00:00अब आप ने पुराने समय का जिक्र किया तो पुराने दौर में तो इस तरह की घटनाओं की हम लोग कलपना नहीं कर सकते थे
00:10और जो छात्र संग थे प्रियागराज या इलावादी नहीं पूरे देश के छात्र संगों में बहुत राजनैतिक विचार भाराओं की लोग रहते थे
00:23उनका शैक्षणिक और सामाजिक सांस्क्रतिक कारक्यम भी चलते थे
00:28शात्रों की समस्याओं को लेकर संगर्ष का भी दौर चलता था
00:32ये बंबाजी वगर्या का दौर तो केवल बंगाल में दिखाई पूरता था
00:37बंगाल में अक्सर इस तरह की घटनाएं होती रहती थी अक्सर क्या हम समझते हैं कोई
00:44ऐसा हफ्ता बंगाल में नहीं बीटता था जब वो लौजवानों की बीच या राजनैतिक विचार भारा के
00:52संगर्च के कारण बंब ना चर जा लेकिन वो बंब भी कुछ प्राणगा तक नहीं होते थी वो छोटे छोटे आपके समझ लेंके टेबिल टेनिस की गेंद की तरह या उससे कुछ बड़े या संतरे की तरह जो जान नहीं लेते थे लेकिन एक ज़शत पैदा करते थी बं�
01:22क्रिमिनल कर्यूति के लोगों के बीच इस तरह घट्राएं हो जाती थी दो चार-पार साल के अंतर पर बंब घर्र के जरीह रत्याएं हो जाती थी ये सिलसिला रहा है रुक रुक के रहा है जैसे आपको याद होगा निराला जी के पहत्र की हत्या हो गई सुल कांत्र पां�
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