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  • 6/21/2025
युद्ध का देवता... भारत का वो हथियार, जिससे कांपता है पाकिस्तान, देखें वंदे मातरम्

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00:00वर तो गराइ।
00:01यह ब्aire we are dog
00:02वरी हें ग कि खान है Pरहुट
00:04यह ब्लुढ मारा-ओ।
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00:13तर्ड़ी अखलोग, तर्ड़ गें
00:16कि खकश्च्ब टर्ड़
00:19लौएज एंग
00:21तुपों की इस गर्जना से हार वासियों का विश्वास जगता है और दुश्मन का हौसला हिल जाता है
00:42जब कहर बरस्ता है गोलों का गोले दिखाई नहीं देते हैं कहां से आ रहे हैं एंड बड़ा डिवास्टेटिंग एफेक्ट होता है जहां पर वो गिरते हैं बड़ी तबाई होती है
00:58आर्ट्डरी की भूमिका अपने फायर पावर से दुश्मन के सामरिक चमता को इस हद तक छीन करना है कि उसकी युद की इक्षा शक्ती ही टूटता है
01:15यह ट्रेनिंग चल रही है और इस ट्रेनिंग के तोरान जो हम फायर कर रहे हैं केवल 1 10 फायर पार और जो एक्ट्वल लडाई होगी तो इसमें कम से कम दस गुना फायर पार उसके उपर आएगा
01:37कारगिल के अंदर तो सब ही जानते हैं अटलरी का क्या रोल था
01:44गंस ने फायर किया और बड़ा डिवेस्टेटिंग फायर दिया ताकि जो घुस्पेट अंदर आगे थे उनको आमने खदेड कर मार करके निकाला होगी
01:53पढ़ी सेना में 155 mm बोफोज का इस्तमाल होता रहा करगिल के युद्ध में किस तरीके से उसने पूरी बाजी को पलट दिया वो सबने देखा लेकिन अब है 155 mm धनुश्च और ये स्वदेशी है
02:00भाटिय सेना में 155 mm बोफोज का इस्तमाल होता रहा करगिल के युद्ध में किस तरीके से उसने पूरी बाजी को पलट दिया वो सब ने देखा लेकिन अब है 155 mm धनुश और ये स्वदेशी है
02:13मैं तो यह कहूँगा कि आत्मिर्वर ता और मेक इन इंडिया हमारे लिए बहुत जरूबी ये जो गन है इंडिया में जितने भी गन हैं सबसे जादा रेंज पर फायर करने वाली गन है
02:25प्रेनिंग के जिस हिसे में हम इस समय मौजूद है ये केड़ेट हिल कहलाता है
02:38अर्ष्ट का रोब के पिछे लाइन बाल शुरूद का एक ट्रेनिंग साइकल में एक साल के जगर में हम यहां तक्रीवन तीस कोर्सेज कंड़कर पहली बार ये फील्ड गंस के साथ यहां पर इस कार्रवाई को सीख रहें तीन मिनिट के अंदर इन्हें अप्रीस कार्रवा
03:08अगर हम जीतना चाहते हैं कोई भी द्वन या युद्ध हो या डूल फो हम चाहते हैं कि हम ऐसी दूर से उसको चोट पहुंचा है
03:36जहां से वो हमें न पहुंचा से
03:38रेजिमेंट ऑफ आर्टी गनर्जी इस लाइक गौड ऑफ वार
03:46नमस्कार जैहिंद वंदे मातरम मैं हूँ श्वेता से
04:00राश्ट्र रक्षा का दुर्ड संकल्प लिये
04:03भारत की सेनाएं किसी भी दुश्मन से लोहा लेने में पूरी तरीके से सक्षम है
04:10और आज हम आपको लिये चल रहे हैं उनके बीच जिने कहा जाता है युद्ध का देवता
04:15जी गौड ऑफ वार
04:17आज हम पहुंचे हैं रेजिमेंट ओफ आर्टिलेरी में ऑपरेशन सिंदूर के समय किस तरीके से भारत के हथियारों ने जवाब दिया था पाकिस्तान को
