00:00where I am so hard
00:02as long as I have never worked
00:04but this is my way
00:08and I have my loss
00:12to keep my lives
00:14about half of a team
00:16and I am the burden of God
00:18they are my suffering
00:20biology of my isn't
00:22but I have not
00:24my value of that
00:26my soul has been
00:28खुलूस दिल से समझती है
00:30कि बच्चे सिर्व बुजरूगों की दौा से पैदा हो जाती है
00:34ये नसल
00:37अपने कर्टूद को
00:39बुजरूगों की करामत समझती है
00:42और कस्वत आबादी से पैदा शुदा मसाइल को
00:49नौज बिल्लाह
00:50फजल इलाही से मनसुप करती है
00:53उस दमाने में फिल्मों तक मैं यहाल भा
00:58कि अफ़ल तो बोसो किनार की मन्जिल आती ही नहीं थी
01:02लेकिन अगर पब्लिक के तकाज़े से
01:07कोई नाज़ुक मकाम आही जाए
01:10तो वहीं स्थीन काट कर
01:12स्क्रीन पर सफेद कबूतरों का एक जोड़ा दिखा दिया जाए
01:17जो एक दूसरे की चौँच से चौँच में लाए बैठा होता था
01:22साहिबों हमारी सारी नसल इन दो कबूतरों के साहे में पलगर जवान हुआ
01:31लंदन में जहां मैं दस साल से मुकीम हूँ
01:37फिल्म या टीवी पर रात गए कोई ऐसा वैसा सीन दिखाते हैं
01:43तो बहुत खुसा आता है कि यहां हमारे जमाने में क्यों नहीं दिखाया गया है
01:52ऐसे मौके पर ऐसे मौके पर अपनी तरफ के भूले कबूतर बुरी तरह याद आते हैं
02:03इन अंग्रेजों को तो ढंग से मौबत करना भी नहीं आता है
02:08प्यार और फर्स्टेड में तमीज नहीं कर सकते हैं
02:12ऐसा लगता है जैसे माउथ टू माउथ रिससिटेशन दे रहा है
02:17हमारे हाँ तो इस तरह सिर्फ तुखमे आम चूसे जाते हैं
02:23हमारी फिल्मों में आज भी अगर गलती से हीरो का कुरता भी हीरोईन की उंग्ली को छू जाए
02:37तो वो गजबर मुची छलाग लगा के चीखती है जहान कडलाई बही माना है
02:43और नग्दीक तरीन दरख के तने से बगलगीर हो जाते हैं
02:51फिर हीरो उंग्ली पकड़ते पकड़ते अंगुटी पैना देता है
02:57फिर अंग्रेजी महावरे के मताबिख दे लिवड हैपिली एवर आफटर
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