00:00प्रियान आरंब किया है वह अपने आप में लोग भाषा और हिंदी को एक समद्दी देने का प्रयास है
00:27यह कितने आने वाली प्रीडी को आप चाहेंगे कि आधर्ष बनाए शेत्र में आए और कैसे कार किया जा सकता है
00:38जिसे समाज के लिए कहीं हम बेदर कर सकते हैं भाषा उतने बेदर कर सकते हैं
00:41ने मूलता क्या है कि हमारा एक मात्र जीवन का शेश लक्ष रहेगा
00:46हमारी जो मात्र भाषा है निमारी उसको राज भाषा का पद दिल्वाना राज भाषा पद पर अभिशिक्त करना
00:55और कहीं ने कहीं हम इस अभियान में यदि सफल हो जाते हैं तो संपुर्ण निमार से प्रेंड़ना लेकर इस देश की जितनी लोग भाषा हैं वो अपने अपने क्षेत्र में प्रयास करके संगर्ष करेंगी और इस देश की जो राश्र भाषा है उसे बहुत कुछ सम्रद
01:25और एक में जन्नायक टंटिया नाम का उपन्यास मध्यप्रदेश सरकार के स्वराज संस्तान ने प्रकाशित किया था और आपको अश्यर होगा हमारे जितने स्वराज संस्तान का साहित्य अभी तक प्रकाशित हुआ है उसमें एक मात्र टंटिया जन्नायक टंटिया मामा हम
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