00:00।। शूर पालन आज के समय में एक बड़ा वैवसाई बन कर उबरा है। । किसान भी सूर पालन कर सकते हैं। इसे लेकर उन्हें अधिक खर्च करने की भी जरुवत नहीं है।
00:10खेती के अवसिष्ट पदार्थ का उपयोग करते हुए सूर पालन किया जा सकता है।
00:15अजारी बाग जिले के अमनारी गाउं के दो प्रगतिसीर किसानों ने खेती में बचे अवसिष्ट के निप्टारा के लिए एक अनुखा तरीका अपनाया है, जो अब एक मॉडल बनता जा रहा है.
00:26सदर प्रखंड के अमनारी गाउं के राम परसाद कुस्वाहा और कॉलेसर कुमार ने मिलकर खेती से बचे अवसिष्टों के निप्टारे के लिए सुवर पालन की सुरवात की है. पहले जहां खेती से बचे अवसिष्ट को फिकना पड़ता था, अब वो अवसिष्ट सुवर
00:56यह भी हमारा सुकरपालण भी है, इसमें हम ठशके हूए है और गाराः पीस है, ती इंडिल का है, जो बहुत सुंदर नौसल है, हमारा जो भी विकस्टेज होता है, आत्ठा पत्ता खाना, आत्युता है, इस अवस प्रगत entitled रॉल्स, इसको हम के सुवर पाला में खिलाते ह
01:26foreign
01:54.
02:21ुपियोग करते हुई अपनी आई दोगूनी कर सकते हैं
02:26जिससे अवसिष्ट पदार्थ प्रबंधन का राष्टा भी साफ होगा
02:30साथी साथ आई में बहुत्री होगी
02:32गौर्व परकास ETV भारत हजारी बाग
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