04:27उन्हें धुआ धुआ कर दिया था यहां की तस्वीरे देखकर आप स्पष्ट समझ सकते हैं हिंदूस्तान की वो ताकत
04:57आखों से उजल लेकिन वार में सटीक
05:18जब कहर बरसता है गोलों का गोले दिखाई ने देते हैं कहां से आ रहे हैं एन बड़ा डिवास्टेटिंग एफेक्ट होता है जहां पर वो गिरते हैं बड़ी तबाही होती है
05:32टार्गेट से मीलों दूर पर निशाना अचूक
05:40इस प्रटार से हमारी आर्टिलरी की प्रजवीश जो है वो दुश्मन को पूरी तरह से बरबाद करती है
05:49यह भारतिय सेना का वो अंग है जो तै करता है दुश्मन के ऊपर हमारा दबदबा
06:00रेजिमेंट ओफ आर्टिलरी
06:10आर्टिलरी की भूमिका अपने फायर पावर से दुश्मन के सामरिक छमता को इस हद तक छीन करना है
06:19कि उसकी युद्ध की इक्षाज शक्ती तूड़ जाए
06:22आपरेशन सिंदूर के दौरान एक बात सपष्ट रही
06:29कि युद्ध में ताकतवर रहने के लिए हमें समय और तक्नीक के साथ गदम ताल करना होगा
06:36और यही देखने समझने के लिए हम पहुँचे देवलाली स्थित स्कूल ओफ आर्टिलरी
06:42आर्टि का इतिहास बहुत ग्लोरियस है हमारे पास हाइस्ट विक्टोरियो क्रॉस भी हमने इज़त के साथ कमाया
06:52तक्रीबन 26 बैटल ओनर्स को हमने अभी तक हासिल किया है
06:56यहाँ इतिहास से लेकर वर्तमान तक का सफर दर्ज है
07:03यहाँ भारतिय सेना के अफसरों और जवानों को बहुत ही साइंटिफिक ट्रेनिंग दी जाती है
07:09और यही भविश्य के युद्ध की तैयारी भी की जाती है
07:14यह हिंदुस्तान के शूरवीरू का रुद्रनाध है
07:25वो गर्जना जिसे सुनकर दुश्मन का कलेजा काप जाता है
07:29भारतिय तोप खानों की जो शक्ती है उनकी जो ताकत है
07:34वो दुश्मन के इलाके से उठते हुए दुए से भी पता चलता है
07:38और हमारे जवानों के सीनों में जलती आग से भी पता चलता है
07:42सेना की ताकत सैनिकों के शौर्य से है
07:50सेना की ताकत हथियारों उपकरणूं से है
07:55सेना की ताकत उन्नत तकनीक से है
08:01भारतिय आर्टिलरी विस्तरत उपकरणूं का इस्तमाल करती है
08:07इनमें हाविटसर से लेकर रॉकित सिस्टम तक है
08:10प्रमुक्तोर पर धनुष जो की एक 155 मिलीमीटर तोड हाविज़ा है
08:17M777 जो एक हलका 155 मिलीमीटर हाविज़ा है
08:21और पहाड़ी इलाकों में कारगर है
08:24ATAGS यानि Advanced Toad Artillery Gun System
08:28जिसे DRDO, TATA Advanced System और कल्यानी Strategic System ने मिलकर विक्सित किया है
08:33जहां तक रॉकेट प्रणालियों का सवाल है
08:51भारतिया आर्टिलिरी, Multiple Rocket Launcher System पिना का और स्मर्च का इस्तिमाल करती है
08:57ऑपरेशन सिंदूर में भारतिय सेनिकों ने इनी उपकरणों और बेशुमार काभिलियत के साथ तुश्मन को मुहतोर जवाद दिया था
09:09इंडियन आर्टिलिरी अलग-अलग तरे के सर्वेलांस डिवाइस, मोर्टार और मिसाइलों से लैस है
09:21भारतिय सेना लगातार अपनी आर्टिलिरी का आधुनी के करण कर रही है ताकि पुरानी प्रणालियों को नए बहतर सिस्टम से रिप्लेस किया जा सके
09:31जो सबसे एहम बात हमें नजर आई वो ये कि उपकरणों के लिहाज से हम तेजी से मेड इन इंडिया की तरफ वड़ रहे हैं
09:40यह है भारत में विक्सित पहला एक आपच्पन मिलीमीटर पैतालीस क्यालिबर धनुश गन
