निर्धारी समझ से पहले खोले जाने को लेकर दियारा छेत्र के लोगों में राज की दिखने को मिर रही है।
00:11हर साल लगभग एक कवर्शन सट लाक रुपे की लाकस से पुल गंगा नदी पर अस्थाई रूप से जोड़ा जाता है जिससे दियारा के साथ पंचायत के लोगों को आवा गंग में शुद्धा होती है।
00:41वहीं दियारा के रहने वाले राम बाबु राय ने कहा कि हम लोग को पैदल चलना पड़ता है और रात में किसी का भी तवियत खराब होने पर बहुत परिशानी होता है और किसी भी व्यक्ति के कभी कभी मौत भी हो जाती है।
01:11उसमें मानते हैं कि कोई अमर्जन्सी हो जाए तो यह मानने कि बाड़ा वजे रात के कोई अमर्जन्सी हो जाए।
01:19परिशे जाए।
01:21उस पाड़मा अस्पाताल कैसा है।
01:23नहीं चल रहा है।
01:25दियादा में होस्पीटल जो है।
01:27दक्तर लोग नहीं जाते हैं।
01:29हक्ता में गुए हैं उसके बाद में।
01:31परिशे जाए।
01:33दूकोश आने के लिए जाने के अफंड है।
01:37इतना हम लोग के दिखे।
01:39सरकाज पांदरा हूँ चला है या पांदरा किसा ली चला है।
01:43लेकिनी तो तो कुछ ध्याने नहीं है।
01:46जोचर को पाया है।
01:48कि दूकरे नहीं होता है।
01:52सुरसट लग के मने होता है।
01:55जितना दिन में लोग एक लाग सुरसथ हजर लगा है।
01:58कई गोप ख़ली पाया देतेते ह।
02:00हम लोग की पुरा दिया है।
02:02मने बहुत बनीड़ी अभी कास होता है।
02:04में कोई दीकत नहीं था।
02:06foreign
02:34દानापूर से ETV भारत के लिए राजेश कुमार के रिपोर्ट
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