00:00जान रखो कि दुनिया की जिन्दगी महस खेल और तमाशा और जीनत और आराईश और तुमारे आपस में फखर और सताईश और माल और आलाद की एक दूसरे से ज्यादा तलब और खाईश है।
00:12इसकी मिसाल ऐसी है जैसे बारिश कि उससे उगने वाली खेती किसानों को भरी लगती है फिर वो खेती खुब जोर पर आती है फिर आए देखने वाले तू उसको देखता है कि पक कर जर्द पढ़ जाती है फिर चूरा चूरा हो जाती है और आखिरत में काफिरों के लिए अ�
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