09:54कि बस्ट फायर करें तो तीन राउंड थी सेकेंड में इंटेंस फायर तो बारा राउंड तीन मिनित में और सस्टेंड फायर बैयालीस राउंड एक घंटे में ये कर सकता है
10:05बोफोज की टेकनोलोजी ट्रांसफर के आधार पर इसका दिकास किया गया था अमारी ओर्डिनेंस फैक्टरी में और अब 85 प्रतिशत तक ये स्वदेशी है धनुश गंजो है
10:16अगर युद्ध भूमी में इसकी तैनाती हो तो बेहगा तक साबित हो सकता है
10:20ये सिर्फ एक तोप नहीं है बलकि आत्म निर्भर भारत की पहचान है
10:30धनुश 155 mm की तोप है जिसे वाहन के साथ टोग किया जा सकता है यानि खीचा जा सकता है जिसका फाइदा इसकी तैनाती में होता है
10:40धनुश को जबलपूर की गन कैरिज फैक्टरी में अडवांस्ट वेपन्स औन एक्विप्मेंट इंडिया लिमिटेड ने बनाया है
10:522019 में इसे सेना में शामिल किया गया असल में ये बोफोर्स तोप की तकनीक पर ही बनी है
11:00लेकिन इसमें आज के जमाने की जंग के हिसाब से कई नए और जबर्दस चुधार किये गए है
11:07भाटिय सेना में 155 mm बोफोज का इस्तमाल होता रहा करगिल के युद्ध में किस तरीके से उसने पूरी बाजी को पलट दिया वो सब ने देखा
11:19लेकिन अब है 155 mm धनुष और यह स्वदेशी है इसकी खासियत क्या-क्या है
11:26फर्स्ट अफल यह पूरी तरह इंदिया में विकसित फर्स्ट 125 mm 45 का दिनुष्ट गन है जो कि GCF गन करेज फैक्टर जयवलपूर दौरा बना गया है
11:36यह बफोस के ट्रांसफर आफ टेकनोलोजी पर आधारित है निर्मान के दोरन इस गन में काफी अधिक इंप्रूमेंट्स किया गया है और इसमें अतरिक्त फीचर्स भी दिया गया है
11:44जिस के कारण इस्का रेंज का 30 किमीट्र से बढ़ कर 36 KM हो गया है और इसमें अधुनिक फीचस भी दिया गया है जिसके कारण यह स्वचलिष्ट लेइंग भी किया जा सकता इस गन से
11:59इस गण में मसिल वेलोसिटी रडार और इनेशिल नाविगेशन सिस्टम भी दिया गया है जिसे कारण फ़ईरिंग के दरण इस गण का कंसिस्टेंसी और एकुरेसी काफी बेतर हुआ है यह इंदियन आर्मियों के सभी प्रकार के अमिशन वन डेबल फई अमिशन इस गण से
12:29तरीके से सूटबल यह सारी चीज़ के सूटबल है धनुष रेंज फाइरिंग स्पीड और सटीकता तीनों में बोफोर्स से बेहतर साबित हुई है चाहे सियाचन की बरफीली चोटियां हो या राजस्थान की तप्ती रेत हर जगे इसने अपना दम दिखाया है धनुष त
12:59फाइर करने की क्षमता है जिससे इसका निशाना अचूख है आयाइटी मद्रास और कानफुर इसके लिए स्मार्ट गोला बारूद बना रहे हैं जिसमें 60 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार करने वाला रामजेट शेल और सठीकता वाला स्मार्ट शेल शामिल होगा जो
13:29धनु शाविजजा के दो और संसकरण ही एक 42 किलोमीटर रेंज वाला 52 क्यालिबर वर्जिन और दूसरा मुश्किल रास्तों के लिए टेट्रा ट्रक पर लगा हुआ माउंटेड गन सिस्टम ये गन सिस्टम अब भारतिय सेना की लदाक और अरुनाचल जैसी समवेधन शील
13:59धनुश के वल एक तोप नहीं है ये भारत की तक्नीकी आत्म निर्भरता वैज्यानिक प्रतिभा और सेन्य संकल्प का प्रतीच है जब दुश्मन आगे बढ़ेगा तो जवाब धनुश की गर्जना में होगा
