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  • 1 year ago
Transcript
00:00स्वामी, जूठन बचा पड़ा है
00:28कुट्टों को डाल दे
00:30ओ कलुआ, वो जूठन वाले पतर उठा के ले या
00:34अरे, आज कुट्टे नजर नहीं आ रहे
00:44मालिक, ये लोग भगा देते हैं
00:47ताजों खाना खुद ले जासके
00:49कुट्टे का कुट्टा बैरी
00:54एई, अती शुद्र
00:56ये जूठन बची है
00:58ले जो
00:59हुँ
01:00हुँ
01:04हुँ
01:04हुँ
01:10हुँ
01:14हुँ
01:16हुँ
01:17हुँ
01:22हुँ
01:23हुँ
01:36आज की शाम ये रंगीन करेगी मेरी
01:54हुँ
01:57हुँ
01:58लुद।
02:14खजिए गजए खजए
02:16खजए झाया दो बख जए
02:20खजए
02:22आजए बख़।
02:24झाया
02:26मैंने का छोड़ दो मुझे
02:34जाने दो मुझे
02:37मेरी, मेरी, जाने दो
02:40जाने दो
02:56वो सुंदर औरतों को उठा कर ले जाते हैं
03:07ये स्थिती कब सुथरेगी
03:09जब हम सचे मन से
03:11अपने अधिकारों के लिए संकल्प करेंगे
03:15अपने पुर्शार्त वो संघर्ष शीलता पर पूर्ण भरूसा करेंगे
03:20अपने अधिकारों के लिए किसी भी तरह का त्याग और बलितान देने को तयार रहेंगे
03:26तब मिलेगी इन दुष्टों से आजादी
03:29सभी मूल निवासियों को एकठे होकर
03:32एक दिन इस जंगे आजादी में कूदना होगा
03:35नहीं तो ये इसी तरह हमारा शोशन करते रहेंगे
03:40चिंता मत करो आज रात ही हम तुम्हारी औरत को आजाद करा कर रहेंगे
03:48चलो मेरे साथ
03:50चोड़ दो मिजे जाने दो
03:58चोड़ूंगा तो तुम्हें नहीं
03:59ये तो पक्का है
04:02अपनी मर्जी से मेरे साथ रहोगी
04:06तो आजाद कर दूँगा
04:09अगर ना मानी
04:12तो यो ही गुलाब बना कर रखूंगा
04:16चोड़ दो मुझे
04:20तो तुम्हें ये ही हाँ
04:26चोड़ दो मुझे
04:28लेकिन तुम नहीं रहोगे इस धर्टापा
04:46परणाओं गुरुजी इन जंगनों में शुपे शुद्रों ने हमारी नाक में दम कर रखा है
05:00जंगनों में जाकर ढूडते हैं तो मिलते नहीं
05:18उनका एक ही हल है कुमार इंद्र गुलाम शुद्र उनका साथ ना दे इन सभी लोगों को मंद बुद्धी बनाना है ध्यान से सुनों
05:31इनकी बुद्धी में हमें भगवान, डर, बाप, बुन्य, पूर्व, जनम, नर्क, स्वर्ग, पुर्खों के बाप, योनी का चक्र, भाग्य, शुप, अशुप, बुरी नजर, कुंडिलेनी जागरण, तंत्र, मंत्र, यंत्र, जोतिश्फल, जाडफूक, जादू, टोना
06:01का, ग्रया नक्षत्रों के चक्रों में ऐसा उलजाएंगे, ये सदा के लिए हमारे घुलाम तो होंगे ही, इनकी आने वाली पीडियां भी इसी अंदविश्वास में उलजी रहेंगी, वाह, वाह, गुरुजी, वाह, आपकी महान बुद्धी को, उमारिंद्र का शचचच�
06:31तो शिक्षा, धन और संपत्ति के अधिकार से तूर रखना, जी गुरुजी, फिर देखना तुम ये लोग, गोबर, पत्थर, धन, अगनी सूरज, चांद, तारे, सापको भगवान मान के कैसे पूजा में उलजते हैं, धन्या गुरुजी, आप धन्या हैं, इनको मानसिक �
07:01दाम, यानि के धन देकर, दंड, कोई भी कठोर से कठोर दंड देकर, भेद, यानि की इनको कभी भी कठे मत होने देना, और इनकी शक्ति को कमजोर करना है
07:18प्रकृती ने मनुष्य को सभी जीवों से सर्वश्रेष्ट बनाया, लेकिन धर्ती के इस खंड में, ब्रामनों ने घोर कपट, वस्वार्च से मानव को ही निम्न घोशित करके, गुलाम बना लिया
07:31ब्रह्म वभय का ऐसा जाल बुना, कि पेड पौधे, पशू पक्षी, नदी नाले, मल मोत्र, परवत, सूर्य चांद, सितारे आदि को भी तैविये बताकर इनकी पूजा शुरू करवा दी
08:01हम्हम, शर्धम रक्षा में
08:14यह शुदरों की बस्ती है, हमारे आतों से तो, कोई पानी तक नी पीता, और आप भोजन मांगरे है
08:24जाए जाए जाए आप जहाँ से
08:28हमें भगवान ने अतिशुद्र बनाया है
08:31आप अप्रुवित्र हो जाएंगे
08:34मेरे भाई तो हमें शूने से मुझे कुछ नहीं हुआ
08:56हम सब इनसान है
08:58मेरे भाई वो कैसा बगवान है
09:01जो एक इनसान को अशूत बना दे
09:04आप महान है
09:06आप भी मेरी तरह महान बन सकते हो
09:10बो कैसे
09:11पहले तो अपने मन से
09:13हीन बावनाओं को दूर करो
09:15अपने आपको अशूत मानना छोड़ दो
09:19फिर अंध विश्वाश को छोड़ दो
09:21अरे मेरे भाई
09:23एक दूसरे के
09:25दुख और सुख में
09:27उरा साथ दो मेरे भाई
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