00:00उसके हाथों में जो खंजर है जियाता तेज है और फिर बच्पन से ही उसका निशाना तेज है जब कभी उस पार जाने का ख्याल आता मुझे कोई आहिस्ता से कहता था के दरियाते आज मिलना था बिछड जाने की नियत से हमें आज भी वो देर से पहुँचा है कितना ते अ�
00:30मेरे पास मैं तुम्हे कहता भी रहता था के दुनिया ते आज उसके गाल चूमे है तो अंदादा हुआ आज उसके गाल चूमे है तो अंदादा हुआ चाए अच्छी है मगर थोड़ा सा बीठा दे
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