14:16ये है के नाइन वज्र जैसा कि इसका नाम है ये वज्रपाथ ही करता है अपने दुश्मनों बे तोप खाने का एक ऐसा ओजार आप समझ लीजिए जो की
14:32रेगिस्तानी इलाकों में एक बहुत बड़ी बढ़त देता है हमारी सेना को
14:37आपने देखा कि किस तरीके से इसमें जो इसका पूरा क्रू है वो इसमें सवार हुआ है पाँच की संख्या में चाहे ड्राइवर हो चाहे जो कमांडर हो इसके देखने में एक टैंक जैसा आपको लगता है और उसी से आप इसकी खासियत को भी समझ सकते हैं
14:50क्योंकि ये अगर ट्राक्स पर है तो ये सीधे तोर पर इसे अगर युद भूमी में डिप्लॉय होना है तो इसे किसी तरह की और सहायता की आविशक्ता नहीं होती है किसी और गाड़ी से इसे ले जाने की आविशक्ता नहीं होती है ये खुद बखुद इन ट्राक्स के जरि
15:20भारत में इसका निर्मान अब हो रहा है
15:232018 में ये भारतिय सेना में आ चुका है
15:25यानि कि आत्म निर्भर भारत की सेना की ओर एक बड़ा कदम
15:28पहले ऐसी आधूनिक तोपे हमें दूसरे देशों से खरीदनी पड़ दी थी
15:46लेकिन अब भारत खुद इन्हें बना रहा है
15:49ये दिखाता है कि हम रक्षा के क्षेत्र में कितने आत्म निर्भर हो रहे हैं
15:55के नाइन वज्र को मेक इन इंडिया पहल के तहट लार्सन आन्टूरो ने बनाया
15:59इसकी खासियतें देखेंगे तो आप इसकी ताकत को और बहतर समझ पाएंगे
16:04के नाइन वज्र एक शक्ति शाली 155 mm बावन क्यालिबर सेल्फ प्रूपेल्ट हाविजब प्रणाली है
16:12ये लंबी दूरी तक सखीक तरीके से फायर कर सकती और तेज गती से गोले दाग सकती है
16:19इसकी पायर रेट 6 राउंड प्रती मिनट है
16:23इसकी मल्टी राउंड सिम्यूलेशन इंपाक्ट शमता से कई गोले एक साथ लक्ष पर गिरते हैं
16:30इसमें उन्नत पायर कंट्रोल और नाइट विजिन भी है
16:34इसे एक जगे से दूसरी जगे ले जाना बेहद आसान है
16:42खास कर रेगिस्तानी या मुश्किल इलाकों में
16:45इसमें जवानू की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है
16:48ये दुश्मन के हमलों को जेलने में भी सक्षम
16:52के नाइन वज्र भारत के लिए गेम चेंजर है
17:01इसकी सबसे बड़ी वज़े है इसकी तेज जाल और घातक मारक शमता
17:06ये तीजी से दुश्मन पर हमला कर सकती है
17:09और जल्दी से अपनी जगे बदल सकती है
17:11जिससे दुश्मन को इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है
17:15ये बात युद्ध के मैदान में बड़ी पढ़त देती है
17:19उनकी गन की रेंज और इस गन की रेंज में बहुत फरक है
17:30ये गन 40 किलमेटर तक फायर करती है
17:32और वो सिर्फ डारेक्ट इंगेजमेंट के लिए होता है
17:34इसमें टूप्स के बैठने की पॉसिबिलिटी है
17:36येस येस अफकोर्स
17:37ड्राइवर और क्रू के बिन सब कुछ अंदर है
17:39बाकी चीज़ें सब उसी तरीके से है
17:41के नाइन वजरुप भारत के बढ़ते रक्षा उत्पादर नोर हमारी इंजीनियर्स की काबिलियत का प्रतीक है
17:49ये तोप हमारी सीमाओं की सुरक्षा में एक मजबूत दीवार बनकर खड़ी है
17:55ये प्रिंसिपली डेजर्ट में इंप्लॉय होगी
18:03मेकनाइजड फॉर्मेशन के साथ
18:06और ये अल्ट्रालाइट होविट्जर है ये प्रिंसिपली मौंटेंज के लिए
