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  • 8 months ago
हर साल बड़ी संख्या में सैलानी कोटमसर गुफा देखने पहुंचते हैं.

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00:00બस्तर अपनी प्राकृतिक सुन्दर्ता के लिए जाना जाता है
00:25घने जंगलों से घिरे बस्तर में कई प्राकृतिक जहरने और गुफाएं है
00:29इन प्राकृतिक नजारों को अपनी आखों में कैद करने के लिए देश विदेश सेलानी 36 गड़ाते है
00:35बस्तर के इन ही परेटक स्थलों में से एक है कोटम सर गुफा
00:39अपनी अद्भुत सुंदर्ता और रहस्यों के लिए आज भी ये परेटकों के बेस्ट टूरिस डेस्टिनेशन्स में से एक है
00:46माना जाता है कि इस गुफा की खोश सबसे पहले यहां रहने वाले आदिवासियों ने की थी
00:51बस्तर के आदिवासी इस गुफा को अपनी स्थानी भाषा में गुपानसर गुफा भी कहते है
00:56गुफा के भीतर से पानी का स्रोद बहता है
00:59इस गुफा से निकलने वाली ये जलधारा मीलो का सफर तैकर कांगेर नदी में मिल जाती है
01:05गुफा के भीतर जो जमीन से करीब 40 feet नीचे है एक महल नुमा खाली जगे है
01:10खाली जगे के चारों और उची उची पत्थरों की अलग अलग बनावट में दिवारे खड़ी है
01:15ऐसा लगता है जैसे किसी ने उसे सुन्दर बनाने के लिए जूमर नुमा आकरती बना दी है
01:21पूरी में घुप अंधेरा रहता है
01:23पानी बहने की आवाज जब इसमें गूंचती है तो इसका अलग आनन्द सुनने को परेटकों को मिलता है
01:29यहां पर सेलानी लगे कि मैं अब खौत काफी संख्या में आते हैं
01:35और इस सल्लग भग पांच लाग से उपर सेलानी आ चुके हैं
01:40इसमें से अलवाला वो डिर्सों के आसपास विदेशी सेलानी इसमें सामिल है और यह निश्चित रूप से जो पहले जैसा अब लगता था न की वस्तर जाना मतला की जो हमना सांती था डर था भाई था वह जिसमें
01:56गुफा के भीतर से बहकर निकलने वाने पानी में बड़ी संख्या में मचलियां
02:26मिलती है यह मचलिया कांगेर नदी से होते हुए गुफा के कुंड तक पहुंचती है गुफा में अंधिरा होने के चलते यहां मिलने वाली मचलियों की आखी नहीं होती है आखो पर चर्वी की मोटी परच चड़ी होती है मचलियों की तवचा सफेध होने के चलते यह काफ
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