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  • 6/20/2025

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Transcript
00:00Today we are going to go to a special history of the place of the Nandana.
00:07Yes, which is close to the city of Pindalan Khan.
00:11Yes, you can see that there is no real popular Nandana.
00:16Here is a very common history of the Nandana.
00:20Yes, we are going to go to the Nandana, the Nandana, the Nandana, the Nandana, the Nandana, the Nandana, the Nandana and the Nandana.
00:28Yes, we are going to go to the Nandana.
00:58Yes, where are the Nandana, which are called The Nandana.
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02:061%? 11th century?
02:09Yes, 11th century?
02:11This was a non-cabal faith.
02:14This was a strange thing.
02:16At the time of the world, many people
02:19understand the world and understand the world.
02:21If they understand the goal of the goal,
02:23then the size of the goal was not right.
02:26So, this was absolutely unfair.
02:29Absolutely.
02:30This was a false scientific technique.
02:32This was a false self-portive tool.
02:40This science, the worst practice of the world was different.
02:45This was a false scientific technique.
02:47Yes, absolutely.
02:49This is a false information.
02:51Yes, that's why the world of other parts of the world were like science-dance.
02:56Or the other kind of work was different from the world?
02:59Yes, the first time the world of science-dance was different from the world.
03:02Like the Aratus Thinz had to be a dream.
03:05Yes, it was heard.
03:07Yes, but the Aratus Thinz had to be different from the world.
03:10They used to use this kind of work.
03:14It was a new thing.
03:16Yes, that was a new way.
03:19जी, और रियाजियाती तोर पर भी ये ज्यादा कहलें सुफिस्टिकेटिड था
03:25तो इस खास तरीके से और इतनी एक्यूरिसी के साथ जमीन का रुद्दास निकालना
03:30ये वाकिए उस वक्त एक मुन्फरद इल्मी च्हलांग थी
03:33ये कोई तुक्का नहीं था
03:35समझ गए
03:36लेकिन आज अगर कोई वहाँ जाए, किला नंदाना
03:40तो सूरत-इहाल क्या है?
03:42अफसोस की बात है
03:42हाँ, वही, हजार साल पहले जहां इल्म का इतना बड़ा काम हुआ
03:47आज वो जगा काफी हद तक नजर अंदाज है
03:51किले की हालत भी कोई बहुत अच्छी नहीं
03:53खस्ता हाली का शिकार है
03:55और सबसे बुड़ी बात
03:56महाँ जाने वालों को कोई तख्ती, कोई बोर्ड, कुछ नहीं मिलता
03:59जिससे पता चले कि यहां अलबरूनी ने क्या कमाल किया था
04:02जी, इसकी साइंसी एहमियत का कोई निशान नहीं
04:05बिल्कुल, हम मगरिब के साइंसदानों को जानते हैं
04:09गैलीलियो, न्यूटन, नाइनस्टाइन
04:10और उनकी इज़द भी करनी चाहिए
04:12लेकिन ये कितना अजीब है
04:13कि अलबरूनी जैसा जीनियस
04:15जिसने हमारी अपनी जमीन पर ये काम किया
04:18उसकी यादगार इतनी खुमनाम है
04:20अगर हम इसे बड़ी तस्वीर से जोड़ें तो
04:22ये सिर्फ एंटों और पत्थरों का मामला नहीं है
04:25ये हमारे एक
04:26एक बहुत शानदार साइंसी विरसे की बात है
04:29सही
04:30किला नंदाना सिर्फ कोई फौजी किला नहीं रहा
04:33ये तो इनसानी जहानत इल्म की तलाश की एक जिन्दा अलामत है
04:37और जो तहरीर हम देख रहे हैं
04:40उसमें भी यही तजवीज है
04:41कि भई इस जगा की असल गदर को पहचाने
04:43उसे सिर्फ खंडर ना समझें
04:46तो क्या करना चाहिए
04:47इसे एक साइंसी आदगार के तोर पर डेवलेप किया जाए
04:50सोचें वहाँ एक छोटा सा म्यूजियम हो
04:52बच्चों के लिए तालबिल्मों के लिए तालीमी टूर्स हो
04:54हाँ ये तो बहुत अच्छा आइडिया है
04:56और इसे आलमी सकाफ्ती विर्सा
04:58यानि वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिलाया जाए
05:01ताकि पूरी दुनिया को अलबिरूनी के इस काम का पता चले
05:04तो इस सब का क्या मतलब है
05:07मतलब ये है कि किला नंदाना सिर्फ वो खंडर नहीं है
05:12ये सुबूत है कि इल्म, तहकीक, साइंस, उसकी रोशनी कभी यहां से भी फूटी थी
05:18जी बिल्कुल
05:19ये सिर्फ तारीख नहीं, ये हमारा फखर है
05:22एक विर्सा है जो हमें याद दिलाता है
05:25कि हमारे बुजर्गों ने भी दुनिया के इल्मे कितना इजाफा किया था
05:30ये हमारी शनाख्त है
05:31और यहां एक बात और भी है, जो शायद जादा है मैं
05:34सिर्फ किले की दिवारे ठीक कर देना काफी नहीं होगा
05:37अच्छा? वो क्या?
05:39असल सवाल ये है कि अल्बैरूनी के अंदर जो वो जुस्त जू थी, तहकीक का जजबा था, मुशाहिदे की लगन
05:46जी जी
05:46उस जजबे को हम आज कैसे जिन्दा करें?
05:49अपने तालीमी निजाम में, अपने मौशरे में, वो माहुल कैसे बनाएं, जहां सवाल पूछना, खोज लगाना, इल्म हासिल करना एहम समझा जाए
05:57हम, ये बहुत गहरी बात है
06:00क्या मालूम हमारी तारीख में अलबैरूनी जैसे कितनी और हीरो छुपे हूं, जिनके काम अभी दर्याफती नहीं हुए, जो हमें आगे बढ़ने की तहरीक दे सकते हैं?

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