18:10ये अल्ट्रालाइट होविट्जर है जिनकी फारिंग आप इस समय देख रहे हैं
18:15जो पहाड़ी इलाके होते हैं वहाँ पर इन बंदूकों को इन तोपों को ले जाया जाता है
18:20और वहाँ से प्रिंसिपल के इलाके पर वार करते हैं ये बहुत कारगर साबित होते हैं
18:25क्योंकि इनका वजन अल्ट्रा लाइट होता है और इनकी जो शक्ती होती इनका निशाना होता है वो अचूख होता है इसलिए किसी भी युद्ध में ये गेम चेंजर साबित होते है
18:36M777 अल्ट्रा लाइट हाविजजा 155 mm की 39 कालिबर गन है इसका वजन है चार टन इन्हें चिनूक हेलिकॉप्टर के जरिये लिफ्ट करके पहाड़ी इलाकों में तैनात किया जा सकता है
18:53भारत के सरहदी इलाकों में हजारों फीट की उचाई पर ये हमारी सैनिक शमता को बढ़ाते है
18:59Line of Actual Control यानी LAC पर चोटिया 20,000 फीट से अधिक भी है और इस क्षेत्र में इस आर्टिलरी गन की मौजूद्गी बहुत महत्वपूर है
19:10इससे कई तरह के आम्यूनिशन को फाइर किया जा सकता है
19:19अलग-अलग राउं के इस्तमाल के साथ इसकी फाइरिंग रेंज 40 किलोमीटर तक हो सकती है
19:24भारत अलग-अलग तरह के गन्स का प्रयोग करता है
19:33स्कूल अफ आटिलरी में हमने बारीकी से इस पर सैनिकों की ट्रेइनिंग भी देखी
19:38इंडिनाटे की बेसिक गन है इंडिन फील गन उसके ओपर इनकी गंडल की प्रपरेशन की जा रही है
19:48इसमें एक डिटाच्मेंट होती है जिसमें साथ मेंबर होते हैं
19:51हर मेंबर की एक ड्यूटी होती है इसमें हर मेंबर की ड्यूटी इनको इससे बाकफियत की जाती है
19:57तैसे इसमें बोलते हैं नमबर वन से लेके नमबर साथ सक तो नमबर वन जो होता है वो डिटाच्मेंट कमांडर होता है
20:03तो डिटाज्मेंट कमांडर की जिम्मेदारी है कि गन के उपर जो भी एक्शन किये जा रहे हैं वो सेफटी उसमें ध्यान रखा जाए
20:10और जो भी आदेश उसको गन पोजिशन आफसर से मिल रहे हैं वो उस आदेश को पालन कर आए
20:15इस गन को डिपलाई करने के लिए तीन मिनिटे लगते हैं तीन मिनिटे के अंदर ये गन एक्शन में आदा दिया है
20:20पुल मिलाकर भार्दिय सेनिकों को उपकरणों की पूरी जानकारी के साथ साथ युद्ध भूमी की परिस्थिटियों में इनके इस्तिमाल और तेजी से डिप्लॉइमेंट पर फोकुस रहता है
20:33अब समझिए कि किस तरीके से जो हमारी विद्वनसक शमता है वो बढ़ जाती है
20:48600 से 800 मीटर के डाइरे का पूरा इलाका ये द्वस्त कर सकते है
21:03शिव के तांडव सा प्रचंड जिसकी ज्वाला शिव के त्रिनेत्र जैसी प्रलयंकारी है
21:21जिसकी गर्जना से रड़ भूमी काप उठे इसी लिए नाम शिव के धनुष पर पड़ा पिनाका
21:32कर्गिल से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक हर युद्ध भूमी में शक्त्रु संहारक बन कर उत्रा
21:38ये है आत्म निर्भर भारत की शक्ती पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉंचर सिस्टम
21:481999 के कर्गिल युद्ध में पहली बार जब पिनाका ने पाकिस्तानी पोस्ट पर वार किया था
22:01तब पूरी दुनिया ने भारत की रक्षा तक्नीक को नए नजरिये से देखा था
22:061986 में DRDO ने इसे रूस के BM21 ग्राज सिस्टम के विकल्प के रूप में तैयार किया था
22:16आज ये केवल भारतिय सेना की रिण नहीं बलकि दुनिया में भारत की टेक्नॉलिजी का दम है
22:21इतना ही नहीं भारत अब इसका निर्यात भी कर रहा है
22:252023 में आर्मेनिया ने भारत से पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉंचर सिस्टम लिया था
22:36और अब फ्रांस भी इसे खरीदने की तैयारी में
22:39पिनाका के कई संस्क्रण तैयार हो चुके हैं
22:43मार्क वन से लेकर मार्क थ्री तक मार्क थ्री की मारक शमता 120 किलोमीटर तक पहुँच चुकी है
22:49गाइड़ और अनगाइड़ दोनों तरह के रॉकेट शूट एंड स्कूट शमता
22:54और अब आधूनिक नाविगेशन सिस्टम से यह और भी सटीक बन चुका है
22:59अपरेशन सिंदूर में पिनाका ने दुश्मन के होसले और बंकर दोनों तबाह करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी
23:12दुश्मन को मौका मिलने से पहले ही जवाब देना यही है इसकी ताकत
23:17एक ऐसा सिस्टम जो आत्म निर्भर भारत का हथियार भी है और भरूसाद है
23:23यहाँ देखिए कि दुश्मन का फैलाव जैसे हमारे टैक्टिकल कमांडर ने देखा
23:32दुश्मन के उपर भारी तादाद में फायर आ रहा है और आप इमयजिन कीजिये कि
23:41यह ट्रेजिंग चल रही है और इस ट्रेजिंग के तोरान जो हम फायर कर रहे हैं केवल एक
23:44एक वन टेंथ फायर पार है और जो एक्चुल लडाई होगी तो इसमें कम से कम दस गुना फायर पार उसके उपर आएगा और विभिन उपकार के जो हमारे फायर पार उनिट्स हैं
23:54मीडियम्स, 105 सभी प्रकार के और रॉकेट इसके उपर फायर होते हैं और आप देखेंगे कि इसके बाद दुष्मन के लिए वहां पर कोई चारा नहीं रह जाता है और इस प्रकार से हमारी आटलरी की तद्वीज जो है वो दुष्मन को पूरी तरह से बर्बाद करती है वी �
24:24ट्रेनिंग के जिस हिस्से में हम इस समय मौजूद है ये केडेट हिल कहलाता है और यहां पर निगरानी और आक्रमन कैसे करना है उसके लिए ये भारी भर कम उपकरण आप इस समय देख रहे हैं लेकिन किस तरीके से ये सारी चीज़ें होती है वो हम अब समझ लेते हैं क्य
24:54आतंकी ठेकानों पर हमला किया तो उसने हमारे सेन्य इलाकों और नागरिक बस्तियों को निशाना बनाया
25:00भारत अगर इन हमलों को नाकाम करने में सफल रहा तो इसकी बड़ी वज़े हमारे वो उपकरण है जिनके जरिये हमने इसे डिटेक्ट किया और निश्क्रिये किया
25:14किसी भी मिलिटरी ताकत के तीन मूलबूत हिस्से होते हैं पहला उनका मनूवर इल्मेंट उनके फायर पार रिसोर्स और सर्विंस असेट और लराई के मैदान में उनके जीत के लिए ये जरूरी है कि इन तिनों जो मूलबूत इसके हिस्से हैं वो सक्षम हो और उनमें आ�
25:44और वेरियस सर्विंस एकिपेंट्स होते हैं जिसकी मदद से हम कम से कम समय में दुस्मन के इलाके के बाड़े में जानकारी और लराई के मौझूत हालात के बाड़े में हम जानकारी प्राप्त करते हैं जिससे कि हमें आने वाले बक्त में उसके आगे की करवाई करने में हम
26:14उपकरणों को विक्सित किया है
26:16तो इनसान और उपकरणों का जब संतुलन होता है
26:23इनसान तो खुद को सुधारता रहता है प्रशिक्षन से
26:26उपकरण में जो सुधार होता है उसकी भी उतनी ही जरूरत होती है
26:28आपके सामने रखा गया यहागन सिस्टम
26:36Advanced Toad Artillery Gun System कहलाता है
26:39जिसको हम आम तोर पे एटाइक्स के नाम से जानते है
26:42यह जो एटाइक्स है यह स्वदेश में डिजाइन किया गया
26:47सबसे पहला वन्डबल फैमें 52 कैलिबर गन है
26:50और इसको पूरी तरह के से इंडियन प्राइवेट इंडेस्ट्री ने मैनुफेक्चर किया है
26:55इसका डिजाइन आमामेंट रीसर्च और डेवलोपमेंट एस्टाइश्मेंट
26:59जो की DRDO का हिस्सा है और इंडियन आटलेरी का सहयोग से बनाया गया है
27:04यह जो गन है इंडिया में जितने भी गन हैं सबसे ज़ादा रेंज पर फायर करने वाली गन है
27:10इसके रेंज 45 किलो मीटर है और इसमें आटोमेटिक लोडिंग फायरिंग केपेबिलिटी है
27:18इस गन में एक उक्जिलरी फायर प्वार यूनिट है जो गन को स्वचलित काम करने में बवकू भी मदद देता है
27:24आप देख सकता है गन गन बैरल को ऊपर और नीचे करने में दाय अबाय करने में बहुत आसानी से आपरेटर एचिव कर सकता है
27:32गन का डिजाइन जो है बारत में हर क्षेत्र में उपयोग करने के नजरिये से बनाए गया है
27:37मतलब डेजर्ट में भी और पहाडों में भी यस दोनों जगे हो सकता है
27:40यह ज़रूरी होता है कि हम जितनी शक्ति से वार कर सके उतनी ही ताकत से अपना बचाओ भी कर सके
27:47और ऐसे में हम आपको दिखाते हैं अपने काउंटर बैटरी फायर सिस्टेम्स भी जैसे यह स्वाती वेपन लोकेटिंग रेडार है यह दुश्मन की तरफ से अगर रॉकेट्स फायर किये जाएं गोले फायर किये जाएं तो यह दुश्मन के हथियारों को लोकेट कर सकता है
28:17कि कमुवेश उसी तरह की परिस्थितियां कि अगर अगर अपनी फायरिंग में कुछ गलतियां हो रही है उसके करेक्शन के लिए भी यह साफ तौर पर निर्देश देता है
28:47यह हमारा वेपन लोकेटिंग रडार स्वाती है यह देश का पहला बना हुआ भारत का स्वदेशी वेपन लोकेटिंग रडार है और इसे भारत एलेक्ट्रोनिक लिमिटेट पैंगलोड ने बनाया है यह वेपन लोकेटिंग रडार जो है डॉपलर रडार प्रिंसिपल प
29:17प्रवाद कर सकते हैं हमारा ये वेपन लोकिटिंग रड़ार ये गेम चेंजिंग है क्योंकि इससे पहले हम एंटीपी की 37 रड़ार यूज करते थे जो यूएस का बना हुआ था और उसको हमारे आत्म निर्वर्भारत में कंप्लीट हमारे इसे डियाडियों ने जो बनाया ह
29:47कि हमारे पास ये ऐसलविपन है कि जैसे ही उनकी गण्स या मोटरस याया रॉक्ति ऊपन करते हैं हम उनके काउंटर भृ میदो करके अनूसार अपने उपकरणों को विक्सित किया जिन एलाकों में प्राकृतिक अवरोधे होते हैं वहाँ के यह और सुपकरण है
30:16यह हमरा है ELM 2140 मीडियम फील्ड बैटल फील्ड सवरेंस रडार है जो यह डॉपलर प्रिंसिपल पर काम करता है यह रडार दुसमन के जमीनी एवं लो फ्लाइंग टागेट्स जैसे उनके टुप्स, टैंक्स, हेलिकॉप्टर सित्यादी को डिटेक्ट करता है अभी आप दे
30:464-0 रडार को मांच करते हैं जिससे कि हमें दूर सर्वलेंस करने पे आसानी होती है और जहां भी इसका प्लेन और जेडर्ज में इसका काफी उप्योग होता है जिससे कि हमें सर्वलेंस करने में दुसमन की लाके में काफी सहुलियत होती है और हम अपने सर्वलेंस ग्रिट
31:16कुलतनी है में इन एक हमीं में है घुना को हम कम से कम समय में जो भी दुसमाइन की गतिभीदियों के बाड़े
31:25वांद करें जिस्से हमारे मिल्ट मिल्ट कमांडर्स समय से और टैम्ली डिसीजन ले सके
31:28कि हमें क्या एक्षन लेना है और ये हमें एक बहुत बड़ा पोटिंट हमरा इन्फोर्मिशन है जिसे कि मलें मिट्री कमांडर को काफी एक अच्छी ताकत मिलती है जो सूस्बूस से कोई भी आगे का कदम उठा सकते
31:38स्कूल ओफ आर्टिलरी में वर्तमान की ताकत और ट्रेनिंग को समझते हुए हमने इतिहास भी देखा ताकि भविश्य का आकलन बेहतर तरीके से कर सके
31:59यह देखे यहाँ पर पूरे देश के आर्टिलरी का एतिहास एक ही जगे पर आपको मिल जाएगा वैसे तो जो पहला रिकॉर्डेड आर्टिलरी का इस्तिमाल है भारत में वो 1368 का जब विजय नगर किंडम के लिए लड़ाई छिडी हुई थी उस समय उसका इस्तिमाल हु
32:29मैं आपको बताई कि कंटिनियूसली आर्टिलरी हमेशा से आगे से आगे अगर सरे एडवांस होती रही है तो अगर आप एक बर्ड जाई व्यू इस पार्क में देंगे जिसका पार्क का नाम गंसूदी एजिस है जिसमें मेजर मेजर गंसिस्टम कैसे इवाल होई वाप द
32:59होते थी जैसे जैसे थोड़ा एडवांस्मेंट आई टेकनोलोजी चेंज होई तो हमारे पत्थर वाले रहे होंगे या बारूद वाले रहे होंगे एक्चुली इसमें पत्थर फायर होता है और उसको फायर करने के लिए जो पीछे से प्रोपोल्शन धका होता है वह बाद
33:29मेटल के एक्विपमेंट आये जो मराथा फोर्सिस के पास भी थे और बिटिश फोर्सिस के बाद पास भी थे यह लगभग पांच सभियों का आटिलरी का इतेहास आज के हिंदुस्तान की ताकत दुनिया देख रही है और हम हम देख रहे हैं भविश्य की ओड़
33:59पहले हम जनली 20, 25, 30 km की बात करते थे आज हम गन सिस्टम के थूँ बात करते हैं 35, 40 km के बीच के अंदर जो कि एक बहुत बड़ी वीच है जिससे हम दुश्मन के मिडल लेवल के हिस्से तक हम गन्स के थूँ पहुंच सकते हैं यह तो हुआ गन सिस्टम के अंदर जैसे मैं
34:29जस्ता common terminology I can say, drones है, quadcopters है, RPVs है और अब तो इसकी variety of industry भी जो है, as the technology is developing, अपने various shades of variety में इसको बनाएगी, we are having an eye on that, अब हम इसको exploit कर रहे हैं कि कितना deep हम इसे बेच सके, इसके जरीए हम target को acquire कर सके, surveillance रख सके, और फिर उस data को ले करके, हम guns को pass करके, उस target को engage कर सके, तो �
34:59drone technology हुई, चाहिए हमारी गंज की दूर मारक समता हुई, इसको हम पूरी तरीके से imbibe करके, मेरे ख्याल से future wars के अंदर एक बहुत ही एहम हिस्सा साबित है, युद्ध तक्नीक के क्षेत्र में दुनिया बहुत तेजी से बदलती है, ऑपरेशन सिंदूर में भारत की ताकत �
35:29तक्नीकी तोर पर मजबूत होना, उपकरणों के हिसाब से मजबूत होना कितना आवश्यक है, ये हाल के समय में औप सिंदूर के समय सबको समझ में आ गया, और आज जो हमने रेजमेंट ओफ आर्टिलरी में आपको ये तस्वीरें दिखाई है, अपने उपकरण दिखाए ह
35:59आतरम.

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